पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने की समयसीमा नजदीक आते ही इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस पूरे मुद्दे पर सख्त रुख अपनाते हुए उत्तर प्रदेश सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग से स्पष्ट और ठोस जवाब मांगा है।

UP News : उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर छाया असमंजस अब एक बड़े संवैधानिक सवाल के रूप में उभरकर सामने आ गया है। पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने की समयसीमा नजदीक आते ही इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस पूरे मुद्दे पर सख्त रुख अपनाते हुए उत्तर प्रदेश सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग से स्पष्ट और ठोस जवाब मांगा है। अदालत ने तीखे सवाल के साथ पूछा है कि जब उत्तर प्रदेश में पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल खत्म होने की घड़ी करीब है, तब भी चुनावी प्रक्रिया निर्धारित गति से आगे क्यों नहीं बढ़ रही। साथ ही कोर्ट यह भी जानना चाहता है कि क्या राज्य में चुनाव कराने की तैयारियां इस स्थिति में हैं कि संवैधानिक प्रावधानों के तहत तय समयसीमा के भीतर मतदान प्रक्रिया पूरी कराई जा सके। हाईकोर्ट की इस टिप्पणी ने उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव की तैयारियों और प्रशासनिक गंभीरता, दोनों पर एक साथ सवाल खड़े कर दिए हैं।
यह मामला इम्तियाज हुसैन की ओर से दाखिल याचिका की सुनवाई के दौरान सामने आया। सुनवाई में यह मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया कि संविधान के अनुच्छेद 243E के तहत पंचायतों का कार्यकाल अधिकतम पांच वर्ष का होता है। यह अवधि पहली बैठक की तारीख से मानी जाती है और इसे मनमाने ढंग से आगे नहीं बढ़ाया जा सकता। ऐसे में उत्तर प्रदेश में पंचायतों का कार्यकाल खत्म होने से पहले चुनाव कराना कानूनी और संवैधानिक दोनों दृष्टियों से जरूरी है।
सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से अदालत को बताया गया कि पंचायत चुनाव की तारीखों को लेकर अधिसूचना जारी करना राज्य सरकार का दायित्व है। आयोग ने उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम, 1947 की धारा 12BB का हवाला देते हुए कहा कि चुनाव कार्यक्रम घोषित करने की अंतिम प्रक्रिया सरकार के स्तर पर पूरी होती है, हालांकि इससे पहले राज्य निर्वाचन आयोग से परामर्श लिया जाता है। इस दलील के बाद यह संकेत भी साफ हुआ कि उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव की समयसीमा को लेकर प्रशासनिक और वैधानिक जिम्मेदारियों का प्रश्न अब अदालत के सामने केंद्र में है।
सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा कि यह बताया जाए कि 19 फरवरी 2026 की अधिसूचना के आधार पर उत्तर प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग समय से चुनाव कराने की स्थिति में है या नहीं। कोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि पंचायत चुनाव 26 मई 2026 तक या उससे पहले संपन्न कराना आवश्यक है। मामले की अगली सुनवाई अब 25 मार्च 2026 को होगी। माना जा रहा है कि उस दिन उत्तर प्रदेश सरकार और निर्वाचन आयोग को अपनी तैयारियों और समयबद्ध योजना पर स्पष्ट रुख अदालत के सामने रखना होगा।
उत्तर प्रदेश में ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत सदस्य, क्षेत्र पंचायत सदस्य और जिला पंचायत सदस्य समेत पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल 2 मई 2026 को समाप्त हो रहा है। यही वजह है कि चुनाव अप्रैल से जून 2026 के बीच कराने की चर्चा तेज रही है। लेकिन अब हाईकोर्ट की सख्ती के बाद यह मामला केवल प्रशासनिक तैयारी तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि संवैधानिक जवाबदेही से भी जुड़ गया है। UP News