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पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने अब खेती-किसानी की दुनिया में भी हलचल मचा दी है। ईरान और खाड़ी क्षेत्र में जारी भू-राजनीतिक संकट का असर यूरिया खाद की सप्लाई पर साफ दिखाई देने लगा है।

Oilcake Fertilizer Crisis : पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने अब खेती-किसानी की दुनिया में भी हलचल मचा दी है। ईरान और खाड़ी क्षेत्र में जारी भू-राजनीतिक संकट का असर यूरिया खाद की सप्लाई पर साफ दिखाई देने लगा है। दुनिया भर में नाइट्रोजन आधारित खाद की कमी गहराने लगी है, जिसके चलते किसानों की लागत बढ़ रही है और फसल उत्पादन पर खतरा मंडराने लगा है। हालात ऐसे बन गए हैं कि कई देशों के किसान अब पारंपरिक यूरिया के विकल्प तलाशने को मजबूर हैं। कहीं मुर्गियों की बीट खेतों में डाली जा रही है तो कहीं इंसानी पेशाब और जैविक कचरे से खाद तैयार की जा रही है। खेती में यह नया प्रयोग तेजी से चर्चा का विषय बनता जा रहा है।
Oilcake Fertilizer Crisis
दुनिया में इस्तेमाल होने वाली यूरिया खाद का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आता है। लेकिन होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास बढ़ते तनाव और सप्लाई बाधाओं ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में खाद की उपलब्धता को प्रभावित कर दिया है। नतीजतन यूरिया की कीमतें कई वर्षों के उच्च स्तर पर पहुंच गई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह संकट लंबा चला तो किसानों की लागत और बढ़ेगी, जिसका सीधा असर खाद्यान्न उत्पादन और महंगाई पर पड़ेगा।
Oilcake Fertilizer Crisis
इंग्लैंड समेत कई यूरोपीय देशों में किसान अब पोल्ट्री फार्म से निकलने वाले कचरे का इस्तेमाल खेतों में कर रहे हैं। गेहूं, जौ और ओट्स उगाने वाले किसानों का कहना है कि रासायनिक खाद की बढ़ती कीमतों ने उन्हें जैविक विकल्पों की ओर धकेल दिया है। कई इलाकों में मुर्गियों की बीट की मांग इतनी बढ़ गई है कि इसकी सप्लाई तक कम पड़ने लगी है। हालांकि किसान यह भी मान रहे हैं कि केवल जैविक खाद के भरोसे पूरी खेती चलाना फिलहाल आसान नहीं है।
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फ्रांस की कंपनी टूपी आर्गेनिक्स इन दिनों खास चर्चा में है। यह स्टार्टअप स्कूलों, स्टेडियमों और बड़े आयोजनों से इंसानी पेशाब इकट्ठा कर उससे जैविक खाद तैयार कर रही है। कंपनी का दावा है कि यह उत्पाद पौधों की ग्रोथ बढ़ाने में मदद करता है और रासायनिक खाद का विकल्प बन सकता है। कंपनी के अधिकारियों के अनुसार, फरवरी के बाद से उनके उत्पादों की बिक्री में करीब 25 फीसदी का इजाफा हुआ है।
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मलेशिया, अमेरिका और थाईलैंड जैसे देशों में भी किसान अब बायोफर्टिलाइजर की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। कई कंपनियां पशुओं के कचरे, बादाम के छिलकों और माइक्रोबियल तकनीक से खाद तैयार कर रही हैं। हालांकि कृषि विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि जैविक विकल्प पूरी तरह रासायनिक खाद की जगह नहीं ले सकते। श्रीलंका में 2021 में पूरी तरह आॅर्गेनिक खेती अपनाने के फैसले के बाद चाय और चावल का उत्पादन बुरी तरह प्रभावित हुआ था।
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संयुक्त राष्ट्र ने भी चेतावनी दी है कि यदि यूरिया संकट लंबे समय तक बना रहा तो दुनिया में खाद्य संकट गहरा सकता है। फसल उत्पादन में गिरावट आने से अनाज, सब्जियों और अन्य खाद्य पदार्थों की कीमतों में भारी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। खेती की दुनिया फिलहाल ऐसे मोड़ पर खड़ी है, जहां किसानों को परंपरागत खाद और नए जैविक प्रयोगों के बीच संतुलन बनाना पड़ रहा है।
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