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महिला आरक्षण के मुद्दे पर उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर तीखा टकराव देखने को मिला है। राजधानी लखनऊ में देर रात भाजपा नेता और उत्तर प्रदेश महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव ने समर्थकों के साथ विधानसभा के सामने विरोध प्रदर्शन किया।

UP News : महिला आरक्षण के मुद्दे पर उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर तीखा टकराव देखने को मिला है। राजधानी लखनऊ में देर रात भाजपा नेता और उत्तर प्रदेश महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव ने समर्थकों के साथ विधानसभा के सामने विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान उन्होंने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर जमकर हमला बोला और आरोप लगाया कि विपक्ष महिलाओं के अधिकारों की बात तो करता है, लेकिन जब उन्हें वास्तविक हिस्सेदारी देने का समय आता है, तब उसका रवैया बदल जाता है। UP News
प्रदर्शन के दौरान अपर्णा यादव ने कहा कि उत्तर प्रदेश की महिलाएं अब राजनीतिक नारों और वास्तविक नीयत के बीच फर्क समझने लगी हैं। उनके मुताबिक, जो दल वर्षों से सामाजिक न्याय और महिला सम्मान की बात करते रहे, वही आज महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी के रास्ते में रुकावट बनते दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि आम परिवारों से आने वाली महिलाओं को संसद और विधानसभाओं तक पहुंचाने की जगह कुछ दल अपने सीमित राजनीतिक दायरे और परिवारवादी सोच को बचाने में लगे हैं। अपर्णा यादव ने साफ शब्दों में कहा कि उत्तर प्रदेश से लेकर राष्ट्रीय राजनीति तक, अब महिलाओं को प्रतीक नहीं, बल्कि भागीदारी चाहिए। उन्होंने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि नारी शक्ति अब सब देख रही है और जो ताकतें महिलाओं को आगे बढ़ने से रोकेंगी, उन्हें जनता के बीच जवाब देना पड़ेगा। अपर्णा यादव ने इस पूरे विवाद के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भूमिका की भी खुलकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि महिला प्रतिनिधित्व को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार ने गंभीर इच्छाशक्ति दिखाई है। उनके अनुसार, अगर यह विधायी पहल पूरी तरह सफल होती, तो उत्तर प्रदेश समेत पूरे देश में महिलाओं के बीच उत्सव जैसा माहौल होता। उन्होंने संसद में बने हालात को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि इससे महिलाओं की उम्मीदों को ठेस पहुंची है। UP News
महिला आरक्षण के मुद्दे पर उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में राजनीतिक हलचल सिर्फ विधानसभा तक सीमित नहीं रही। समाजवादी पार्टी के दफ्तर के बाहर भी महिलाओं ने विरोध जताया और विपक्षी नेताओं के खिलाफ नारे लगाए। प्रदर्शन में शामिल महिलाओं का कहना था कि यह मुद्दा केवल एक बिल का नहीं, बल्कि देश और उत्तर प्रदेश की महिलाओं के सम्मान, प्रतिनिधित्व और राजनीतिक भविष्य का है। इस बीच समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया के जरिए भाजपा पर तंज कसा, जिसके बाद यह मामला और राजनीतिक रंग लेता नजर आया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महिला आरक्षण का प्रश्न अब उत्तर प्रदेश में भी आने वाले दिनों का बड़ा चुनावी और वैचारिक मुद्दा बन सकता है। UP News
महिला आरक्षण से जुड़े 131वें संविधान संशोधन विधेयक, 2026 को लोकसभा में जरूरी समर्थन नहीं मिल सका। मतदान के दौरान विधेयक के पक्ष में 298 वोट पड़े, जबकि विरोध में 230 मत आए। हालांकि समर्थन विपक्ष से अधिक रहा, लेकिन संविधान संशोधन पारित कराने के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा पूरा नहीं हो सका। इसी वजह से यह विधेयक आगे नहीं बढ़ पाया। अगर संसदीय गणित के हिसाब से देखें तो इस विधेयक को पारित कराने के लिए 352 मतों की आवश्यकता थी, लेकिन समर्थन पक्ष इस संख्या से 54 वोट पीछे रह गया। इस नतीजे के बाद उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं। UP News
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी विपक्ष के रुख पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि देश की महिलाएं यह देख रही हैं कि उनके अधिकारों और प्रतिनिधित्व की राह में कौन खड़ा है। उनका संदेश साफ था कि महिला सशक्तिकरण के मुद्दे पर राजनीति करने वालों को आने वाले समय में महिलाओं के आक्रोश का सामना करना पड़ सकता है। वहीं संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि महिलाओं को अधिकार और सम्मान देने की दिशा में यह एक ऐतिहासिक अवसर था, लेकिन विपक्ष ने उसका महत्व नहीं समझा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि केंद्र सरकार महिलाओं की राजनीतिक हिस्सेदारी सुनिश्चित करने के अपने अभियान को आगे भी जारी रखेगी। UP News
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