अमेठी में गोमती नदी के किनारे रहने वाले हजारों लोगों के लिए बड़ी उम्मीद जगी है। वर्षों से चली आ रही एक परेशानी को दूर करने की दिशा में शासन ने अहम कदम उठाया है। आखिर इस परियोजना से किन गांवों की तस्वीर बदलने वाली है और कब शुरू होगा निर्माण?

UP News : उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले में गोमती नदी पार करने वाले लोगों को जल्द ही पीपे के अस्थायी पुल से मुक्ति मिलने वाली है। दंडेश्वरघाट पर अब नदी के ऊपर स्थायी दीर्घ सेतु का निर्माण कराया जाएगा। लंबे समय से चली आ रही इस मांग पर प्रदेश सरकार ने मुहर लगाते हुए परियोजना के लिए 32 करोड़ 59 लाख 85 हजार रुपये की मंजूरी दे दी है। शासन की ओर से 5 नवंबर 2026 को जारी आदेश के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए पहली किस्त के रूप में 11 करोड़ 40 लाख 95 हजार रुपये भी स्वीकृत किए गए हैं। पुल बनने से आसपास के गांवों के ग्रामीणों, किसानों, विद्यार्थियों और रोजाना नदी पार करने वाले लोगों को आवागमन में बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
दंडेश्वरघाट पर बनने वाले स्थायी पुल की कुल लागत 3259.85 लाख रुपये निर्धारित की गई है। इसमें चालू वित्तीय वर्ष के लिए 1140.95 लाख रुपये की पहली किस्त मंजूर की गई है। इसके तहत अनुदान संख्या 57 से 898.95 लाख रुपये और अनुदान संख्या 83 से 242 लाख रुपये की व्यवस्था की गई है।
यह पुल जगदीशपुर विधानसभा क्षेत्र के मुसाफिरखाना विकासखंड में दंडेश्वरधाम मंदिर के पास थौरी-पिपरी मार्ग पर गोमती नदी के दंडेश्वरघाट पर बनाया जाएगा। क्षेत्रीय विधायक सुरेश पासी की ओर से पुल निर्माण का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था। शासन ने प्रस्ताव पर मंजूरी देते हुए परियोजना के लिए बजट स्वीकृत कर दिया है।
अभी तक दंडेश्वरघाट पर गोमती नदी पार करने के लिए लोगों को पीपे के पुल पर निर्भर रहना पड़ता था। अस्थायी पुल की व्यवस्था के कारण स्थानीय लोगों को आवागमन में कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता था। स्थायी पुल बनने के बाद यह समस्या काफी हद तक दूर हो जाएगी। इसका सबसे अधिक लाभ आसपास के गांवों के किसानों, विद्यार्थियों और नौकरीपेशा लोगों को मिलेगा। साथ ही क्षेत्र में व्यापारिक गतिविधियों और आवागमन को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
दंडेश्वरघाट पर स्थायी दीर्घ सेतु का निर्माण अमेठी के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। जिलाधिकारी शशांक चौधरी के कार्यभार संभालने के बाद इस परियोजना को मिली स्वीकृति को जिले के विकास के लिहाज से अहम उपलब्धि माना जा रहा है।
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