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अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे और वित्तीय व्यवस्थाओं को लेकर गठित विशेष जांच दल (SIT) ने अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट लगभग तैयार कर ली है। छह दिनों तक चली गहन जांच और करीब 150 से अधिक लोगों से पूछताछ के बाद टीम कई गंभीर अनियमितताओं की ओर इशारा कर रही है।

UP News : अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े कथित अनियमितताओं की जांच के लिए गठित एसआईटी की शुरुआती पड़ताल लगभग पूरी हो चुकी है। छह दिनों तक चली गहन जांच के बाद टीम ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट को अंतिम रूप दे दिया है, जिसे सोमवार सुबह 11 बजे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपे जाने की तैयारी है। जांच के दौरान करीब 150 से अधिक लोगों से पूछताछ की गई, जिसमें कई स्तरों पर प्रशासनिक और वित्तीय व्यवस्थाओं में गंभीर खामियों के संकेत मिले हैं। सूत्रों के मुताबिक, जांच के दौरान ट्रस्ट से जुड़े वरिष्ठ पदाधिकारियों के बीच जिम्मेदारी को लेकर असहमति और आरोप-प्रत्यारोप की स्थिति भी सामने आई। वहीं कुछ अहम रिकॉर्ड और निगरानी से जुड़े दस्तावेजों में गड़बड़ियां मिलने की बात ने जांच को और संवेदनशील बना दिया है। इसके अलावा, कुछ सीसीटीवी रिकॉर्डिंग से जुड़े हिस्सों के उपलब्ध न होने और चढ़ावे से जुड़े सोना-चांदी के हिसाब-किताब में असंगतियों ने भी सवाल खड़े किए हैं। जांच रिपोर्ट से पहले ही निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र द्वारा उठाए गए सवालों ने मामले को और गंभीर बना दिया है, जिससे प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। UP News
अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित अनियमितताओं का मामला सबसे पहले राजनीतिक हलकों में उस समय चर्चा में आया, जब समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने सार्वजनिक रूप से गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर दावा किया कि मंदिर के चढ़ावे की करोड़ों रुपये की राशि को लेकर अनियमितताएं सामने आई हैं और इस मामले में न्यायिक संज्ञान लेने की आवश्यकता है। इन आरोपों के बाद मामला तेजी से राजनीतिक रंग लेने लगा। ट्रस्ट की ओर से आरोपों का खंडन किया गया, लेकिन विस्तृत और स्पष्ट जवाब न आने से सवाल और गहराते चले गए। इसके बाद विपक्षी दलों के अन्य नेताओं, जिनमें आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह और कांग्रेस के प्रतिनिधि शामिल रहे, ने भी इस मुद्दे को उठाते हुए पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए। UP News
अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित अनियमितताओं का विवाद उस समय और अधिक गहरा गया, जब पूर्व लेखा प्रभारी महिपाल सिंह ने सार्वजनिक रूप से गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि चढ़ावे की गणना प्रक्रिया में लंबे समय से गड़बड़ियां चल रही थीं और उन्होंने स्वयं कुछ मामलों में वित्तीय अनियमितता की पहचान की थी। महिपाल सिंह के अनुसार, उन्होंने संबंधित अधिकारियों को इस बारे में जानकारी भी दी थी, लेकिन इसके बाद परिस्थितियां बदल गईं और उन्हें व्यवस्था से अलग कर दिया गया। इसी दौरान रिकॉर्ड और निगरानी प्रणाली से जुड़े कुछ पहलुओं पर भी सवाल उठने लगे, जिससे मामला और संवेदनशील हो गया।विवाद और लगातार सामने आ रहे आरोपों के बीच मामला जब मीडिया और राजनीतिक हलकों में तेजी से तूल पकड़ने लगा, तो उच्च स्तर पर हस्तक्षेप की स्थिति बनी। इसके बाद निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा अयोध्या पहुंचे और उन्होंने व्यवस्था तथा रिकॉर्ड से जुड़े विभिन्न पहलुओं की समीक्षा की। सूत्रों के मुताबिक, उन्होंने संबंधित व्यवस्थाओं को समझने और स्थिति का आकलन करने की कोशिश की, जिसके बाद मामला और अधिक चर्चा में आ गया। उनके दौरे के बाद प्रशासनिक और ट्रस्ट स्तर पर निगरानी और जवाबदेही को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। UP News
अयोध्या स्थित राम मंदिर से जुड़े चढ़ावे और व्यवस्थागत विवाद ने उस समय नया मोड़ ले लिया जब राम मंदिर आंदोलन से जुड़े प्रमुख चेहरों और संत समाज ने खुलकर सवाल उठाने शुरू कर दिए। पूर्व सांसद और आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल विनय कटियार ने ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर गंभीर आपत्तियां जताते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की, जिससे मामला और अधिक संवेदनशील हो गया। इसके बाद संत समाज के कई प्रभावशाली चेहरों ने भी इस विवाद में खुलकर प्रतिक्रिया दी और ट्रस्ट की व्यवस्था पर सवाल उठाए। लगातार बढ़ते दबाव के बीच ट्रस्ट को स्थिति संभालने के लिए आंतरिक स्तर पर कदम उठाने पड़े और जांच की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की दिशा में निर्णय लिया गया। इस पूरे घटनाक्रम ने ट्रस्ट की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता को लेकर एक व्यापक बहस छेड़ दी है। संतों और आंदोलन से जुड़े लोगों की लगातार उठती आवाज़ों ने इस मामले को अब एक साधारण विवाद से आगे बढ़ाकर गंभीर सार्वजनिक मुद्दे का रूप दे दिया है, जहां हर बयान और हर प्रतिक्रिया पर निगाहें टिकी हुई हैं। UP News
अयोध्या स्थित राम मंदिर से जुड़े चढ़ावे और व्यवस्थागत अनियमितताओं के आरोपों ने जब तूल पकड़ लिया और संत समाज, राम भक्तों के साथ-साथ पूर्व सांसद विनय कटियार ने भी इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाया, तो मामला तेजी से गंभीर स्थिति में पहुंच गया। लगातार बढ़ते दबाव और सार्वजनिक सवालों के बीच प्रशासनिक स्तर पर उच्च स्तरीय हस्तक्षेप की आवश्यकता महसूस की गई। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया, जिसे पूरे मामले की विस्तृत जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई। इस टीम में लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत के साथ आईजी लखनऊ रेंज किरन एस. और विशेष सचिव वित्त नील रतन को शामिल किया गया। जांच दल को निर्धारित समयसीमा के तहत कार्य पूरा करने का निर्देश दिया गया, जिसमें सात दिनों के भीतर प्रारंभिक रिपोर्ट और 15 दिनों में अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत करनी थी। इसके बाद 15 जून को एसआईटी की टीम अयोध्या पहुंची और औपचारिक रूप से जांच प्रक्रिया की शुरुआत की गई। UP News
अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे और व्यवस्थागत अनियमितताओं की जांच के लिए पहुंची एसआईटी ने शुरुआत सीधे ट्रस्ट के शीर्ष स्तर से की। टीम ने सबसे पहले महासचिव चंपत राय से विस्तृत जानकारी ली और गणना कक्ष में मौजूद पूरी व्यवस्था का निरीक्षण किया। इस दौरान कर्मचारियों की कार्यप्रणाली, रिकॉर्ड रखने की प्रक्रिया और अभिलेखों के रखरखाव की गहन जांच की गई, साथ ही कई महत्वपूर्ण दस्तावेजों को अपने कब्जे में लिया गया। इसके बाद जांच टीम ने चरणबद्ध तरीके से कर्मचारियों की सूची तैयार कर पूछताछ शुरू की, जिसमें कई लोगों से व्यक्तिगत रूप से बयान दर्ज किए गए। ट्रस्ट से जुड़े चंपत राय के करीबी माने जाने वाले टिल्लू यादव से भी लगातार दो दिनों तक पूछताछ की गई, जिसमें वित्तीय लेन-देन और संपत्ति से जुड़े पहलुओं पर सवाल किए गए। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, एसआईटी को विभिन्न स्तरों पर अनियमितताओं के संकेत मिलने लगे, जिसके बाद जांच का दायरा और विस्तृत कर दिया गया। अब जांच केवल चढ़ावे तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें आपूर्ति व्यवस्था, निर्माण कार्यों में खर्च की गई धनराशि और भूमि से जुड़े लेन-देन को भी शामिल कर लिया गया। इसके बाद आपूर्तिकर्ताओं और ठेकेदारों को भी तलब कर उनसे संबंधित दस्तावेजों की जांच की गई। जांच के अंतिम चरण में ट्रस्ट के तीन प्रमुख पदाधिकारियों चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ की गई, जहां कथित तौर पर जिम्मेदारी को लेकर एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप की स्थिति भी देखने को मिली। UP News
अयोध्या स्थित राम मंदिर से जुड़े चढ़ावे और व्यवस्थागत अनियमितताओं की जांच के बीच निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा के बयानों ने पूरे मामले को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। उन्होंने एक सार्वजनिक मंच पर चढ़ावे से जुड़ी अनियमितताओं को गंभीर बताते हुए व्यवस्था में खामियों की ओर इशारा किया, जिससे यह विवाद और तेज हो गया। हालांकि उन्होंने ट्रस्ट के कुछ पदाधिकारियों पर सीधे आरोप लगाने से बचते हुए अलग-अलग स्तर पर जिम्मेदारी के सवाल उठाए, लेकिन उनके बयानों ने प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में नई चर्चा शुरू कर दी है। विभिन्न मंचों पर दिए गए उनके इंटरव्यू के बाद मामला केवल जांच तक सीमित न रहकर व्यापक बहस का विषय बन गया है। अब पूरा मामला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आगामी निर्णय पर केंद्रित हो गया है। माना जा रहा है कि प्रारंभिक जांच रिपोर्ट मिलने के बाद सरकार इस पूरे प्रकरण पर बड़ा प्रशासनिक फैसला ले सकती है। दो दिन पहले मुख्यमंत्री स्वयं अयोध्या पहुंचे थे, जहां उन्होंने सार्वजनिक रूप से संयम बनाए रखने और किसी भी प्रकार की बयानबाजी से बचने की अपील की थी। उन्होंने यह भी संकेत दिया था कि जांच पूरी होने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी और उसी के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। UP News
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