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अलीगंज अग्निकांड के बाद लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) पर जांच एजेंसियों का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। शासन और एसआईटी की संयुक्त सख्ती ने पूरे तंत्र को कठघरे में खड़ा कर दिया है। शुरुआती सूची अब काफी आगे बढ़ चुकी है और 100 से अधिक अधिकारी व इंजीनियर जांच के दायरे में आ सकते हैं।

UP News : अलीगंज अग्निकांड के बाद लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) पर जांच एजेंसियों का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। शासन और एसआईटी की संयुक्त सख्ती ने पूरे तंत्र को कठघरे में खड़ा कर दिया है। शुरुआती सूची अब काफी आगे बढ़ चुकी है और 100 से अधिक अधिकारी व इंजीनियर जांच के दायरे में आ सकते हैं। जांच को व्यापक रूप देते हुए 2014 से 2026 के बीच अलीगंज क्षेत्र में तैनात रहे सभी संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को भी सूचीबद्ध कर लिया गया है, जिससे मामले की जांच अब व्यक्तिगत नहीं बल्कि पूरे प्रशासनिक ढांचे की जिम्मेदारी तक पहुंचती दिख रही है। UP News
शुरुआत में एलडीए की ओर से सिर्फ 19 इंजीनियरों और 6 पीसीएस अधिकारियों की सूची भेजी गई थी। लेकिन शासन ने इस सूची को अपर्याप्त मानते हुए पूरी जिम्मेदारी तय करने के निर्देश दिए। इसके बाद अब जांच का दायरा बढ़ाकर पिछले 12 वर्षों में तैनात सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को शामिल कर लिया गया है। सूत्रों के अनुसार, यह विस्तार उन सभी स्तरों की भूमिका को समझने के लिए किया गया है जिनका संबंध निर्माण अनुमति, निगरानी और अवैध निर्माण पर कार्रवाई से जुड़ा रहा है। शुक्रवार को शासन द्वारा गठित एसआईटी ने एलडीए अधिकारियों को तलब किया। इस दौरान एलडीए उपाध्यक्ष (VC) प्रथमेश कुमार और एक अपर सचिव ने टीम के सामने पेश होकर जवाब दिए। बैठक में आग लगने की घटना, अवैध निर्माण की अनुमति और निगरानी व्यवस्था में हुई चूक को लेकर विस्तार से सवाल किए गए। एसआईटी ने यह भी पूछा कि भविष्य में ऐसे हादसों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए एलडीए ने क्या ठोस और व्यावहारिक कदम उठाए हैं। UP News
गुरुवार को ही एसआईटी ने एलडीए से कई अहम दस्तावेज मांगे थे। इनमें संपत्ति आवंटन से जुड़ी फाइलें, भवन मानचित्र स्वीकृति रिकॉर्ड और अवैध निर्माण पर ध्वस्तीकरण आदेश वापस लेने से संबंधित फाइलें शामिल थीं। ये सभी दस्तावेज जांच टीम को सौंप दिए गए हैं। अब इन फाइलों की गहन जांच की जा रही है ताकि निर्णय प्रक्रिया और जिम्मेदारी का स्तर स्पष्ट किया जा सके। सूत्रों के अनुसार, संपत्ति, नक्शा स्वीकृति और विहित प्राधिकारी से जुड़े कई अधिकारियों को शनिवार को एसआईटी के सामने बयान दर्ज कराने के लिए बुलाया गया है। इसके साथ ही 100 से अधिक अधिकारियों और इंजीनियरों की विस्तृत नई सूची भी जल्द शासन को भेजी जाएगी। UP News
एलडीए द्वारा पहले भेजी गई सूची में केवल 19 नाम शामिल थे, जिनमें अधिकांश सेवानिवृत्त और एक दिवंगत अभियंता का नाम था। शासन ने इस सूची को अधूरी बताते हुए खारिज कर दिया था और पूरे सिस्टम की जिम्मेदारी तय करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद अब पूरे 12 साल की कार्यप्रणाली जांच के दायरे में आ गई है। जांच के दायरे के विस्तार के बाद भी कई अहम सवाल अनुत्तरित हैं। क्या 2014 से 2026 तक हर स्तर के अधिकारी जिम्मेदारी तय होने पर कार्रवाई के दायरे में आएंगे? ध्वस्तीकरण आदेश वापस लेने की प्रक्रिया आखिर किसके निर्देश पर आगे बढ़ी? क्या 100 से अधिक नामों की सूची वास्तविक कार्रवाई में बदलेगी या यह जांच सिर्फ कागजी प्रक्रिया बनकर रह जाएगी? UP News
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