काशी पहुंचने पर उन्होंने पत्रकारों से बातचीत करते हुए प्रदेश की भाजपा सरकार पर तीखा प्रहार किया। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने साफ शब्दों में कहा कि वर्तमान सरकार के रहते आम लोगों को न्याय की आशा नहीं करनी चाहिए।

UP News : ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद प्रयागराज प्रवास के बाद गुरुवार को काशी लौट आए। काशी पहुंचने पर उन्होंने पत्रकारों से बातचीत करते हुए प्रदेश की भाजपा सरकार पर तीखा प्रहार किया। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने साफ शब्दों में कहा कि वर्तमान सरकार के रहते आम लोगों को न्याय की आशा नहीं करनी चाहिए।
उन्होंने हाल ही में सामने आए एक वीडियो का जिक्र करते हुए कहा कि पूरे देश ने देखा है कि किस तरह बटुकों के साथ दुर्व्यवहार किया गया और उन्हें अपमानित किया गया। उनका कहना था कि किसी भी गलती को स्वीकार न करना और अपने कृत्य पर पश्चाताप न दिखाना, यह संबंधित लोगों की सोच को उजागर करता है। उन्होंने बताया कि प्रयागराज में 11 दिनों तक संयम बरतते हुए संबंधित पक्ष को अपनी गलती सुधारने का अवसर दिया गया, लेकिन कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया गया। इसी कारण वे काशी वापस लौट आए। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम से यही संदेश निकलता है कि इस राजनीतिक दल की सरकार में न्याय की अपेक्षा करना व्यर्थ है।
शंकराचार्य ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा लागू किए गए नए नियमों का भी खुलकर विरोध किया। उन्होंने कहा कि ये नियम सनातन धर्म की मूल संरचना को कमजोर करने वाले हैं। उनका कहना था कि सनातन व्यवस्था में जातियों की परिकल्पना समाज को तोड़ने के लिए नहीं, बल्कि सभी वर्गों की आजीविका और सामाजिक संतुलन बनाए रखने के उद्देश्य से की गई थी। लेकिन नए नियमों के माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों को एक-दूसरे के खिलाफ खड़ा किया जा रहा है, जिससे आपसी टकराव बढ़ेगा।
बुधवार रात करीब साढ़े नौ बजे शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद केदार घाट स्थित श्रीविद्या मठ पहुंचे। उल्लेखनीय है कि माघी पूर्णिमा के अवसर पर उन्होंने स्नान नहीं किया। उनके आगमन को देखते हुए स्थानीय पुलिस प्रशासन सतर्क रहा और मठ के आसपास सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि यूजीसी जैसी नीतियां लागू होती रहीं तो इसका परिणाम हिंदू समाज के लिए अत्यंत घातक हो सकता है। उन्होंने इसे सनातन धर्म को समाप्त करने की एक सुनियोजित प्रक्रिया बताया और कहा कि इसी वजह से वे यूजीसी के नए नियमों का विरोध कर रहे हैं।