अखिलेश स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से मिले, बोले- हम असली संत से आशीर्वाद लेने आए

अखिलेश यादव ने गुरुवार को लखनऊ में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद (शंकराचार्य) से मुलाकात की। मुलाकात के बाद उन्होंने बयान दिया कि हम असली संत से आशीर्वाद लेने आए हैं, क्योंकि असली संतों से मिलने से नकली संतों का अंत होने जा रहा है।

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अखिलेश यादव ने गुरुवार को लखनऊ में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद (शंकराचार्य) से मुलाकात की
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar12 Mar 2026 03:36 PM
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UP News: अखिलेश यादव ने गुरुवार को लखनऊ में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद (शंकराचार्य) से मुलाकात की। मुलाकात के बाद उन्होंने बयान दिया कि हम असली संत से आशीर्वाद लेने आए हैं, क्योंकि असली संतों से मिलने से नकली संतों का अंत होने जा रहा है। इस दौरान सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि भाजपा हर अच्छी चीज का विरोध करती है।

गाय और डेयरी पर क्या कहा?

अखिलेश यादव ने कहा कि जब समाजवादी पार्टी की सरकार थी तो उन्होंने डेयरी परियोजनाएँ बनवाई थीं ताकि गरीबों को फायदा मिले

और गायों की बेहतर देखभाल की जा सके। लेकिन उनके अनुसार भाजपा ने ऐसी योजनाओं का भी विरोध किया। और इसीलिए एक सच्चे संत ने इनकी कलई खोलकर रख दी है। ये भाजपा वाले सच्चे मायने में गौ माता के ही विरोधी हैं।

राजनीतिक संदर्भ

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती हाल के समय में कई राजनीतिक और राष्ट्रीय मुद्दों पर बयान देते रहे हैं। उनकी मुलाकातें अक्सर राजनीतिक चर्चा का विषय बन जाती हैं, खासकर उत्तर प्रदेश की राजनीति में। यह मुलाकात धार्मिक आशीर्वाद के नाम पर हुई, लेकिन इसके बाद दिए गए बयान से यह राजनीतिक संदेश भी माना जा रहा है, खासकर भाजपा और नकली संत वाली टिप्पणी को लेकर।



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उत्तर प्रदेश में प्री-प्राइमरी से कक्षा 12 तक आधुनिक सुविधाओं से लैस होंगे विद्यालय

उत्तर प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने और विद्यार्थियों को आधुनिक सुविधाओं से युक्त विद्यालय उपलब्ध कराने के लिए लगातार कार्य कर रही है।

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मुख्यमंत्री मॉडल कंपोजिट विद्यालय
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar12 Mar 2026 02:22 PM
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UP News : योगी सरकार उत्तर प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने और विद्यार्थियों को आधुनिक सुविधाओं से युक्त विद्यालय उपलब्ध कराने के लिए लगातार कार्य कर रही है। इसी क्रम में बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा प्रदेश के विभिन्न जनपदों में मुख्यमंत्री मॉडल कंपोजिट विद्यालय (प्री-प्राइमरी से कक्षा-12 तक) के निर्माण के लिए शासकीय एवं वित्तीय स्वीकृतियां प्रदान की गई हैं।

कई जिलों में मुख्यमंत्री मॉडल कंपोजिट विद्यालयों के होंगे निर्माण

प्रदेश के बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने बताया कि लखनऊ के मलिहाबाद, बहराइच, चंदौली, मिजार्पुर, लखीमपुर खीरी, फतेहपुर, गाजियाबाद, कानपुर देहात, वाराणसी, कौशांबी, फर्रुखाबाद, अमेठी तथा उन्नाव सहित कई जिलों में मुख्यमंत्री मॉडल कंपोजिट विद्यालयों के निर्माण के लिए शासनादेश जारी किए गए हैं। इन विद्यालयों के निर्माण पर प्रत्येक परियोजना के लिए लगभग 23 से 28 करोड़ रुपये तक की लागत स्वीकृत की गई है और प्रथम किश्त के रूप में संबंधित कार्यदायी संस्थाओं को धनराशि भी जारी कर दी गई है।

एक ही परिसर में प्री-प्राइमरी से कक्षा-12 तक आधुनिक शिक्षण सुविधाएं होंगी उपलब्ध 

मंत्री सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री मॉडल कंपोजिट विद्यालयों की स्थापना से विद्यार्थियों को एक ही परिसर में प्री-प्राइमरी से कक्षा-12 तक आधुनिक शिक्षण सुविधाएं उपलब्ध होंगी। इन विद्यालयों में आधुनिक कक्षाएं, प्रयोगशालाएं, खेल सुविधाएं और अन्य आवश्यक संसाधन विकसित किए जाएंगे, जिससे ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके। मंत्री संदीप सिंह ने कहा कि योगी सरकार की प्राथमिकता है कि प्रदेश के हर बच्चे को बेहतर शैक्षिक वातावरण और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हों। मुख्यमंत्री मॉडल कंपोजिट विद्यालयों के निर्माण से शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा और विद्यार्थियों को बेहतर भविष्य के अवसर प्राप्त होंगे। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी परियोजनाओं को निर्धारित समय-सीमा में उच्च गुणवत्ता के साथ पूरा किया जाए, ताकि विद्यार्थियों को जल्द से जल्द इन सुविधाओं का लाभ मिल सके।

निर्माण कार्य के दौरान गुणवत्ता और समय-सीमा का विशेष ध्यान 

इन विद्यालयों का निर्माण विभिन्न नामित कार्यदायी संस्थाओं जैसे उत्तर प्रदेश प्रोजेक्ट्स कॉर्पोरेशन लिमिटेड, उत्तर प्रदेश लोक निर्माण विभाग, कंसल्टेंसी एंड डिजाइन सर्विसेज (उ.प्र. जल निगम), उत्तर प्रदेश समाज कल्याण निर्माण निगम तथा आवास एवं विकास परिषद के माध्यम से कराया जाएगा। निर्माण कार्य के दौरान गुणवत्ता, मानकों और समय-सीमा का विशेष ध्यान रखा जाएगा।

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अविश्वास प्रस्ताव पर स्पीकर ओम बिरला ने कहा-संसद में कोई भी नियमों से ऊपर नहीं

स्पीकर के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर दो दिनों तक लंबी चर्चा के बाद ओम बिड़ला ने सदन को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि किसी भी लोकतंत्र की मजबूती के लिए एक सशक्त और सक्रिय विपक्ष होना बेहद जरूरी है।

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ओम बिड़ला
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar12 Mar 2026 01:52 PM
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No Confidence Motion : लोकसभा में स्पीकर के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर दो दिनों तक लंबी चर्चा के बाद ओम बिड़ला ने सदन को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि किसी भी लोकतंत्र की मजबूती के लिए एक सशक्त और सक्रिय विपक्ष होना बेहद जरूरी है। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि संसद में कोई भी व्यक्ति नियमों से ऊपर नहीं होता, चाहे वह प्रधानमंत्री ही क्यों न हों।

लोकतंत्र में हर आवाज का महत्व

स्पीकर ने बताया कि पिछले दो दिनों में सदन में लगभग 12 घंटे से अधिक समय तक बहस चली, जिसमें सभी सांसदों को अपनी बात रखने का अवसर दिया गया। उन्होंने कहा कि यह सदन देश के लगभग 140 करोड़ लोगों का प्रतिनिधित्व करता है और हर सांसद अपने क्षेत्र की समस्याएं और उम्मीदें लेकर यहां आता है। इसलिए उन्होंने हमेशा कोशिश की कि अधिक से अधिक सदस्य नियमों के दायरे में रहकर अपने विचार व्यक्त कर सकें।

सभी सदस्यों के प्रति आभार

उन्होंने कहा कि संसद विचारों के आदान-प्रदान का महत्वपूर्ण मंच है। बहस के दौरान कई सांसदों ने उनकी आलोचना भी की, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने सभी का धन्यवाद किया। उनके अनुसार यही लोकतंत्र की खूबसूरती है कि यहां अलग-अलग विचारों को सुना जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि स्पीकर की कुर्सी किसी व्यक्ति की नहीं बल्कि लोकतांत्रिक परंपराओं और मूल्यों की प्रतीक है।

विपक्ष के आरोपों पर जवाब

कुछ विपक्षी नेताओं का आरोप था कि नेता प्रतिपक्ष को बोलने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया जाता। इस पर स्पीकर ने कहा कि संसद में हर सदस्य को बोलने का अधिकार है, लेकिन वह अधिकार निर्धारित नियमों के अंतर्गत ही होता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कोई भी सदस्य, यहां तक कि प्रधानमंत्री भी, नियमों से ऊपर नहीं हैं।

नियमों का पालन अनिवार्य

स्पीकर ने बताया कि संसदीय कार्यवाही निर्धारित नियमों के अनुसार ही संचालित होती है। उदाहरण के तौर पर उन्होंने कहा कि नियमों के तहत किसी भी सदस्य को बोलने से पहले अध्यक्ष की अनुमति लेनी होती है। यदि कोई सदस्य सदन की गरिमा के खिलाफ आचरण करता है तो व्यवस्था बनाए रखने के लिए अध्यक्ष को सख्त निर्णय लेने पड़ सकते हैं।

माइक बंद करने के आरोपों का खंडन

सदन में चर्चा के दौरान कुछ सांसदों ने यह भी आरोप लगाया था कि विपक्ष का माइक बंद कर दिया जाता है। इस पर स्पीकर ने कहा कि अध्यक्ष के पास ऐसा कोई बटन नहीं होता जिससे माइक बंद किया जा सके। उन्होंने कहा कि कई ऐसे सांसद भी हैं जो पहले विपक्ष में रहते हुए इस कुर्सी पर बैठ चुके हैं और उन्हें इस प्रक्रिया की जानकारी है।

महिला सांसदों को अवसर देने का दावा

स्पीकर ने यह भी कहा कि उनके कार्यकाल में महिला सांसदों को अपने विचार रखने का पर्याप्त मौका मिला है। उन्होंने बताया कि बजट चर्चा के दौरान कुछ महिला सांसद नारेबाजी करते हुए सत्ता पक्ष की सीटों की ओर चली गई थीं, जो एक असामान्य स्थिति थी। ऐसे समय में उन्होंने सदन की शांति बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए। कुछ सांसदों के निलंबन के मुद्दे पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि उनका सभी सदस्यों से व्यक्तिगत संबंध अच्छा है, लेकिन सदन की व्यवस्था बनाए रखना उनकी जिम्मेदारी है। जब स्थिति नियंत्रण से बाहर हो जाती है, तब नियमों के तहत निलंबन जैसे कठोर फैसले लेने पड़ते हैं। स्पीकर के खिलाफ लाए गए इस प्रस्ताव को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई। विपक्ष के नेताओं खासकर राहुल गांधी ने कार्यवाही के संचालन पर सवाल उठाए, जबकि सरकार की ओर से अमित शाह ने विपक्ष पर लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने का आरोप लगाया। अंतत: लोकसभा में स्पीकर के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव पारित नहीं हो सका और वह अपने पद पर बने रहे।



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