हरियाणवी गायक एवं यूट्यूबर अंकित बालियान हत्याकांड में पुलिस की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे कई ऐसे तथ्य सामने आ रहे हैं जो इस सनसनीखेज हत्याकांड की पूरी तस्वीर को और गंभीर बना रहे हैं।

UP News : हरियाणवी गायक एवं यूट्यूबर अंकित बालियान हत्याकांड में पुलिस की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे कई ऐसे तथ्य सामने आ रहे हैं जो इस सनसनीखेज हत्याकांड की पूरी तस्वीर को और गंभीर बना रहे हैं। अब जांच में सामने आया है कि हत्या को अंजाम देने वाले कथित शूटरों में शामिल मोहित और सुमित वारदात से करीब छह दिन पहले ही शामली पहुंच गए थे। दोनों ने शामली के सूर्या होटल में ठहरकर अंकित बालियान की गतिविधियों और उसके आने-जाने की रेकी की थी। होटल में उनकी मौजूदगी का सीसीटीवी रिकॉर्ड भी पुलिस के हाथ लगा है। यही खुलासा अब इस हत्याकांड की जांच में एक बेहद अहम सवाल खड़ा कर रहा है यदि कथित शूटर कई दिन पहले शामली पहुंचकर होटल में ठहरे थे, स्थानीय स्तर पर घूम रहे थे और एक चर्चित व्यक्ति की रेकी कर रहे थे, तो क्या पुलिस के खुफिया तंत्र, स्थानीय पुलिस अथवा LIU को इसकी भनक नहीं लग सकी? यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि घटना के बाद सामने आए घटनाक्रम से स्पष्ट है कि शूटरों ने हत्या की योजना अचानक नहीं बनाई थी। पुलिस की जांच के अनुसार हत्या के लिए पहले से रेकी, ठिकाने और भागने की व्यवस्था तक की गई थी। UP News
पुलिस जांच के अनुसार मोहित और सुमित 20 अगस्त को शामली पहुंचे थे। दोनों ने सूर्या होटल में कमरा लिया और वहां आवश्यक पहचान संबंधी दस्तावेज भी जमा किए। होटल में उनकी मौजूदगी सीसीटीवी कैमरों में रिकॉर्ड हुई। पुलिस अब होटल के डीवीआर और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है। जांच में यह भी सामने आया है कि दोनों ने शामली में रहते हुए अंकित बालियान की गतिविधियों पर नजर रखी और उसके आने-जाने के बारे में जानकारी जुटाई। यानी वारदात से पहले ही हत्यारों की टीम ने लक्ष्य की रेकी शुरू कर दी थी। UP News
सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि शूटरों के होटल में ठहरने की जानकारी पुलिस को हत्या के बाद जांच के दौरान मिली। पुलिस ने घटना के बाद सीसीटीवी फुटेज खंगाली और सूर्या होटल तक पहुंची। वहां से संदिग्धों की मौजूदगी और उनकी पहचान से जुड़े दस्तावेज पुलिस के हाथ लगे। होटल का डीवीआर भी जांच के लिए कब्जे में लिया गया है। यहीं से अब यह सवाल पैदा होता है कि क्या होटल में संदिग्धों के ठहरने की जानकारी घटना से पहले किसी स्थानीय खुफिया अधिकारी तक पहुंच सकती थी? अगर पुलिस या LIU को समय रहते यह जानकारी मिल जाती कि बाहर से आए संदिग्ध युवक कई दिनों से शामली में ठहरे हैं और एक चर्चित गायक की गतिविधियों पर नजर रख रहे हैं, तो संभव है कि उनकी गतिविधियों की निगरानी की जाती और हत्याकांड को लेकर कोई सुराग वारदात से पहले ही मिल जाता। हालांकि यह एक संभावित स्थिति है और इसे जांच के निष्कर्ष के तौर पर नहीं कहा जा सकता। UP News
LIU यानी लोकल इंटेलिजेंस यूनिट का मूल काम स्थानीय स्तर पर महत्वपूर्ण गतिविधियों, संदिग्ध गतिविधियों और कानून-व्यवस्था से जुड़े संभावित खतरों के बारे में सूचनाएं जुटाकर संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाना है।
ऐसे में अंकित बालियान हत्याकांड में यह जांच का विषय होना चाहिए कि—
इन सवालों का जवाब जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। UP News
अंकित बालियान की हत्या के बाद यूपी पुलिस ने जांच तेज कर दी। सीसीटीवी फुटेज, कॉल डिटेल, डिजिटल गतिविधियों और अन्य सुरागों के आधार पर कथित शूटरों की पहचान की गई। पुलिस की कई टीमें हरियाणा, दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में दबिश देती रहीं। पुलिस के अनुसार हत्याकांड में चार शूटरों की भूमिका सामने आई है, जबकि रेकी और अन्य मदद करने वालों को मिलाकर अब तक छह लोगों की भूमिका जांच में सामने आने की बात कही गई है। 31 अगस्त को पुलिस ने कार्रवाई करते हुए कथित शूटर मोहित और सुमित को मुठभेड़ में मार गिराने का दावा किया। पुलिस के अनुसार दोनों पर 50-50 हजार रुपये का इनाम घोषित था। मुठभेड़ के दौरान पुलिसकर्मियों के घायल होने की भी जानकारी सामने आई है। UP News
अंकित बालियान की हत्या से पहले कथित शूटरों का करीब छह दिन पहले शामली पहुंचना इस पूरे मामले का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा बनकर सामने आया है। यदि जांच में यह प्रमाणित होता है कि दोनों संदिग्धों ने 20 और 21 अगस्त को बाकायदा अंकित की रेकी की और उसके बाद हत्या की योजना को अंतिम रूप दिया, तो जांच एजेंसियों के लिए यह पता लगाना बेहद जरूरी होगा कि इन छह दिनों के दौरान वे किन लोगों के संपर्क में थे, कहां-कहां गए, किससे मिले और उनकी गतिविधियों की जानकारी किसी पुलिस अथवा खुफिया इकाई तक क्यों नहीं पहुंची। यही वह बिंदु है जहां अंकित बालियान हत्याकांड केवल एक आपराधिक वारदात नहीं रह जाता, बल्कि स्थानीय खुफिया तंत्र की सक्रियता और सूचना के आदान-प्रदान की प्रभावशीलता पर भी सवाल खड़े करता है। UP News
इस सवाल का निश्चित उत्तर फिलहाल किसी के पास नहीं है। यह कहना भी जल्दबाजी होगी कि यदि LIU अथवा STF को पहले इनपुट मिल जाता तो अंकित की हत्या निश्चित रूप से रुक जाती। लेकिन इतना जरूर है कि हत्या से कई दिन पहले कथित शूटरों की शामली में मौजूदगी और रेकी का खुलासा होने के बाद यह सवाल जांच के दायरे में आना स्वाभाविक है कि क्या कोई ऐसी सूचना उपलब्ध थी, जिसे समय रहते जोड़कर संभावित खतरे का अनुमान लगाया जा सकता था। अब जांच एजेंसियों के सामने केवल हत्यारों और साजिशकर्ताओं तक पहुंचना ही चुनौती नहीं है, बल्कि यह भी पता लगाना महत्वपूर्ण है कि शूटर छह दिन तक शामली में क्या करते रहे और पुलिस के खुफिया नेटवर्क को उनकी गतिविधियों की भनक क्यों नहीं लगी। UP News
पुलिस अब होटल के सीसीटीवी, डीवीआर, मोबाइल फोन, डिजिटल संचार और अन्य साक्ष्यों की मदद से यह पता लगाने में जुटी है कि कथित शूटरों को अंकित की गतिविधियों की जानकारी किसने दी थी और उनके पीछे कौन लोग काम कर रहे थे। पुलिस के अनुसार हत्याकांड की साजिश और नेटवर्क की कड़ियों की जांच जारी है। अंकित बालियान हत्याकांड में अब सबसे बड़ा सवाल यही है जब मौत के सौदागर वारदात से छह दिन पहले ही शामली में डेरा डाल चुके थे, तो क्या सिस्टम के पास उन्हें पहचानने और रोकने का मौका था? इस सवाल का जवाब केवल अंकित बालियान हत्याकांड की गुत्थी सुलझाने के लिए ही नहीं, बल्कि भविष्य में ऐसी वारदातों को रोकने के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। UP News
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