आराधना मिश्रा ‘मोना’ कौन हैं? जानिए उत्तर प्रदेश कांग्रेस की नई प्रदेश अध्यक्ष का राजनीतिक सफर, रामपुर खास से विधायक बनने की कहानी, पिता प्रमोद तिवारी की राजनीतिक विरासत और उनके अब तक के सफर के बारे में।

उत्तर प्रदेश कांग्रेस को नया चेहरा मिल गया है और इस बार पार्टी ने संगठन की कमान रामपुर खास की तीन बार की विधायक आराधना मिश्रा ‘मोना’ को सौंपी है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता और राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी की बेटी आराधना मिश्रा ‘मोना’ के लिए यह जिम्मेदारी महज एक पद नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की सियासत में अपनी अलग पहचान और पार्टी को नई दिशा देने की बड़ी परीक्षा भी है। पिता की मजबूत राजनीतिक जमीन से मिले अनुभव को अपनी सक्रिय राजनीति के जरिए आगे बढ़ाने वाली आराधना मिश्रा दो दशक से ज्यादा समय से कांग्रेस की राजनीति में सक्रिय हैं। ब्लॉक प्रमुख से विधायक और फिर कांग्रेस विधायक दल की नेता तक का सफर तय कर चुकीं आराधना मिश्रा अब उत्तर प्रदेश कांग्रेस की सबसे अहम जिम्मेदारी संभालेंगी। 2027 के विधानसभा चुनाव की आहट के बीच कांग्रेस ने जिस चेहरे पर दांव लगाया है, उसकी कहानी राजनीतिक विरासत, लगातार चुनावी सफलता और संगठन में बढ़ती भूमिका से होकर गुजरती है।
आराधना मिश्रा ‘मोना’ उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले की रामपुर खास विधानसभा सीट से विधायक हैं। वह कांग्रेस विधायक दल की नेता भी रह चुकी हैं और अब उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। उनका जन्म 20 अप्रैल 1974 को प्रयागराज में हुआ था। आराधना मिश्रा को राजनीति विरासत में मिली। उनके पिता प्रमोद तिवारी कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में शामिल रहे हैं और रामपुर खास विधानसभा क्षेत्र में लंबे समय तक उनका मजबूत राजनीतिक प्रभाव रहा है। आराधना मिश्रा का राजनीतिक सफर दो दशक से ज्यादा पुराना है। उन्होंने स्थानीय स्तर से राजनीति में अपनी सक्रियता शुरू की और इसके बाद विधानसभा की राजनीति में अपनी जगह बनाई। वह समाजसेवा, अध्ययन, दिव्यांगजन के कल्याण से जुड़े काम और पत्रकारिता में भी रुचि रखती हैं।
आराधना मिश्रा ‘मोना’ का नाम रामपुर खास विधानसभा सीट के साथ लंबे समय से जुड़ा रहा है। उन्होंने 2014 में हुए उपचुनाव में रामपुर खास सीट से जीत दर्ज कर पहली बार विधानसभा में प्रवेश किया। इसके बाद 2017 के विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने जीत हासिल की और 2022 में लगातार तीसरी बार विधायक चुनी गईं। रामपुर खास से लगातार चुनावी सफलता ने आराधना मिश्रा को उत्तर प्रदेश कांग्रेस के प्रमुख चेहरों में जगह दिलाई। इसी राजनीतिक अनुभव और संगठन में उनकी भूमिका को देखते हुए उन्हें कांग्रेस विधायक दल की नेता की जिम्मेदारी भी मिली। तीन बार विधायक रहने के दौरान आराधना मिश्रा की पहचान उत्तर प्रदेश कांग्रेस की सक्रिय महिला नेताओं में बनी। अब उत्तर प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी मिलने के बाद उनकी भूमिका विधानसभा क्षेत्र की राजनीति से आगे बढ़कर पूरे उत्तर प्रदेश में पार्टी संगठन से जुड़ गई है।
आराधना मिश्रा ‘मोना’ की राजनीतिक पहचान विरासत में उनके पिता प्रमोद तिवारी से मिली, जिनका नाम उत्तर प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में शामिल है। प्रमोद तिवारी का जन्म 16 जुलाई 1951 को संग्रामगढ़, कुंडा, प्रतापगढ़ में हुआ था। उन्होंने बीएससी और एलएलबी की पढ़ाई की और इलाहाबाद हाईकोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता के तौर पर भी काम किया। प्रमोद तिवारी का सबसे लंबा राजनीतिक जुड़ाव रामपुर खास विधानसभा सीट से रहा। वह इस सीट से लगातार नौ बार विधायक चुने गए। उनके लंबे राजनीतिक सफर के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार में उन्हें ऊर्जा, परिवहन, पर्यटन और नागरिक उड्डयन जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी भी मिली। बाद में प्रमोद तिवारी ने राष्ट्रीय राजनीति का रुख किया और राज्यसभा पहुंचे। वर्तमान में वह राजस्थान से राज्यसभा सांसद हैं और कांग्रेस के प्रमुख नेताओं में शामिल हैं। रामपुर खास में तिवारी परिवार की राजनीतिक मौजूदगी कई दशकों से रही है। इसी राजनीतिक पृष्ठभूमि में आराधना मिश्रा ने भी अपनी राजनीति को आगे बढ़ाया। हालांकि, उनका राजनीतिक सफर केवल पारिवारिक विरासत तक सीमित नहीं रहा और उन्होंने लगातार चुनाव जीतकर अपनी अलग राजनीतिक पहचान बनाई।
आराधना मिश्रा ‘मोना’ की सक्रिय राजनीति में प्रियंका गांधी वाड्रा के साथ काम करने का भी जिक्र है। उन्होंने प्रियंका गांधी के ‘लड़की हूं, लड़ सकती हूं’ अभियान में भी भूमिका निभाई थी। उत्तर प्रदेश की राजनीति में कांग्रेस की महिला नेताओं के बीच आराधना मिश्रा की सक्रियता इसी दौरान दिखाई दी। कांग्रेस संगठन में उनकी भूमिका धीरे-धीरे बढ़ती गई। विधायक के तौर पर विधानसभा में सक्रिय रहने के साथ ही वह पार्टी के संगठनात्मक कामकाज में भी जुड़ी रहीं। कांग्रेस विधायक दल की नेता के तौर पर मिली जिम्मेदारी ने उनके राजनीतिक कद को और बढ़ाया।
उत्तर प्रदेश कांग्रेस में संगठनात्मक बदलाव की चर्चाओं के बीच पार्टी ने आराधना मिश्रा ‘मोना’ को प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी है। रामपुर खास से तीन बार की विधायक और कांग्रेस विधायक दल की नेता रह चुकीं आराधना मिश्रा के सामने अब पूरे प्रदेश में कांग्रेस संगठन को संभालने की जिम्मेदारी है। 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए यह जिम्मेदारी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद आराधना मिश्रा ने कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व का आभार जताया। उन्होंने कहा कि वह पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ मिली जिम्मेदारी को निभाएंगी। उन्होंने यह भी माना कि चुनाव को देखते हुए उनके पास समय कम है और चुनौतियां ज्यादा हैं। आराधना मिश्रा ने अपनी पहली प्रतिक्रिया में कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व में मल्लिकार्जुन खड़गे, सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी का आभार जताया। उन्होंने गठबंधन धर्म निभाने की बात भी कही।
आराधना मिश्रा को उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाए जाने के बाद उनके पिता प्रमोद तिवारी ने भी उनके नेतृत्व पर भरोसा जताया। उन्होंने कहा कि मोना उस परिवार की चौथी पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करती हैं, जो कांग्रेस पार्टी के हर दौर में उसके साथ रहा है। प्रमोद तिवारी के मुताबिक, आराधना मिश्रा ब्लॉक प्रमुख, विधायक और कांग्रेस विधानमंडल दल की नेता के तौर पर जिम्मेदारियां निभा चुकी हैं। उन्होंने कहा कि आराधना मिश्रा में पार्टी की ओर से दी गई जिम्मेदारी को संभालने की क्षमता है। प्रमोद तिवारी ने उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की संभावनाओं को लेकर भी भरोसा जताया और कहा कि उनकी बेटी कांग्रेस पार्टी और गांधी परिवार के प्रतिनिधि के तौर पर अपनी जिम्मेदारी पूरी निष्ठा के साथ निभाएंगी।
रामपुर खास की राजनीति से निकलकर अब आराधना मिश्रा ‘मोना’ की जिम्मेदारी पूरे उत्तर प्रदेश में कांग्रेस संगठन को संभालने की है। एक विधायक के तौर पर लगातार तीन बार विधानसभा पहुंचने के बाद अब उनके राजनीतिक सफर का अगला चरण उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में शुरू हुआ है। उनकी राजनीतिक पृष्ठभूमि में पिता प्रमोद तिवारी की लंबी विरासत, रामपुर खास से लगातार चुनावी सफलता, कांग्रेस विधायक दल में नेतृत्व की भूमिका और पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व के साथ काम करने का अनुभव शामिल है। अब प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर उनकी भूमिका उत्तर प्रदेश की राजनीति में कांग्रेस के संगठन और चुनावी तैयारियों से जुड़ी होगी। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने उन्हें प्रदेश की कमान सौंपी है। ऐसे में आराधना मिश्रा ‘मोना’ के राजनीतिक सफर का यह नया अध्याय आने वाले समय में उत्तर प्रदेश की कांग्रेस राजनीति के लिए महत्वपूर्ण रहेगा।
विज्ञापन