अमेठी के रामदैपुर गांव में सुरक्षित सरकारी भूमि पर कथित अतिक्रमण और निर्माण के मामले में हाईकोर्ट की सख्ती के बाद प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। जांच में प्रथम दृष्टया लापरवाही सामने आने पर दो लेखपालों को निलंबित किया गया है, जबकि दो राजस्व निरीक्षकों के खिलाफ विशेष परिनिंदा प्रविष्टि की गई है।

UP News : उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले में सरकारी जमीन पर अतिक्रमण और निर्माण के मामले ने अब प्रशासनिक महकमे में भी हलचल बढ़ा दी है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ की सख्ती के बाद प्रशासन ने मामले में राजस्व विभाग के चार कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की है। प्रथम दृष्टया लापरवाही सामने आने पर दो लेखपालों को निलंबित कर दिया गया है, जबकि दो राजस्व निरीक्षकों के खिलाफ विशेष परिनिंदा प्रविष्टि की गई है। मामला रामदैपुर गांव में सार्वजनिक उपयोग के लिए दर्ज सुरक्षित सरकारी भूमि से जुड़ा है। इस भूमि पर अतिक्रमण और आवासीय निर्माण को लेकर रामदैपुर निवासी राम बहादुर घुरिया ने हाईकोर्ट में रिट जनहित याचिका दाखिल की थी। सुनवाई के दौरान भूमि पर हुए निर्माण से संबंधित तस्वीरें भी न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की गई थीं। UP News
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने अमेठी के जिलाधिकारी से विवादित भूमि की वर्तमान स्थिति, कथित अतिक्रमण और उसे हटाने के लिए प्रशासन की ओर से अब तक की गई कार्रवाई की जानकारी मांगी थी। इसके बाद प्रशासन ने मामले में की गई कार्रवाई से न्यायालय को अवगत कराया। राजस्व अभिलेखों और मौके की स्थिति से जुड़े मामले में संबंधित राजस्व कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच कराई गई। UP News
SDM पीके मिश्र के अनुसार जांच में प्रथम दृष्टया लापरवाही सामने आने के बाद लेखपाल विक्रम कुमार और कुलदीप कुमार शुक्ला को निलंबित किया गया है। वहीं राजस्व निरीक्षक रामयज्ञ यादव और जगदीश प्रसाद विश्वकर्मा के खिलाफ विशेष परिनिंदा प्रविष्टि की गई है। प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद अब मामले में राजस्व विभाग की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है। UP News
विवादित भूमि की वास्तविक स्थिति को लेकर किसी तरह की अस्पष्टता न रहे, इसके लिए प्रशासन ने दोबारा पैमाइश कराने का फैसला किया है। पैमाइश की निगरानी के लिए SDM अभिनीत कुमार की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटी गठित की गई है। कमेटी में तहसीलदार न्यायिक गौरीगंज महेश प्रताप सिंह और नायब तहसीलदार अमेठी अजय कुमार को सदस्य बनाया गया है। कमेटी मौके की स्थिति और राजस्व अभिलेखों के आधार पर भूमि की स्थिति की जांच करेगी। UP News
SDM पीके मिश्र के मुताबिक कमेटी की निगरानी में विवादित भूमि की पैमाइश कराई जाएगी। इसकी रिपोर्ट 26 अक्टूबर को न्यायालय में दाखिल की जानी है। अब अगली सुनवाई में पैमाइश रिपोर्ट और सुरक्षित सरकारी भूमि की मौजूदा स्थिति अहम मानी जा रही है। हाईकोर्ट के निर्देश के बाद प्रशासन की कार्रवाई और आगामी रिपोर्ट से यह स्पष्ट होगा कि विवादित भूमि की वास्तविक स्थिति क्या है और कथित अतिक्रमण को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं। UP News
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