इस अवसर पर राष्ट्रपति रजत प्लेट पर स्वर्णांकित ‘राम’ नाम की पट्टिका की भी स्थापना कराएंगी। ट्रस्ट पदाधिकारियों के मुताबिक यह पट्टिका लगभग साढ़े तीन फीट लंबी है और इसके मध्य में सोने के अक्षरों में ‘राम’ नाम अंकित है।

UP News : वासंतिक नवरात्र शुरू होने से पहले उत्तर प्रदेश की धार्मिक राजधानी अयोध्या एक और बड़े आध्यात्मिक आयोजन की तैयारी में जुट गई है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के 19 मार्च को प्रस्तावित अयोध्या दौरे का कार्यक्रम मिल गया है। तय कार्यक्रम के अनुसार राष्ट्रपति करीब डेढ़ घंटे तक श्रीराम मंदिर परिसर में रुकेंगी और मंदिर के दूसरे तल पर आकार ले रहे राम नाम मंदिर से जुड़े विशेष पूजन अनुष्ठान में भाग लेंगी। माना जा रहा है कि यह दौरा न सिर्फ मंदिर के धार्मिक आयोजनों को नई गरिमा देगा, बल्कि नवरात्र से पहले अयोध्या के आध्यात्मिक वातावरण को भी और अधिक ऊर्जा से भर देगा।
ट्रस्ट के अनुसार 19 मार्च को पूर्वाह्न 11 बजे राम नाम मंदिर में श्रीराम यंत्र स्थापना का पूजन निर्धारित है। बताया गया है कि यह यंत्र कांची शंकराचार्य स्वामी विजयेन्द्र सरस्वती द्वारा पूजित रहा है। इसी अनुष्ठान में राष्ट्रपति मुर्मु यजमान के रूप में शामिल होंगी। इस अवसर पर राष्ट्रपति रजत प्लेट पर स्वर्णांकित ‘राम’ नाम की पट्टिका की भी स्थापना कराएंगी। ट्रस्ट पदाधिकारियों के मुताबिक यह पट्टिका लगभग साढ़े तीन फीट लंबी है और इसके मध्य में सोने के अक्षरों में ‘राम’ नाम अंकित है। जानकारी के अनुसार यह पट्टिका मुंबई में तैयार की गई थी और अब अयोध्या पहुंच चुकी है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के कोषाध्यक्ष महंत गोविंद देव गिरि के मुताबिक सनातन उपासना परंपरा में साकार और निराकार ब्रह्म दोनों की कल्पना मिलती है। उन्होंने गोस्वामी तुलसीदास द्वारा राम नाम की महिमा का उल्लेख करते हुए कहा कि निराकार ब्रह्म के उपासक निर्गुण संत कहलाते हैं और संत कबीरदास इसी परंपरा के प्रमुख संत थे। इसी भावभूमि में राम नाम मंदिर की स्थापना की जा रही है।
राम मंदिर के दूसरे तल पर “ग्रंथागार” बनाए जाने की चर्चाओं पर ट्रस्ट ने स्पष्ट किया है कि यहां लाइब्रेरी की तरह ग्रंथागार नहीं बनेगा। महंत गिरि के अनुसार योजना प्राचीन काल की हस्तलिखित दुर्लभ पांडुलिपियों को संरक्षित करने की है। उन्होंने बताया कि कई लोग पांडुलिपियों के संरक्षण के लिए संपर्क कर रहे हैं, लेकिन पहले विशेषज्ञों की टीम यह जांच करेगी कि संबंधित पांडुलिपि दुर्लभ श्रेणी में आती है या नहीं। इसके लिए विशेषज्ञों के नाम अंतिम रूप दे दिए गए हैं। जहां-जहां से प्राचीन पांडुलिपियों की सूचना मिलेगी, पहले विवरण जुटाया जाएगा, फिर जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ स्थल पर जाकर प्राचीनता का परीक्षण करेंगे। अनुशंसा के बाद ही पांडुलिपियों को राम मंदिर में संरक्षित किए जाने पर निर्णय होगा। महंत गोविंद देव गिरि ने यह भी बताया कि पहले राष्ट्रपति के हाथों परकोटे के मंदिरों में ध्वजारोहण की योजना थी, लेकिन राष्ट्रपति के निर्धारित समय-सीमा को देखते हुए इसे स्थगित कर दिया गया है। उनके अनुसार तय शेड्यूल में ध्वजारोहण के लिए पर्याप्त समय नहीं बच रहा था, इसलिए योजना को फिलहाल ड्रॉप किया गया है।
ट्रस्ट के मुताबिक राम नाम मंदिर में स्थापना-पूजन के दौरान राष्ट्रपति के साथ कई प्रतिष्ठित व्यक्तियों को भी आमंत्रित किया गया है। इनमें आरएसएस के सर कार्यवाह दत्तात्रेय होसबले, कर्नाटक धर्मस्थल मंदिर के धर्माधिकारी पद्मभूषण वीरेंद्र हेगड़े और केरल की आध्यात्मिक गुरु माता अमृतानंदमयी देवी (अम्मा) शामिल हैं। UP News