इस शूटआउट में धनंजय सिंह, उनके गनर और ड्राइवर घायल हुए थे। उन्होंने इस मामले में पांच लोगों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कराया था।

UP News : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जौनपुर के पूर्व सांसद धनंजय सिंह को झटका दिया है। 23 साल पहले वाराणसी के नदेसर इलाके में हुए टकसाल शूटआउट मामले में ट्रायल कोर्ट द्वारा आरोपियों को बरी किए जाने के फैसले को चुनौती देने के लिए दायर उनकी याचिका को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया। इस शूटआउट में धनंजय सिंह, उनके गनर और ड्राइवर घायल हुए थे। उन्होंने इस मामले में पांच लोगों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कराया था।
4 अक्टूबर 2002, नदेसर, वाराणसी (टकसाल सिनेमा हॉल के पास) तत्कालीन विधायक धनंजय सिंह की गाड़ी पर गोलियां चलाई गईं। इसमें उनके गनर और ड्राइवर भी घायल हुए। इस घटना में एके-47 जैसी आॅटोमेटिक बंदूकें इस्तेमाल की गईं। इस घटना के बाद धनंजय सिंह ने बाहुबली विधायक अभय सिंह, एमएलसी विनीत सिंह, संदीप सिंह, संजय सिंह, विनोद सिंह, सतेंद्र सिंह उर्फ बबलू और अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाया। यह वाराणसी का पहला ऐसा ओपन शूटआउट था।
29 अगस्त 2025 को वाराणसी के स्पेशल जज सुशील कुमार खरवार ने साक्ष्यों के अभाव में आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया। कोर्ट ने संदेह का लाभ देते हुए फैसला सुनाया। फैसले के खिलाफ पूर्व सांसद धनंजय सिंह ने इस फैसले को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी। उनका तर्क था कि वे मामले में घायल और शिकायतकर्ता हैं, इसलिए उन्हें अपील दायर करने का अधिकार है। हालांकि, राज्य की ओर से तर्क दिया गया कि गैंगस्टर एक्ट के तहत अपराध समाज और राज्य के खिलाफ होता है, न कि व्यक्तिगत रूप से। यदि प्रत्येक पीड़ित को अपील करने का अधिकार दिया जाए, तो मामलों की संख्या बहुत बढ़ जाएगी। सिंगल बेंच के न्यायाधीश लक्ष्मी कांत शुक्ला ने राज्य का तर्क स्वीकार किया और अपील को पोषणीय नहीं मानते हुए खारिज कर दिया। गैंगस्टर एक्ट के तहत अपराध केवल समाज और राज्य के खिलाफ होता है। असामाजिक गतिविधियों को रोकना और निवारक कदम उठाना केवल राज्य का अधिकार है, किसी व्यक्ति का नहीं। हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि गैंगस्टर एक्ट मामलों में व्यक्तिगत शिकायतकर्ता को अपील करने का अधिकार नहीं होता और इस आधार पर धनंजय सिंह की याचिका खारिज कर दी गई।