उत्तर प्रदेश में औद्योगिक विकास को गति देने के लिए सरकार ने एक और बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार की योजना के तहत पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के किनारे औद्योगिक गलियारा (इंडस्ट्रियल कॉरिडोर) विकसित किया जाएगा। इस परियोजना के लिए जल्द ही भूमि खरीद की प्रक्रिया शुरू होने वाली है।

UP News : उत्तर प्रदेश में औद्योगिक विकास को गति देने के लिए सरकार ने एक और बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार की योजना के तहत पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के किनारे औद्योगिक गलियारा (इंडस्ट्रियल कॉरिडोर) विकसित किया जाएगा। इस परियोजना के लिए जल्द ही भूमि खरीद की प्रक्रिया शुरू होने वाली है। सरकार का लक्ष्य इस इंडस्ट्रियल हब के माध्यम से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाना और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है। इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए एक विशेषज्ञ समिति का गठन भी किया गया है, जो भूमि अधिग्रहण और परियोजना के क्रियान्वयन से जुड़े सभी पहलुओं की समीक्षा करेगी।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, गठित विशेषज्ञ समूह यह तय करेगा कि किन क्षेत्रों में भूमि अधिग्रहण किया जाएगा और औद्योगिक गलियारे को किस प्रकार विकसित किया जाएगा। समिति को दो महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। रिपोर्ट मिलने के बाद अंतिम निर्णय लेकर भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
इस परियोजना के लिए गठित विशेषज्ञ समिति की कमान विनोद कुमार श्रीवास्तव को सौंपी गई है। वह डा. राममनोहर लोहिया अवध यूनिवर्सिटी के अर्थशास्त्र एवं ग्रामीण विकास विभाग के प्रोफेसर हैं और उन्हें समिति का अध्यक्ष बनाया गया है। समिति में कई प्रतिष्ठित शिक्षाविदों और प्रशासनिक अधिकारियों को भी शामिल किया गया है, जो परियोजना के विभिन्न पहलुओं पर काम करेंगे।
सरकार की योजना के अनुसार इस औद्योगिक गलियारे का विस्तार पूर्वांचल क्षेत्र सहित प्रदेश के करीब 25 जिलों तक किया जाएगा।
विशेषज्ञ समूह में यूनिवर्सिटी आफ लखनऊ के प्रोफेसर अनूप कुमार भारतीय, डा. शकुंतला मिश्रा नेशनल रिहैबिलिटेशन यूनिवर्सिटी की डॉ. अनामिका चौधरी और डॉ. रूपेश कुमार सिंह सहित कई विशेषज्ञों को शामिल किया गया है। इसके अलावा स्थानीय जनप्रतिनिधि और लोक निर्माण विभाग के अधिकारी भी इस समिति का हिस्सा हैं।
सरकार का मानना है कि यदि किसी जिले में भी औद्योगिक कॉरिडोर विकसित होता है तो वहां प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से करीब 5 से 10 हजार लोगों को रोजगार मिलने की संभावना होती है। इंडस्ट्रियल हब बनने से स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा, निवेश बढ़ेगा और क्षेत्र के आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी।