उत्तर प्रदेश के हाईकोर्ट ने कहा है कि ईसाई धर्म अपना लेने के बाद आरक्षण का फायदा उठाने के लिए हिन्दू बना रहना धोखाधड़ी है। उत्तर प्रदेश के हाईकोर्ट ने फैसले में साफ-साफ कहा है कि इस प्रकार की धोखाधड़ी को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। उत्तर प्रदेश के हाईकोर्ट के इस फैसले की खूब चर्चा हो रही है।

UP News : उत्तर प्रदेश के हाईकोर्ट का नाम इलाहाबाद हाईकोर्ट है। उत्तर प्रदेश के हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। उत्तर प्रदेश के हाईकोर्ट का यह बड़ा फैसला धर्म को लेकर है। उत्तर प्रदेश के हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि धर्म के नाम पर धोखाधड़ी को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है। मंगलवार को सुनाया गया उत्तर प्रदेश के हाईकोर्ट का बड़ा फैसला चर्चा का विषय बना हुआ है। उत्तर प्रदेश के नागरिकों का कहना है कि उत्तर प्रदेश के हाईकोर्ट का बड़ा फैसला पूरे देश के लिए बड़ा उदाहरण बनेगा।
उत्तर प्रदेश के हाईकोर्ट ने मंगलवार को बहुत बड़ा फैसला सुनाया है। अपने फैसले में उत्तर प्रदेश के हाईकोर्ट (इलाहाबाद हाईकोर्ट) ने कहा है कि जब कोई व्यक्ति अपना हिन्दू धर्म बदल लेता है तो वह आरक्षण का फायदा उठाने के लिए फिर से हिन्दू नहीं बना रह सकता है। उत्तर प्रदेश के हाईकोर्ट ने अपना हिन्दू धर्म बदलकर ईसाई धर्म अपना लेने के एक मामले में यह बड़ा फैसला सुनाया है। उत्तर प्रदेश के हाईकोर्ट ने कहा है कि ईसाई धर्म अपना लेने के बाद आरक्षण का फायदा उठाने के लिए हिन्दू बना रहना धोखाधड़ी है। उत्तर प्रदेश के हाईकोर्ट ने फैसले में साफ-साफ कहा है कि इस प्रकार की धोखाधड़ी को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। उत्तर प्रदेश के हाईकोर्ट के इस फैसले की खूब चर्चा हो रही है।
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज शहर में स्थापित इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला देते हुए कहा है कि यदि कोई व्यक्ति धर्म परिवर्तन कर ईसाई बन जाता है तो वह अपनी मूल जाति का दर्जा खो देता है। ऐसे में उसे एससी/एसटी का लाभ लेने का अधिकार नहीं रह जाता। ऐसा करना संविधान के साथ धोखाधड़ी है। इस टिप्पणी के साथ कोर्ट ने मुख्य सचिव (यूपी सरकार), अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव/अपर मुख्य सचिव, समाज कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव व यूपी के सभी डीएम को आदेश दिया कि वे चार महीने में ऐसे मामलों को रोकने के लिए कानून के अनुरूप कार्रवाई करें। भारत सरकार के कैबिनेट सचिव को भी आदेश भेजने का आदेश दिया है।
उत्तर प्रदेश के हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति प्रवीण कुमार गिरि की पीठ ने जितेंद्र साहनी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के आरोप में दर्ज मुकदमे की कार्यवाही को रद्द करने की मांग खारिज कर कहा कि ट्रायल कोर्ट ही साक्ष्यों की जांच करेगा। महाराजगंज के सिंदुरिया थाने के जितेंद्र के खिलाफ विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी बढ़ाने व धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के आरोप में मुकदमा किया गया। इस मामले में सरकारी वकील ने दलील दी कि याची पहले हिंदू था पर अब पादरी बन गया है। गवाह लक्ष्मण विश्वकर्मा ने बयान में आरोप लगाया था कि आवेदक हिंदू देवी-देवताओं के बारे में अपमानजनक भाषा का प्रयोग करता था, जिससे धार्मिक भावनाएं आहत हुई। कोर्ट ने मुकदमा रंद करने की अर्जी खारिज कर दी। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि याची ने हलफनामे में स्वयं को हिंदू बताया था। इस विरोधाभास को देखते हुए कोर्ट ने कहा कि संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश 1950 के अनुसार हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म के अलावा किसी अन्य धर्म को मानने वाले व्यक्ति को अनुसूचित जाति का सदस्य नहीं माना जाएगा। UP News