पीलीभीत में आयुष्मान योजना के पोर्टल से जुड़ी बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। एक पारिवारिक आईडी पर 52 कार्ड मिलने के बाद करीब 1480 संदिग्ध कार्ड जांच के दायरे में आए हैं। स्वास्थ्य विभाग अब दस्तावेजों का सत्यापन कर रहा है।

UP News : उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले में प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (आयुष्मान भारत) के तहत बनाए गए कार्डों को लेकर बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। बीसलपुर तहसील के मीरपुर वाहनपुर गांव में एक ही पारिवारिक आईडी पर 52 आयुष्मान कार्ड बनने का मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया। प्रारंभिक जांच आगे बढ़ी तो जिले में करीब 1,480 संदिग्ध आयुष्मान कार्ड सामने आए हैं। जांच में कई ऐसे मामले मिले हैं, जिनमें एक ही पारिवारिक आईडी पर 20 से लेकर 60 तक सदस्यों के नाम दर्ज बताए गए हैं। इन मामलों को लेकर शासन स्तर से सत्यापन के निर्देश दिए गए हैं। इसके बाद जिला मुख्यालय की आयुष्मान टीम ने संदिग्ध कार्डों की जांच शुरू कर दी है और संबंधित लोगों से दस्तावेज मांगे जा रहे हैं।

मामले की शुरुआत बीसलपुर तहसील के मीरपुर वाहनपुर गांव निवासी हुसनारा पत्नी मोहम्मद शोएब के परिवार से हुई। जांच के दौरान पारिवारिक आईडी संख्या 215040637088 पर 52 सदस्य जुड़े पाए गए। इनमें 33 महिलाएं और 19 पुरुष बताए गए हैं। रिकॉर्ड में सदस्यों की जन्मतिथियां अलग-अलग हैं, जबकि अभिभावक का विवरण एक ही पाया गया। इस मामले को विभाग की जांच में फ्रॉड के तौर पर चिन्हित किया गया है। इसके बाद अधिकारियों ने इसी तरह के अन्य मामलों की भी पड़ताल शुरू की। एक मामले की जांच के बाद जब जिले के रिकॉर्ड की पड़ताल की गई तो बड़ी संख्या में संदिग्ध कार्ड सामने आए। शासन स्तर से उपलब्ध कराई गई सूचना के आधार पर जिले में करीब 1,480 ऐसे आयुष्मान कार्ड चिन्हित किए गए हैं, जिनमें परिवार के सदस्यों की संख्या सामान्य से काफी अधिक दर्ज है। अब जिला स्तर की टीम इन कार्डों का सत्यापन कर रही है। संबंधित लाभार्थियों को बुलाकर उनके परिवार और दस्तावेजों से जुड़ी जानकारी मांगी जा रही है। टीम यह भी जांच रही है कि संबंधित परिवार के राशन कार्ड में वास्तव में कितनी यूनिट दर्ज हैं।
दरअसल, आयुष्मान भारत योजना के तहत पहले पोर्टल पर जनसुविधा केंद्रों समेत कई स्तरों पर लोगों को लाभार्थियों के आयुष्मान कार्ड बनाने की सुविधा दी गई थी। इसी व्यवस्था के दौरान पारिवारिक आईडी में सदस्यों को जोड़कर कार्ड बनाए जाने की शिकायतें सामने आई थीं। प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में इस तरह के मामले सामने आने के बाद शासन ने व्यवस्था में बदलाव किया। इसके बाद आयुष्मान पोर्टल की निगरानी जिला मुख्यालय के साथ-साथ नेशनल हेल्थ अथॉरिटी के स्तर से भी की जाने लगी।
अगस्त तक पीलीभीत जिले में 2,46,973 लाभार्थी परिवारों के 11,89,627 लाभार्थी दर्ज बताए गए हैं। इनमें से 8,56,758 लाभार्थियों के गोल्डन कार्ड बनाए जा चुके हैं। अब सामने आए संदिग्ध मामलों की जांच के लिए सीएमओ डॉ. बीसी पंत और आयुष्मान टीम सक्रिय है। टीम दस्तावेजों और उपलब्ध रिकॉर्ड का मिलान कर रही है। सत्यापन पूरा होने के बाद तैयार रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि एक ही पारिवारिक आईडी पर इतनी बड़ी संख्या में सदस्यों के नाम किस प्रक्रिया के तहत जुड़े और उनके आयुष्मान कार्ड कैसे जारी हुए। जांच पूरी होने के बाद ही इस गड़बड़ी की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी। UP News :
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