श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े कथित वित्तीय और जमीन खरीद मामलों की जांच के बीच अब एक नया जमीन सौदा चर्चा में है।

UP News : श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े कथित वित्तीय और जमीन खरीद मामलों की जांच के बीच अब एक नया जमीन सौदा चर्चा में है। जांच एजेंसियां ऐसी रजिस्ट्रियों की पड़ताल कर रही हैं, जिनमें एक ही जमीन का कम समय में अलग-अलग कीमतों पर सौदा हुआ। इन्हीं मामलों में ट्रस्ट के पूर्व ट्रस्टी अनिल मिश्रा की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि दस्तावेजों के अनुसार वे एक ही दिन हुई दो अलग-अलग रजिस्ट्रियों में गवाह रहे थे। हालांकि, अब तक उनके खिलाफ इस मामले में कोई न्यायिक निष्कर्ष या दोष सिद्ध नहीं हुआ है और जांच जारी है।
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जांच में सामने आए दस्तावेजों के अनुसार, अयोध्या की कृषि भूमि (गाटा संख्या 242/1, 242/2, 243, 244 और 246) का वर्ष 2017 में लगभग 2 करोड़ रुपये में सौदा हुआ था। इसके बाद 18 मार्च 2021 को इसी भूमि के अलग-अलग हिस्सों की दो रजिस्ट्रियां एक ही दिन में की गईं। बताया जा रहा है कि एक हिस्सा श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को लगभग 80 लाख रुपये में बेचा गया, जबकि दूसरा हिस्सा उसी दिन दो निजी खरीदारों को करीब 2 करोड़ रुपये में बेचा गया। बाद में यही दूसरा हिस्सा लगभग छह महीने बाद करीब 18.5 करोड़ रुपये में ट्रस्ट को बेचे जाने का दावा किया जा रहा है। इन लेन-देन की जांच अब विशेष जांच टीम (एसआईटी) कर रही है।
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जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, 18 मार्च 2021 को हुई दोनों रजिस्ट्रियों में अनिल मिश्रा गवाह के रूप में दर्ज हैं। इसी वजह से जांच एजेंसियां यह समझने की कोशिश कर रही हैं कि क्या उन्हें इन सौदों की पूरी जानकारी थी और क्या ट्रस्ट द्वारा भूमि खरीद प्रक्रिया में सभी आवश्यक प्रक्रियाओं का पालन किया गया था। हालांकि, अभी तक किसी अदालत ने अनिल मिश्रा को इस मामले में दोषी नहीं ठहराया है। उनके खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
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विशेष जांच टीम पिछले पांच वर्षों के वित्तीय लेन-देन, दान प्रबंधन और जमीन खरीद से जुड़े मामलों की समीक्षा कर रही है। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि कहीं भूमि खरीद में बाजार मूल्य, प्रक्रिया या निर्णय लेने में किसी प्रकार की अनियमितता तो नहीं हुई। जांच एजेंसियां रजिस्ट्री दस्तावेज, भुगतान का रिकॉर्ड और संबंधित लोगों के बयान भी जुटा रही हैं। दान और वित्तीय प्रबंधन से जुड़े विवादों के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने प्रशासनिक स्तर पर कई बदलाव किए हैं। हाल ही में महासचिव और कुछ पदाधिकारियों के इस्तीफे स्वीकार किए गए तथा बैंक खातों के संचालन के लिए नई व्यवस्था लागू की गई है। साथ ही आगामी बैठक में ट्रस्ट की कार्यप्रणाली और नए पदाधिकारियों पर भी चर्चा प्रस्तावित है। अब तक यह मामला जांच के चरण में है। एसआईटी दस्तावेजों और साक्ष्यों की जांच कर रही है। जांच पूरी होने और सक्षम न्यायालय के किसी निष्कर्ष से पहले किसी भी व्यक्ति को दोषी नहीं माना जा सकता। आगे की कार्रवाई जांच रिपोर्ट और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर तय होगी।
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