इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने गंभीर संवैधानिक सवाल खड़े किए हैं। अदालत ने इस व्यवस्था की वैधानिकता पर विचार करने की जरूरत बताते हुए पंचायतीराज विभाग के अपर मुख्य सचिव को अगली सुनवाई में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित होकर सरकार का पक्ष स्पष्ट करने का निर्देश दिया है।

UP News : उत्तर प्रदेश में ग्राम पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद ग्राम प्रधानों को प्रशासक नियुक्त किए जाने के फैसले पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने गंभीर संवैधानिक सवाल खड़े किए हैं। अदालत ने इस व्यवस्था की वैधानिकता पर विचार करने की जरूरत बताते हुए पंचायतीराज विभाग के अपर मुख्य सचिव को अगली सुनवाई में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित होकर सरकार का पक्ष स्पष्ट करने का निर्देश दिया है। अदालत का मानना है कि यह मामला संविधान के प्रावधानों और पंचायत व्यवस्था की स्वायत्तता से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है। UP News
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न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि उत्तर प्रदेश पंचायती राज अधिनियम की धारा 12(3-ए) की संवैधानिक वैधता पर पुनर्विचार किए जाने की आवश्यकता प्रतीत होती है। अदालत ने याद दिलाया कि वर्ष 2000 में प्रेम लाल पटेल बनाम उत्तर प्रदेश राज्य मामले में इसी तरह के प्रावधान को संविधान के अनुच्छेद 243-ई और 243-के के विपरीत मानते हुए असंवैधानिक घोषित किया गया था। हालांकि बाद में सर्वोच्च न्यायालय ने उस मामले का निस्तारण करते समय संवैधानिक प्रश्नों को खुला छोड़ दिया था। जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि जब किसी ग्राम प्रधान का कार्यकाल समाप्त हो चुका हो, तब उसे प्रशासक नियुक्त करना क्या अप्रत्यक्ष रूप से पंचायत का कार्यकाल बढ़ाने के समान नहीं है। अदालत ने यह भी जानना चाहा कि क्या ऐसी व्यवस्था राज्य निर्वाचन आयोग के संवैधानिक अधिकारों और स्वतंत्र चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करती है। न्यायालय ने इन सभी पहलुओं को गंभीर बताते हुए विस्तृत सुनवाई की आवश्यकता जताई है। यह जनहित याचिका संजय कुमार शर्मा की ओर से दाखिल की गई है। हाईकोर्ट ने मामले को अन्य संबंधित जनहित याचिकाओं के साथ सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है। साथ ही पंचायतीराज विभाग के अपर मुख्य सचिव को अगली तारीख पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए उपस्थित होकर सरकार का पक्ष रखने का निर्देश दिया गया है। UP News
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गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश की ग्राम पंचायतों का पांच वर्षीय कार्यकाल मई 2026 में समाप्त हो चुका है। सामान्य परिस्थितियों में इसके बाद पंचायत चुनाव कराए जाने चाहिए थे, लेकिन विभिन्न प्रशासनिक कारणों से चुनाव नहीं हो सके। इसके स्थान पर पहली बार निवर्तमान ग्राम प्रधानों को ही प्रशासक नियुक्त कर दिया गया। इस फैसले के बाद पंचायत चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे संभावित उम्मीदवारों और स्थानीय राजनीतिक कार्यकर्ताओं में असंतोष देखा जा रहा है। अब इस पूरे मामले पर हाईकोर्ट की आगामी सुनवाई और सरकार के जवाब पर सभी की निगाहें टिकी हैं। UP News
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