
Ayodhya Ram Mandir : उत्तर प्रदेश में भगवान श्रीराम की नगरी अयोध्या में श्रीराम मंदिर लगभग बनकर तैयार हो चुका है। आगामी 22 जनवरी को प्रधानमंत्री अयोध्या के श्रीराम मंदिर का उदघाटन करेंगे और प्राण प्रतिष्ठा होगी। अयोध्या के श्रीराम मंदिर के निर्माण में यूं तो लाखों लोगों का योगदान है, लेकिन एक शख्स ऐसा भी है, जिसने आज से 33 साल पहले राम मंदिर के लिए अपना घर बाहर छोड़ दिया था और मंदिर में लगने वाले पत्थर पर पहली छेनी चलाई थी। हालांकि उस समय मंदिर का निर्माण दिल्ली दूर वाली कहावत के समान था। मामला कोर्ट में चल रहा था और कारसेवकों पर गोली चलाए जाने के साथ मंदिर आंदोलन लहूलुहान था, किंतु आंदोलन का नेतृत्व करने वाले पांव पीछे खींचने को तैयार नहीं थे।
33 साल पहले राम जन्म भूमि स्थल तक पहुंचना बेहद कठिन कार्य था। उस समय गुजरात के रहने वाले अन्नू भाई ने कुछ लोगों को अयोध्या आने और पत्थरों की गढ़ाई करने के लिए कहा तो कारीगरों ने अयोध्या के माहौल को देखते हुए आने से मना कर दिया। जिसके बाद अन्नू भाई अपने भाई और बेटे के साथ गुजरात से अयोध्या पहुंचे और फिर यहीं के होकर रह गए। जिस समय अन्नू भाई अयोध्या आए थे, उस समय उनकी उम्र 42 साल की थी। आज वह 75 साल के हो चुके हैं और अपनी आंखों से अयोध्या में भव्य और दिव्य श्रीराम मंदिर के निर्माण को पूरा होते देख रहे हैं।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, 33 साल पहले जब अन्नू भाई अपने भाई और बेटे के साथ गुजरात आए थे और मंदिर निर्माण के लिए राजस्थान से आई दो बड़े पत्थरों पर अपने हाथ से छेनी चलाकर पत्थर तराशने का काम शुरू किया था।
इसके बाद अन्नू भाई ने अपने भाई और बेटे के साथ मिलकर शिलाओं को तराशने का काम शुरू किया और किसी तरह से कुछ अन्य कारीगरों का प्रबंध किया। 6 दिसंबर 1992 को विवादित ढांचा गिराए जाने के बाद के कुछ दिन अफरा-तफरी का माहौल रहा, लेकिन कुछ ही महीनों बाद मंदिर के लिए शिलाओं की तराशी का काम फिर से तेज कर दिया गया। अन्नू भाई भी पूरे जोश के साथ अपनी भूमिका का निर्वहन करते रहे।
9 नवंबर 2019 को सुप्रीम कोर्ट का निर्णय आने तक अन्नू भाई के नेतृत्व में मंदिर के भूतल की तराशी पूरी कर ली गई थी। आज उन्हीं के ही प्रयास का फल है कि शिलान्यास के चार वर्ष बाद ही मंदिर का भूतल निर्धारित अनुकृति के अनुरूप यथास्थान संयोजित किया जा चुका है और 22 जनवरी 2024 को इसी भूतल के गर्भगृह में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की उपस्थिति में रामलला के विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा होगी।
आज मंदिर निर्माण का स्वप्न साकार होते देख अन्नू भाई बेहद हर्ष महसूस कर रहे हैं। वह कहते हैं कि यह प्रसन्नता मंदिर निर्माण का श्रेय मिलने तक ही नहीं है, अपितु करोड़ों श्रद्धालुओं के सपनों को सज्जित करने में सहायक होने की तृप्ति है। इसके लिए 75 वर्षीय अन्नू भाई चंद्रकांत भाई और विहिप नेतृत्व के भी प्रति आभार व्यक्त करते हैं, जिसने उन्हें मंदिर निर्माण के अभियान में शामिल होने का अवसर दिया। अहमदाबाद से अयोध्या आने से पूर्व अन्नू भाई शिल्पी और ठेकेदार की भूमिका में गुजरात के कुछ मंदिरों का निर्माण करा चुके थे।