
UP News : उत्तर प्रदेश पुलिस की आतंकवाद निरोधक इकाई (एटीएस) और खुफिया एजेंसियां इन दिनों एक ऐसे व्यक्ति की तलाश में हैं, जो न केवल धर्मांतरण रैकेट का आर्थिक मास्टरमाइंड माना जा रहा है, बल्कि संगठित अपराध और कट्टरपंथी गतिविधियों का भी प्रमुख किरदार बताया जा रहा है — नाम है मोहम्मद अहमद खान। यह वही नाम है, जिसे जमालुद्दीन उर्फ छांगुर बाबा के नेटवर्क का आर्थिक आधार बताया जा रहा है। छांगुर बाबा को अवैध धर्मांतरण मामले में पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है, लेकिन जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, सामने आया कि पूरे नेटवर्क की डोरें पर्दे के पीछे से मोहम्मद अहमद खान ही चला रहा था।
लखनऊ और बलरामपुर की पुलिस टीमें लगातार दबिश दे रही हैं, लेकिन खान अब तक कानून की पकड़ से बाहर है। पुलिस सूत्रों का मानना है कि वह बार-बार अपने ठिकाने बदलता है और अलग-अलग राज्यों में छिपता फिरता है, जिससे उसकी ट्रैकिंग बेहद कठिन हो गई है। खान के खिलाफ यूपी के कई जिलों में गंभीर धाराओं के तहत मामले दर्ज हैं। आरोप है कि वह छांगुर बाबा के अवैध धर्मांतरण गिरोह का वित्तीय संचालन करता है — फंडिंग से लेकर धन के लेन-देन तक, सब कुछ उसी के जरिये होता था। वह मूल रूप से बलरामपुर का निवासी है और भूमाफिया गतिविधियों में भी सक्रिय रहा है। सूत्रों के मुताबिक, वह फर्जी दस्तावेजों के आधार पर करोड़ों की संपत्तियों पर कब्जा करता था, और इन संसाधनों का इस्तेमाल धर्मांतरण जैसे षड्यंत्रों में किया जाता था। उसकी गतिविधियों का दायरा सिर्फ उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं है।
सबसे सनसनीखेज जानकारी यह है कि खान पुणे के पिंपरी क्षेत्र में 100 करोड़ रुपये से अधिक की अचल संपत्ति का मालिक है। खुफिया एजेंसियों को यह भी आशंका है कि उसने वहां एक कथित "प्रशिक्षण केंद्र" स्थापित कर रखा है, जहां युवाओं को कट्टरपंथी विचारधारा की ओर मोड़ा जाता है और धर्मांतरण के लिए तैयार किया जाता है। एजेंसियों का संदेह है कि यह केंद्र सिर्फ वैचारिक नहीं, बल्कि रणनीतिक गतिविधियों से भी जुड़ा हुआ हो सकता है — जो इस प्रकरण को एक धार्मिक अपराध से उठाकर राष्ट्रीय सुरक्षा के खतरे की श्रेणी में पहुंचा देता है। UP News