कौन था उत्तर प्रदेश का वो डाकू जो लूट से पहले भेजता था चिट्ठी?
भारत
चेतना मंच
01 Dec 2025 03:12 PM
यह कहानी है एक ऐसे इंसान की जिसने जिंदगी की शुरुआत एक आम मजदूर की तरह की लेकिन हालात कुछ ऐसे बने कि वह इतिहास के पन्नों में एक कुख्यात डाकू के रूप में दर्ज हो गया। अमेठी जिले के थौरा गांव का रहने वाला बरसाती पासी, 1980 के दशक में पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में ऐसा खौफ बन गया था कि लोग उसका नाम सुनते ही कांप जाते थे। Barsati Daku
जब पुलिस ने न्याय नहीं दिया तब उठाया बंदूक
बरसाती पासी एक गरीब परिवार में जन्मा था और शुरुआती दिनों में मजदूरी कर गुजारा करता था। लेकिन उसकी जिंदगी तब बदल गई जब एक कार्यक्रम के दौरान उसके भाई की हत्या कर दी गई। बरसाती ने न्याय की उम्मीद से पुलिस का दरवाजा खटखटाया लेकिन उसे डांटकर थाने से भगा दिया गया। यही घटना उसके जीवन की सबसे बड़ी टूटन बन गई और उसने अपने भाई की मौत का बदला लेने की ठान ली।
हत्या, फरारी और गैंग बनाने का सिलसिला
बदले की आग में जलते हुए बरसाती ने अपने तीन भाइयों रामचरन, बिर्जू और रघु के साथ मिलकर कर्मबली कश्यप की हत्या कर दी। इसके बाद चारों भाई पुलिस की नजरों से बचने के लिए गांव छोड़कर फरार हो गए। धीरे-धीरे उन्होंने अपना एक गिरोह बना लिया और जंगलों में डेरा डाल लिया। 70 के दशक के अंत और 80 के दशक की शुरुआत तक बरसाती का गैंग अमेठी, सुल्तानपुर, प्रतापगढ़, जौनपुर, प्रयागराज और अयोध्या तक दहशत का पर्याय बन चुका था।
गरीबों का मसीहा
स्थानीय लोग बताते हैं कि बरसाती डाकू गरीबों की मदद करता था। वह जरूरतमंदों को पैसे देता, बेटियों की शादी करवाता और दबंगों को सजा देता। कहा जाता है कि वह जहां भी डकैती करता पहले चिट्ठी भेजता था और वहां से लूट कर चला जाता था। इसी वजह से कुछ लोग उसे ‘अमेठी का रॉबिन हुड’ भी कहने लगे थे। बरसाती डाकू की सबसे बड़ी पहचान यही थी कि वह 15 वर्षों तक यूपी पुलिस की पकड़ से बाहर रहा। उसके पीछे हजारों पुलिसकर्मी लगाए गए लेकिन वह हर बार उनकी आंखों में धूल झोंककर निकल जाता था। उसके खिलाफ इतने मुकदमे दर्ज हुए कि प्रशासन के लिए भी उसे ट्रैक करना मुश्किल हो गया।
लोगों ने जबरन बनाया डाकू
बरसाती की बहन रानी देवी बताती हैं कि उनका भाई दिल से बुरा नहीं था। "वो रोज पूजा-पाठ करता था। लोग उसे जबरन डाकू बना बैठे। कई घटनाओं में उसका नाम जोड़ दिया गया जिनसे उसका कोई वास्ता नहीं था।" वह बताती हैं कि बरसाती की तलाश में पुलिस ने परिवार पर भी जुल्म ढाए कई परिजन जेल भी भेजे गए। आज रानी देवी के चार बेटियां हैं। परिवार अब शांतिपूर्वक जीवन बिता रहा है। एक भाई पुलिस में, एक कोटेदार है और बाकी खेती-बाड़ी और घरेलू जिम्मेदारियों में लगे हैं। गांव के ही राधेश्याम भी कहते हैं, "बरसाती गरीबों के लिए देवता जैसा था। लेकिन भाई की मौत ने उसे बदल दिया।"
बरसाती की कहानी इतनी चर्चित हुई कि उस पर एक फिल्म भी बनी ‘बरसाती गैंग’, जिसे उत्तर प्रदेश के कई सिनेमा घरों में रिलीज किया गया। यह फिल्म उसके जीवन के उन पहलुओं को उजागर करती है जहां एक आम इंसान किस तरह तंत्र से टूटा और अपराध की राह पर निकल पड़ा। Barsati Daku