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उत्तर प्रदेश के हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। उत्तर प्रदेश के हाईकोर्ट का नाम इलाहाबाद हाईकोर्ट है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले के एक मामले में यह बड़ा फैसला सुनाया है।

UP News : उत्तर प्रदेश के हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। उत्तर प्रदेश के हाईकोर्ट का नाम इलाहाबाद हाईकोर्ट है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले के एक मामले में यह बड़ा फैसला सुनाया है। उत्तर प्रदेश के हाईकोर्ट ने साफ-साफ शब्दों में कहा है कि तीन तलाक तथा हलाला की आड़ में किसी भी नागरिक को कुकर्म करने का अधिकार नहीं दिया जा सकता है। उत्तर प्रदेश के हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि तीन तलाक तथा हलाला की आड़ में यौन शोषण की मंजूरी नहीं दी जा सकती है। UP News
आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि निकाह हलाला और तीन तलाक की आड़ में महिलाओं के यौन शोषण को किसी भी स्थिति में वैधता या कानूनी संरक्षण नहीं दिया जा सकता। अदालत ने कहा कि यदि किसी महिला के साथ अपराध हुआ है तो व्यक्तिगत कानून (Personal Law) का हवाला देकर आरोपियों को कानूनी कार्रवाई से बचाया नहीं जा सकता। मामले की सुनवाई के दौरान कुछ आरोपियों ने उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर को निरस्त करने की मांग की थी। आरोप था कि निकाह हलाला के नाम पर महिला के साथ बार-बार दुष्कर्म और यौन शोषण किया गया। हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया गंभीर आपराधिक आरोप सामने आए हैं, इसलिए मामले की जांच और न्यायिक प्रक्रिया जारी रहेगी। UP News
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि - "व्यक्तिगत कानून किसी भी व्यक्ति को अपराध करने या यौन शोषण का लाइसेंस नहीं देता। यदि किसी महिला के साथ अपराध हुआ है तो उसे कानून के अनुसार न्याय मिलेगा।" अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि भारतीय दंड कानून के तहत दर्ज अपराधों की सुनवाई सामान्य कानूनी प्रक्रिया के अनुसार होगी और धार्मिक परंपराओं की आड़ लेकर अपराध को उचित नहीं ठहराया जा सकता। इलाहाबाद हाईकोर्ट की इस टिप्पणी के बाद उत्तर प्रदेश में एक बार फिर निकाह हलाला और तीन तलाक का मुद्दा चर्चा का विषय बन गया है। बीते कुछ वर्षों में प्रदेश के कई जिलों से हलाला के नाम पर महिलाओं के कथित शोषण के मामले सामने आए हैं। ऐसे मामलों में पुलिस ने गंभीर धाराओं में मुकदमे दर्ज कर कार्रवाई भी की है। UP News
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह आदेश स्पष्ट संदेश देता है कि महिलाओं की गरिमा, सुरक्षा और संवैधानिक अधिकार किसी भी व्यक्तिगत या धार्मिक प्रथा से ऊपर हैं। यदि किसी पर बलात्कार, यौन शोषण या अन्य गंभीर अपराध के आरोप हैं तो उसकी जांच कानून के दायरे में होगी और केवल धार्मिक परंपरा का हवाला देकर राहत नहीं मिल सकती। इलाहाबाद हाईकोर्ट का यह आदेश उत्तर प्रदेश के लिए इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि प्रदेश में समय-समय पर तीन तलाक और कथित हलाला से जुड़े मामले न्यायालयों तक पहुंचते रहे हैं। अदालत की इस टिप्पणी को महिलाओं के अधिकारों की रक्षा और आपराधिक मामलों में कानून की सर्वोच्चता को दोहराने वाला महत्वपूर्ण न्यायिक संदेश माना जा रहा है। UP News
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