हाईकोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि वकील केवल महत्वपूर्ण पेशे के लिए महत्वपूर्ण नहीं हैं बल्कि वकील कोर्ट के अधिकारी भी होते हें। ऐसे में अपराधिक पृष्ठभूमि के वकील खतरनाक तथा कानून के शासन के लिए बड़ा खतरा हैं। उत्तर प्रदेश के हाईकोर्ट की टिप्पणी की पूरे प्रदेश में खूब चर्चा हो रही है।

UP News : उत्तर प्रदेश के हाईकोर्ट ने कुछ वकीलों को खतरनाक बताते हुए बड़ी टिप्पणी की है। उत्तर प्रदेश के हाईकोर्ट ने कुछ वकीलों को खतरनाक बताकर कहा है कि इस प्रकार के वकील कानून के राज के लिए बड़ा खतरा हैं। उत्तर प्रदेश के हाईकोर्ट ने वकीलों के विषय में यह बड़ी टिप्पणी एक मामले की सुनवाई के दौरान की है। जिस मामले की सुनवाई में यह टिप्पणी की गई है वह मामला उत्तर प्रदेश के इटावा के एक वकील से जुड़ा हुआ है।
उत्तर प्रदेश के हाईकोर्ट ने इटावा के मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि बार एसोसिएशन वकीलों की सबसे महत्वपूर्ण तथा उपयोगी संस्था है। हाईकोर्ट ने कहा कि बार एसोसिएशन के जिम्मेदार पदों पर बैठे हुए अपराधिक पृष्ठभूमि के वकील कानून के शासन के लिए बहुत बड़ा खतरा हैं। हाईकोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि वकील केवल महत्वपूर्ण पेशे के लिए महत्वपूर्ण नहीं हैं बल्कि वकील कोर्ट के अधिकारी भी होते हें। ऐसे में अपराधिक पृष्ठभूमि के वकील खतरनाक तथा कानून के शासन के लिए बड़ा खतरा हैं। उत्तर प्रदेश के हाईकोर्ट की टिप्पणी की पूरे प्रदेश में खूब चर्चा हो रही है।
उत्तर प्रदेश के हाईकोर्ट ने वकीलों को लेकर जो टिप्पणी की है उसे हम विस्तार से आपको बता देते हैं। उत्त्तर प्रदेश के इटावा जिले के एक मामले की सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि बार एसोसिएशन के रसूखदार पदों पर बैठे आपराधिक पृष्ठभूमि वाले वकील कानून के शासन के लिए खतरा हैं। वकील न केवल पेशे के अनुशासक हैं, बल्कि कोर्ट के अधिकारी भी हैं। ऐसे में यदि गंभीर आरोपों का सामना कर रहे लोग बार संघों में प्रभावशाली पद पर हों तो यह आशंका स्वाभाविक है कि वे पेशेवर वैधता की आड़ में पुलिस और न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं
उत्तर प्रदेश के हाईकोर्ट ने वकीलों के ऊपर सख्त टिप्पणी करने के साथ ही एक बड़ी डिटेल भी तलब कर ली है। यह टिप्पणी करने वाली उत्तर प्रदेश के हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की एकल पीठ ने डीजीपी और डीजीपी अभियोजन से प्रदेशभर में वकीलों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों का विस्तृत ब्योरा तलब किया है। इन अफसरों को अधिवक्ता के खिलाफ दर्ज एफआईआर पंजीकरण की तिथि, अपराध संख्या, धाराएं और संबंधित थाना, विवेचना की वर्तमान स्थिति, आरोप पत्र दाखिल करने, आरोप तय करने की तिथि, अब तक परीक्षित गवाहों का विवरण व ट्रायल की स्थिति का विवरण पेश करना होगा। UP News