अयोध्या के भव्य दीपोत्सव में इस बार कुछ ऐसा देखने को मिला, जिसने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। रामनगरी की सड़कों पर निकली रंग-बिरंगी झांकियां, पारंपरिक लोकनृत्य और कलाकारों की शानदार प्रस्तुतियों के बीच आखिर क्या रहा सबसे बड़ा आकर्षण? जानिए पूरी खबर।

UP News : भगवान श्रीराम की पावन नगरी अयोध्या में दीपोत्सव के अवसर पर भक्ति, आस्था, संस्कृति और लोक परंपराओं का अद्भुत संगम देखने को मिला। दीपोत्सव की रौनक के बीच रामनगरी की सड़कें रंग-बिरंगी झांकियों, पारंपरिक वेशभूषा में सजे कलाकारों और लोकसंगीत की मधुर धुनों से गुलजार नजर आईं। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो सदियों पुरानी त्रेतायुग की अयोध्या एक बार फिर जीवंत होकर लोगों के सामने आ गई हो। शोभायात्रा में भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण के स्वरूपों के साथ रामायण के विभिन्न प्रसंगों पर आधारित आकर्षक झांकियों ने श्रद्धालुओं का ध्यान खींचा। वहीं, मथुरा के प्रसिद्ध मयूर नृत्य की मनमोहक अदाओं, बम रसिया की जोशीली धुन और उत्तर प्रदेश के अलग-अलग अंचलों से आए कलाकारों की लोकनृत्य प्रस्तुतियों ने पूरे माहौल को उत्सवमय बना दिया। कहीं घुंघरुओं की झंकार सुनाई दी तो कहीं पारंपरिक वाद्ययंत्रों की गूंज ने दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। इस भव्य आयोजन में न केवल भगवान श्रीराम की गौरवशाली विरासत की झलक दिखाई दी, बल्कि उत्तर प्रदेश की समृद्ध लोककला और सांस्कृतिक विविधता भी पूरे वैभव के साथ सामने आई। रामनगरी की इस अद्भुत छटा को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक उत्साहित नजर आए।
इस वर्ष दीपोत्सव-2026 की शुरुआत दसवें भव्य दीपोत्सव के तहत शोभायात्रा से हुई। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने साकेत महाविद्यालय से शोभायात्रा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह शोभायात्रा रामपथ से होते हुए रामकथा पार्क तक पहुंची। शोभायात्रा में रामायण के सातों कांडों पर आधारित झांकियां विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं। इनमें शामिल थे:
इन झांकियों के माध्यम से भगवान श्रीराम के जन्म से लेकर वनवास, माता सीता की खोज, रावण पर विजय और अयोध्या वापसी तक की पूरी रामकथा को आकर्षक रूप में प्रस्तुत किया गया।

शोभायात्रा में उत्तर प्रदेश की समृद्ध लोकसंस्कृति के भी शानदार दर्शन हुए। मथुरा का प्रसिद्ध मयूर नृत्य और बम रसिया दर्शकों के लिए खास आकर्षण रहे। इसके अलावा प्रयागराज का ढेड़िया नृत्य, बांदा का पाई डंडा, सोनभद्र का मांदल और सिंघा, अयोध्या का बधावा, गाजीपुर का धोबिया नृत्य, गोरखपुर का वनटांगिया और फरवाही तथा सुलतानपुर का नटवरी नृत्य भी प्रस्तुत किया गया। उत्तराखंड के कलाकारों ने भी अपनी पारंपरिक लोककलाओं के माध्यम से आयोजन की शोभा बढ़ाई। अलग-अलग जिलों और राज्यों से आए कलाकारों ने अपने पारंपरिक परिधानों और संगीत से रामनगरी को सांस्कृतिक उत्सव में बदल दिया।
उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में वर्ष 2017 से दीपोत्सव का आयोजन लगातार भव्य होता जा रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि वर्ष 2026 का दीपोत्सव पिछले नौ वर्षों के सभी रिकॉर्ड पीछे छोड़कर नया इतिहास बनाएगा। उनके अनुसार दीपोत्सव केवल धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह भगवान श्रीराम के प्रति जनआस्था, भारतीय संस्कृति और उत्तर प्रदेश की समृद्ध लोकपरंपराओं को दुनिया के सामने प्रस्तुत करने का बड़ा माध्यम बन गया है।
शोभायात्रा के बाद रामकथा पार्क में भरत मिलाप और भगवान श्रीराम के राज्याभिषेक से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाने हैं। शाम को सरयू तट पर सरयू महाआरती और राम की पैड़ी सहित 56 घाटों पर दीप प्रज्ज्वलन कार्यक्रम इस आयोजन के प्रमुख आकर्षण होंगे। इस वर्ष 30 लाख से अधिक दीप जलाने और 2,100 स्वदेशी ड्रोनों के माध्यम से आकाश में रामायण के प्रसंगों की प्रस्तुति की तैयारी की गई है।
अयोध्या का दीपोत्सव अब केवल दीप जलाने तक सीमित नहीं रह गया है। यह आयोजन भारत की धार्मिक विरासत, लोककलाओं और सांस्कृतिक विविधता को एक मंच पर लाने का माध्यम बन रहा है। रामायण की झांकियों से लेकर मथुरा के मयूर नृत्य और बुंदेलखंड की लोककलाओं तक, हर प्रस्तुति ने यही संदेश दिया कि भगवान श्रीराम की अयोध्या में आस्था के साथ-साथ भारतीय संस्कृति की जीवंत परंपराएं भी सांस लेती हैं।
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