अयोध्या में श्रीराम मंदिर की जमीन को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका पर 2 नवंबर 2026 को बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। आखिर जिस जमीन पर भव्य राम मंदिर का निर्माण हुआ है, क्या वह वही भूमि है जिसे सुप्रीम कोर्ट ने 9 नवंबर 2019 के ऐतिहासिक फैसले में रामलला विराजमान को सौंपने का आदेश दिया था ?

UP News : अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर के निर्माण को लेकर एक बार फिर कानूनी और संवैधानिक बहस चर्चा में आ गई है। राम मंदिर जिस जमीन पर बनाया गया है, क्या वह वही जमीन है जिसे सुप्रीम कोर्ट ने 9 नवंबर 2019 के ऐतिहासिक फैसले में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण के लिए सौंपने का रास्ता साफ किया था? इसी सवाल की जांच कराने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी। हालांकि, 2 नवंबर 2026 को सामने आई खबर के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। UP News
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यह याचिका श्री राम जन्मभूमि केस ट्रस्ट की ओर से दाखिल की गई थी। याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की थी कि इस मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए एक स्वतंत्र समिति अथवा आयोग का गठन किया जाए।
इस आयोग में निम्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों को शामिल करने की मांग की गई थी:
याचिका में मांग की गई थी कि विशेषज्ञों की टीम वर्ष 2019 के फैसले में निर्धारित जमीन की वास्तविक सीमाओं, क्षेत्रफल, भौगोलिक निर्देशांकों और स्थान का परीक्षण करे। इसके बाद यह स्पष्ट किया जाए कि वर्तमान में निर्मित राम मंदिर उसी जमीन पर स्थित है या नहीं, जिसका उल्लेख सुप्रीम कोर्ट के फैसले में किया गया था। याचिकाकर्ता ने यह भी मांग की थी कि मंदिर परिसर से जुड़े मूल दस्तावेज, नक्शे, निर्माण योजनाएं, सर्वे रिपोर्ट और राजस्व अभिलेख सुरक्षित रखे जाएं तथा जरूरत पड़ने पर अदालत के सामने प्रस्तुत किए जाएं। UP News
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अयोध्या का राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद देश के सबसे लंबे समय तक चले कानूनी विवादों में शामिल रहा है। इस मामले में 9 नवंबर 2019 को तत्कालीन पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने सर्वसम्मति से ऐतिहासिक फैसला सुनाया था। सुप्रीम कोर्ट ने विवादित 2.77 एकड़ जमीन रामलला विराजमान के पक्ष में देते हुए वहां मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट बनाने का निर्देश दिया था। साथ ही केंद्र सरकार को सुन्नी वक्फ बोर्ड को अयोध्या में किसी प्रमुख स्थान पर मस्जिद निर्माण के लिए पांच एकड़ वैकल्पिक जमीन उपलब्ध कराने का आदेश दिया था। इसके बाद 5 अगस्त 2020 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में राम मंदिर का भूमि पूजन हुआ। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की देखरेख में मंदिर निर्माण शुरू हुआ और 22 जनवरी 2024 को रामलला के बाल स्वरूप की प्राण प्रतिष्ठा की गई। इस समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुख्य यजमान के रूप में शामिल हुए थे। UP News
इस याचिका में केवल मंदिर की जमीन के सीमांकन की मांग ही नहीं की गई थी, बल्कि श्रद्धालुओं की सुविधाओं और मंदिर में आने वाले चढ़ावे के प्रबंधन से जुड़े मुद्दे भी उठाए गए थे। याचिकाकर्ता ने मंदिर में आने वाले दान, चढ़ावे और प्राप्तियों का प्रतिदिन डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने तथा उसे सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करने की मांग की थी। इसके अलावा मंदिर के खातों का प्रतिवर्ष नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) से ऑडिट कराने का अनुरोध भी किया गया था। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए उनके लिए अतिरिक्त सुविधाएं विकसित करने की मांग भी याचिका का हिस्सा थी। UP News
इस याचिका का महत्व इसलिए भी है क्योंकि इसमें वर्ष 2019 के ऐतिहासिक फैसले के क्रियान्वयन से जुड़े भूमि अभिलेखों और सीमांकन की आधिकारिक पुष्टि कराने की मांग की गई थी।.हालांकि, सुप्रीम कोर्ट द्वारा याचिका पर सुनवाई से इनकार किए जाने का अर्थ यह नहीं है कि अदालत ने मंदिर की जमीन को लेकर कोई नई जांच की या मंदिर के स्थान पर कोई प्रतिकूल निष्कर्ष दिया है। फिलहाल उपलब्ध रिपोर्ट में अदालत के इनकार का विस्तृत कारण भी स्पष्ट नहीं किया गया है। इसलिए इस घटनाक्रम को याचिका पर सुनवाई से इनकार के रूप में ही देखा जाना चाहिए। अयोध्या में राम मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। ऐसे में मंदिर की जमीन से जुड़े इस नए कानूनी घटनाक्रम ने एक बार फिर 2019 के ऐतिहासिक फैसले और उसके क्रियान्वयन को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। UP News
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