शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पर दर्ज यौन शोषण के मुकदमे के बाद मामला दो तरफा आरोप प्रत्यारोप में बदल गया है। एक ओर शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी हैं, तो दूसरी ओर शंकराचार्य ने उनके आपराधिक रिकॉर्ड पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

UP News : उत्तर प्रदेश में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पर दर्ज यौन शोषण के मुकदमे के बाद मामला दो तरफा आरोप प्रत्यारोप में बदल गया है। एक ओर शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी हैं, तो दूसरी ओर शंकराचार्य ने उनके आपराधिक रिकॉर्ड पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर घटनाक्रम इस प्रकार समझा जा सकता है।
वे उत्तर प्रदेश के प्रमुख हिंदू संतों में गिने जाते हैं और धार्मिक-सामाजिक मुद्दों पर अक्सर मुखर रहते हैं। हाल ही में उनके खिलाफ प्रयागराज में यौन शोषण का मुकदमा दर्ज कराया गया, जिसने व्यापक चर्चा पैदा की। उनपर मुकदमा दर्ज करवाने वाले आशुतोष ब्रह्मचारी के ऊपर दर्जनों मुकदमे दर्ज हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, आशुतोष ब्रह्मचारी खुद को सहारनपुर की शाकुंभरी पीठ से जुड़ा संत बताते हैं। उन्होंने प्रयागराज में शंकराचार्य और उनके एक सहयोगी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई। हालांकि, शंकराचार्य ने पलटवार करते हुए उन्हें हिस्ट्रीशीटर बताया और दावा किया कि उनके खिलाफ दो दर्जन से अधिक संगीन आपराधिक मामले दर्ज हैं।
मीडिया रिपोर्टों में जिन दावों का उल्लेख है, उनके अनुसार:
* आशुतोष ब्रह्मचारी उर्फ आशुतोष पांडेय उर्फ अश्वनी सिंह के नाम से विभिन्न जिलों में मुकदमे दर्ज बताए जाते हैं।
* शामली जिले के कांधला थाने में उनकी हिस्ट्रीशीट नंबर 76ए दर्ज होने का दावा किया गया है।
* वर्ष 2002 से आपराधिक रिकॉर्ड शुरू होने की बात कही जा रही है।
* गौवध निषेध अधिनियम, भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम, ठगी, जमीन कब्जा, बलात्कार (धारा 376) जैसे गंभीर आरोपों का उल्लेख रिपोर्टों में किया गया है।
* कुछ मामलों में संगठित अपराध और कथित रिश्वत प्रकरण का भी जिक्र है।
ध्यान देने योग्य है कि ये सभी आरोप मीडिया और पुलिस रिकॉर्ड के हवाले से बताए जा रहे हैं। किसी भी मामले में अंतिम सत्य न्यायालय के निर्णय से ही तय होता है।
* शंकराचार्य पर दर्ज यौन शोषण केस की जांच जारी है।
* साथ ही, शिकायतकर्ता के आपराधिक इतिहास को लेकर भी राजनीतिक और धार्मिक हलकों में बहस तेज हो गई है।
* पुलिस और अदालत की प्रक्रिया के बाद ही दोनों पक्षों पर लगे आरोपों की वैधानिक स्थिति स्पष्ट होगी। UP News