आईपीएस आलोक राज नारायण की पूरी जीवनी जानें। यूपीएससी में छह बार असफलता, सातवें प्रयास में 346वीं रैंक, पिता का त्याग, पुलिस सेवा में योगदान और मथुरा में नई जिम्मेदारी की पूरी कहानी पढ़ें।

उत्तर प्रदेश में 7 अक्टूबर को हुए प्रशासनिक फेरबदल में 2022 बैच के IPS अधिकारी आलोक राज नारायण को हरदोई से स्थानांतरित कर मथुरा का अपर पुलिस अधीक्षक (Addl. SP) बनाया गया है। बिहार के नवादा जिले के एक छोटे से गांव से निकलकर उत्तर प्रदेश पुलिस में अहम जिम्मेदारी तक पहुंचने वाले आलोक राज नारायण की कहानी संघर्ष और संकल्प की ऐसी मिसाल है, जिसमें छह बार मिली नाकामयाबी भी उनके हौसले को नहीं तोड़ सकी। यूपीएससी में सातवें प्रयास में ऑल इंडिया रैंक 346 हासिल कर IPS बनने वाले आलोक के इस सफर में परिवार का त्याग भी शामिल है। बेटे के सपने को पूरा करने के लिए पिता ने अपनी जमीन तक बेच दी। आज वही आलोक राज नारायण अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और उत्कृष्ट पुलिस सेवा के लिए अपनी अलग पहचान बना रहे हैं।
आलोक राज नारायण का जन्म 12 जनवरी 1992 को बिहार के नवादा जिले के गोरिहारी गांव में हुआ था। उनका परिवार शिक्षा को बहुत महत्व देता है। उनके पिता नरेश प्रसाद यादव सेवानिवृत्त शिक्षक हैं, जबकि उनकी मां सुशीला देवी प्राथमिक विद्यालय में शिक्षिका हैं। परिवार में पढ़ाई और मेहनत का माहौल रहा, जिसने आलोक के व्यक्तित्व को गढ़ने में अहम भूमिका निभाई। गांव के साधारण परिवेश में पले-बढ़े आलोक ने बचपन से ही पढ़ाई पर ध्यान दिया। उनका सफर आसान नहीं था, लेकिन परिवार के सहयोग और अपने लक्ष्य के प्रति लगन ने उन्हें आगे बढ़ने का रास्ता दिखाया। एक छोटे से गांव से निकलकर देश की कठिनतम प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता हासिल करने तक का उनका सफर उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं।
आलोक राज नारायण की शुरुआती पढ़ाई गांव के सरकारी विद्यालय में हुई। उन्होंने पांचवीं कक्षा तक यहीं शिक्षा हासिल की। इसके बाद उन्होंने रोह हाई स्कूल में पढ़ाई की। नौवीं कक्षा में उनका दाखिला जीवन दीप पब्लिक स्कूल में हुआ, जहां से उन्होंने मैट्रिक की परीक्षा पास की। वर्ष 2007 से 2009 के दौरान उन्होंने राजस्थान से इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद वह उच्च शिक्षा के लिए दिल्ली पहुंचे और वहां से बीटेक की डिग्री हासिल की। तकनीकी शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने सिविल सेवा में जाने का लक्ष्य तय किया और वर्ष 2015 से संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी। यूपीएससी की तैयारी के दौरान उन्होंने राजनीति विज्ञान में एमए भी किया। उन्होंने इसी विषय को सिविल सेवा परीक्षा में अपने वैकल्पिक विषय के रूप में चुना। तकनीकी शिक्षा से लेकर राजनीति विज्ञान की पढ़ाई तक का उनका सफर बताता है कि अपने लक्ष्य के अनुसार खुद को तैयार करने के लिए उन्होंने लगातार मेहनत की।
आलोक राज नारायण की सफलता की कहानी का सबसे अहम हिस्सा यूपीएससी की परीक्षा में उनके लगातार प्रयास हैं। वर्ष 2015 में तैयारी शुरू करने के बाद उन्हें शुरुआती छह प्रयासों में सफलता नहीं मिली। इसके बावजूद उन्होंने अपने लक्ष्य को नहीं छोड़ा और लगातार मेहनत करते रहे। पहले और चौथे प्रयास में वह प्रारंभिक परीक्षा यानी पीटी भी पास नहीं कर सके। दूसरे, तीसरे, पांचवें और छठे प्रयास में उन्होंने मुख्य परीक्षा तक का सफर तय किया, लेकिन साक्षात्कार तक नहीं पहुंच पाए। लगातार मिल रही असफलताओं के बावजूद उन्होंने अपनी तैयारी जारी रखी और कमियों को दूर करने की कोशिश की। आखिरकार, सिविल सेवा परीक्षा 2021 में उनका सातवां प्रयास सफल रहा। उन्होंने प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार तीनों चरण पार किए और ऑल इंडिया रैंक 346 हासिल की। इस सफलता के साथ उन्होंने भारतीय पुलिस सेवा यानी आईपीएस में जगह बनाई। आलोक का यह सफर बताता है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में असफलता मिलने के बाद भी मेहनत और धैर्य के साथ आगे बढ़ना कितना जरूरी है। छह बार असफल होने के बाद सातवें प्रयास में मिली सफलता ने उनके वर्षों के संघर्ष को एक नई दिशा दी।
आलोक राज नारायण की सफलता के पीछे उनके परिवार का त्याग भी जुड़ा है। उनके पिता नरेश प्रसाद यादव मध्य विद्यालय नेमदारगंज से शिक्षक के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। बेटे को अच्छी शिक्षा दिलाने और उसे यूपीएससी की तैयारी के लिए जरूरी सुविधाएं देने के लिए उन्होंने बड़ा आर्थिक त्याग किया। नरेश प्रसाद यादव ने बेटे की पढ़ाई और तैयारी का खर्च पूरा करने के लिए नवादा शहर में खरीदी गई जमीन के साथ गांव की जमीन भी बेच दी। शहर में जमीन खरीदने का उद्देश्य मकान बनाना था, लेकिन बेटे के भविष्य को प्राथमिकता देते हुए उन्होंने उस जमीन को बेचने का फैसला किया। परिवार ने आर्थिक कठिनाइयों को आलोक के सपने के बीच नहीं आने दिया। पिता का यह फैसला बताता है कि उनकी नजर में बेटे की शिक्षा और उसका भविष्य कितनी अहमियत रखता था। आलोक की सफलता में उनकी अपनी मेहनत के साथ माता-पिता के इसी भरोसे और त्याग की भी बड़ी भूमिका रही।
यूपीएससी की तैयारी के दौरान आलोक राज नारायण के सामने करियर के दूसरे अवसर भी आए। सिविल सेवा परीक्षा का अंतिम परिणाम आने से पहले ही उनका चयन गृह मंत्रालय के एक पद पर हो चुका था। उन्हें 20 जून को नौकरी जॉइन करनी थी। इसी बीच सिविल सेवा परीक्षा का परिणाम घोषित हुआ और आलोक ने 346वीं रैंक हासिल की। इस सफलता के बाद उन्होंने भारतीय पुलिस सेवा को चुना। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद उन्हें उत्तर प्रदेश कैडर में नियुक्ति मिली। इस तरह तकनीकी शिक्षा हासिल करने वाले आलोक राज नारायण ने अपनी मेहनत के दम पर पुलिस सेवा में जगह बनाई। उनके लिए यह उपलब्धि केवल नौकरी पाने तक सीमित नहीं थी, बल्कि उस लक्ष्य की प्राप्ति थी, जिसके लिए उन्होंने वर्षों तक तैयारी की और कई बार असफल होने के बावजूद प्रयास जारी रखा।
आईपीएस बनने के बाद आलोक राज नारायण ने उत्तर प्रदेश पुलिस में अपनी जिम्मेदारियां संभालीं। वह 2022 बैच के अधिकारी हैं और पुलिस सेवा के दौरान अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई तथा कानून-व्यवस्था बनाए रखने से जुड़े अभियानों में उनकी भूमिका रही है। हरदोई जिले के शाहाबाद क्षेत्र में अपर पुलिस अधीक्षक के रूप में कार्य करते हुए उन्होंने कई महत्वपूर्ण पुलिस अभियानों में हिस्सा लिया। अलग-अलग नौ पुलिस मुठभेड़ों के दौरान 13 अपराधियों की गिरफ्तारी में उनकी अहम भूमिका बताई गई है। इन कार्रवाइयों के चलते उनकी पहचान एक ऐसे अधिकारी के रूप में बनी, जो अपराध के खिलाफ सख्त कार्रवाई के लिए जाने जाते हैं। पुलिस सेवा में उनकी भूमिका केवल स्थानीय अपराधों के खिलाफ कार्रवाई तक सीमित नहीं रही। करीब 450 करोड़ रुपये के अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध नेटवर्क को ध्वस्त करने के अभियान में भी उनका उल्लेखनीय योगदान रहा। इस कार्रवाई के बाद आंध्र प्रदेश के पुलिस महानिदेशक ने उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक को पत्र लिखकर आलोक राज नारायण को सम्मानित करने की अनुशंसा की थी।
आलोक राज नारायण को महाकुंभ के दौरान उत्कृष्ट पुलिस सेवा और बेहतर कानून-व्यवस्था बनाए रखने में योगदान के लिए सम्मानित भी किया गया। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उन्हें महाकुंभ सेवा मेडल प्रदान किया। महाकुंभ जैसे बड़े आयोजन में पुलिस के सामने भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा और लोगों की सहायता जैसी कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां होती हैं। ऐसे आयोजन के दौरान बेहतर पुलिस व्यवस्था बनाए रखने में उनके योगदान को इस सम्मान के जरिए सराहा गया। महाकुंभ के दौरान आलोक ने अपने निजी प्रयासों से कई बिछड़े हुए लोगों को उनके परिवारों से मिलाने में भी अहम भूमिका निभाई। इससे उनकी भूमिका का एक मानवीय पक्ष सामने आता है। पुलिस सेवा में अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जितनी जरूरी है, उतना ही जरूरी जरूरतमंद लोगों की मदद करना और आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी है।
आलोक राज नारायण ऐसे परिवार से आते हैं, जहां शिक्षा को जीवन में आगे बढ़ने का महत्वपूर्ण माध्यम माना गया है। उनके पिता नरेश प्रसाद यादव सेवानिवृत्त शिक्षक हैं, जबकि उनकी मां सुशीला देवी प्राथमिक विद्यालय में शिक्षिका हैं। उनके बड़े भाई ए.के. गुरु एक निजी विद्यालय का संचालन करते हैं। उनकी बहन भी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर चुकी हैं। परिवार के सदस्यों का शिक्षा से जुड़ाव आलोक के शुरुआती जीवन और उनकी सोच को समझने में मदद करता है। एक ऐसे परिवार में पले-बढ़े आलोक ने अपनी मेहनत से सिविल सेवा में जगह बनाई। उनके पिता ने बेटे की पढ़ाई के लिए जमीन बेचकर जो त्याग किया, वह इस कहानी का अहम हिस्सा है। उनकी सफलता यह भी दिखाती है कि परिवार का विश्वास और शिक्षा के प्रति समर्पण किसी व्यक्ति के जीवन को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
उत्तर प्रदेश शासन की ओर से 7 अक्टूबर को किए गए प्रशासनिक फेरबदल में आलोक राज नारायण को हरदोई से स्थानांतरित कर मथुरा भेजा गया है। अब वह मथुरा में अपर पुलिस अधीक्षक के रूप में नई जिम्मेदारी संभालेंगे। हरदोई में अपनी सेवाओं के दौरान पुलिस अभियानों और अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई में भूमिका निभाने वाले आलोक के लिए यह नई तैनाती उनके सेवा जीवन का अगला पड़ाव है। मथुरा जैसे महत्वपूर्ण जिले में पुलिस अधिकारी की जिम्मेदारी में कानून-व्यवस्था बनाए रखना, अपराध पर नियंत्रण और नागरिकों की सुरक्षा जैसे काम शामिल होते हैं। बिहार के गोरिहारी गांव से शुरू हुआ आलोक राज नारायण का सफर आज उत्तर प्रदेश पुलिस में अहम जिम्मेदारी तक पहुंच चुका है। यूपीएससी में छह असफलताओं के बाद सातवें प्रयास में मिली सफलता, बेटे के लिए पिता का त्याग और पुलिस सेवा में उनके योगदान की कहानी उनके जीवन के अलग-अलग पहलुओं को सामने लाती है। मथुरा में नई जिम्मेदारी के साथ उनका सफर आगे बढ़ रहा है।
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