पुलिस के अनुसार अंकित बालियान की हत्या के पीछे किसी व्यक्तिगत विवाद के बजाय करीब ढाई वर्ष पहले सोशल मीडिया पर सामने आए एक हरियाणवी गाने को लेकर पैदा हुई गलतफहमी और उससे जुड़ी आपराधिक साजिश प्रमुख कारण थी।

UP News : उत्तर प्रदेश के शामली जिले में चर्चित हरियाणवी सिंगर अंकित बालियान की हत्या के मामले में पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। पुलिस के अनुसार अंकित बालियान की हत्या के पीछे किसी व्यक्तिगत विवाद के बजाय करीब ढाई वर्ष पहले सोशल मीडिया पर सामने आए एक हरियाणवी गाने को लेकर पैदा हुई गलतफहमी और उससे जुड़ी आपराधिक साजिश प्रमुख कारण थी। शामली के पुलिस अधीक्षक नरेन्द्र प्रताप सिंह (N.P. Singh) के अनुसार, अंकित बालियान ने करीब ढाई वर्ष पहले एक हरियाणवी गीत में अभिनय किया था। पुलिस जांच में सामने आया है कि इस गीत को लेकर कुछ कुख्यात अपराधियों ने यह समझ लिया कि गाना गैंगस्टर जीतेन्द्र मान उर्फ गोगी के जीवन और उसके गैंग को लेकर बनाया गया है। इसी कथित गलतफहमी के चलते अंकित बालियान को निशाना बनाने की साजिश रची गई। पुलिस के मुताबिक इसी साजिश ने आगे चलकर अंकित बालियान की हत्या का रूप ले लिया। UP News
शामली पुलिस के मुताबिक जिस गीत को लेकर विवाद पैदा हुआ, उसमें कथित तौर पर पंक्तियां थीं “भरी कोर्ट में गोली मरांगे मेरी जान, मखे जज के भी आवेंगे पसीने देखिए।”
पुलिस का कहना है कि यह गीत करीब ढाई वर्ष पहले सोशल मीडिया पर अपलोड हुआ था और अंकित बालियान ने इसमें अभिनय किया था। जांच के दौरान पुलिस को जानकारी मिली कि जेल में बंद जीतेन्द्र गोगी गैंग से जुड़े कुछ अपराधियों ने इस गीत को अपने गैंग के सरगना से जोड़कर देखा। पुलिस के अनुसार, इसी बात को लेकर अंकित बालियान के खिलाफ नाराजगी पैदा हुई और बाद में उसकी हत्या की साजिश रची गई। UP News
शामली के एसपी एन.पी. सिंह के अनुसार, इस हत्याकांड की साजिश में जेल में बंद कुछ अपराधियों की भूमिका सामने आई है। पुलिस का दावा है कि राहुल उर्फ गोलू, रोहित उर्फ मोहित और राकेश पम्पू ने अलग-अलग जेलों में रहते हुए शूटरों तक हत्या की सुपारी पहुंचाई। पुलिस के मुताबिक अंकित बालियान की हत्या के लिए सुमित पुत्र धनपाल निवासी सोनीपत, मोहित पुत्र महेश निवासी सोनीपत तथा दो अन्य शूटरों को लगाया गया था। जांच के अनुसार चारों शूटर अंकित बालियान की गतिविधियों और ठिकानों की रेकी करने के लिए शामली पहुंचे थे। UP News
इस पूरे हत्याकांड के खुलासे में शामली के सूर्या होटल की भूमिका भी महत्वपूर्ण बताई जा रही है। एसपी नरेन्द्र प्रताप सिंह के मुताबिक अंकित बालियान की हत्या की योजना बनाकर शामली पहुंचे शूटर इसी होटल में ठहरे थे। पुलिस को जांच के दौरान होटल से महत्वपूर्ण जानकारी मिली। सबसे अहम बात यह सामने आई कि होटल में कमरा लेते समय आरोपियों ने अपनी ओरिजनल आईडी और आधार कार्ड का इस्तेमाल किया था। पुलिस ने होटल से प्राप्त दस्तावेजों और अन्य जानकारी के आधार पर जांच को आगे बढ़ाया और कथित शूटरों तक पहुंचने में सफलता हासिल की। पुलिस का कहना है कि होटल में दर्ज दस्तावेज इस मामले की जांच में महत्वपूर्ण कड़ी साबित हुए। UP News
पुलिस जांच के मुताबिक हत्यारे सीधे वारदात को अंजाम देने नहीं पहुंचे थे, बल्कि उन्होंने पहले अंकित बालियान की रेकी की थी। चारों कथित शूटर शामली पहुंचे और वहां रहकर अंकित की गतिविधियों की जानकारी जुटाई। इसके बाद मौका देखकर वारदात को अंजाम देने की योजना बनाई गई। पुलिस की जांच में सामने आए तथ्यों के अनुसार, इस पूरी साजिश के तार शामली से बाहर बैठे उन अपराधियों तक जुड़े हुए हैं, जिन्होंने कथित तौर पर अंकित बालियान को निशाना बनाने का फैसला किया था। UP News
पुलिस के मुताबिक अंकित बालियान हत्याकांड की जांच के दौरान पुलिस और एसटीएफ की कार्रवाई में इस मामले से जुड़े दो कथित शूटर मुठभेड़ में मारे गए। पुलिस ने उनकी पहचान सुमित पुत्र धनपाल निवासी सोनीपत और मोहित पुत्र महेश निवासी सोनीपत के रूप में बताई है। पुलिस का दावा है कि दोनों अंकित बालियान की हत्या की साजिश को अंजाम देने वाले शूटरों में शामिल थे। इस कार्रवाई के बाद पुलिस ने मामले से जुड़े अन्य आरोपियों और साजिशकर्ताओं की भूमिका को लेकर भी जांच आगे बढ़ाई है। UP News
अंकित बालियान हत्याकांड को लेकर शुरुआत से ही कई तरह के सवाल उठ रहे थे। आखिर एक चर्चित हरियाणवी सिंगर की हत्या क्यों की गई? उसके पीछे कौन लोग थे? हत्या की सुपारी किसने दी और शूटर शामली तक कैसे पहुंचे? अब शामली पुलिस के खुलासे के बाद इन सवालों के जवाब सामने आने लगे हैं। पुलिस के अनुसार, इस हत्याकांड की जड़ करीब ढाई वर्ष पहले सोशल मीडिया पर आए एक गाने से जुड़ी हुई है। पुलिस का दावा है कि अंकित बालियान ने केवल उस गाने में अभिनय किया था, लेकिन जेल में बंद कुछ अपराधियों ने गीत को जीतेन्द्र गोगी से जोड़कर देखा और इसके बाद अंकित को निशाना बनाने का फैसला किया। यानी पुलिस की जांच के मुताबिक एक गाने को लेकर पैदा हुई कथित गलतफहमी ने धीरे-धीरे हत्या की साजिश का रूप ले लिया। UP News
इस मामले में एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि हत्या की साजिश को अंजाम देने के लिए शामली पहुंचे कथित शूटरों ने होटल में अपनी असली पहचान छिपाने की कोशिश नहीं की। उन्होंने सूर्या होटल में कमरा लेने के दौरान कथित तौर पर अपने वास्तविक आधार कार्ड इस्तेमाल किए। पुलिस ने इसी दस्तावेजी जानकारी को जांच की महत्वपूर्ण कड़ी बनाया। होटल रिकॉर्ड से पुलिस को आरोपियों के संबंध में जानकारी मिली और उसके बाद जांच का दायरा बढ़ाया गया। यह तथ्य इस हत्याकांड की जांच में इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि अपराध को अंजाम देने के लिए बाहर से आए कथित शूटरों के ठहरने का सीधा सुराग पुलिस को मिल गया। UP News
पुलिस के खुलासे के बाद अब जांच का एक महत्वपूर्ण केंद्र जेलों में बंद वे अपराधी भी हैं, जिन पर अंकित बालियान की हत्या की कथित साजिश में शामिल होने का आरोप है। पुलिस के अनुसार राहुल उर्फ गोलू, रोहित उर्फ मोहित और राकेश पम्पू के नाम सामने आए हैं। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि जेल में रहते हुए इन आरोपियों ने कथित तौर पर शूटरों तक सुपारी कैसे पहुंचाई और पूरी साजिश को किस प्रकार संचालित किया गया। यह पहलू इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यदि पुलिस के आरोप जांच और अदालत में साबित होते हैं तो यह मामला जेल के भीतर से अपराध की साजिश संचालित किए जाने का भी गंभीर उदाहरण बन सकता है। UP News
शामली पुलिस के खुलासे के बाद अब जांच में उन सभी कड़ियों को जोड़ा जा रहा है, जो हत्या की साजिश से लेकर शूटरों के शामली पहुंचने और फिर वारदात तक जाती हैं। पुलिस होटल रिकॉर्ड, आरोपियों की पहचान, उनके आपसी संपर्क और जेल में बंद कथित साजिशकर्ताओं की भूमिका को जांच का हिस्सा बना रही है। अंकित बालियान हत्याकांड में पुलिस की कार्रवाई के बाद यह साफ हो गया है कि मामला महज एक स्थानीय विवाद का नहीं था, बल्कि पुलिस के अनुसार इसके तार हरियाणवी गाने, गैंगस्टर जीतेन्द्र मान उर्फ गोगी से जुड़ी कथित नाराजगी और जेल में बंद अपराधियों तक पहुंचते हैं। UP News
चेतना मंच की विशेष टिप्पणी: अंकित बालियान हत्याकांड को लेकर शामली पुलिस द्वारा बताए गए तथ्यों ने मामले की तस्वीर काफी हद तक स्पष्ट की है। हालांकि पुलिस द्वारा लगाए गए आरोपों और जांच में सामने आए तथ्यों का अंतिम न्यायिक निर्धारण अदालत में साक्ष्यों के आधार पर होगा।
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