23 महीने बाद वापसी, क्या सपा की साइकिल पर फिर सवार होंगे आजम खान?
भारत
चेतना मंच
01 Dec 2025 10:18 PM
समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता और रामपुर की सियासत का मजबूत चेहरा माने जाने वाले आजम खान आखिरकार 23 महीने बाद सीतापुर जेल से रिहा हो गए हैं। उनके जेल से बाहर आने के साथ ही उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। सवाल उठ रहा है कि क्या आजम की वापसी से रामपुर की गुम होती सियासत में फिर से जान आएगी? और सबसे अहम बात क्या अखिलेश यादव और आजम खान की सियासी केमिस्ट्री अब भी पहले जैसी रहेगी? UP News
23 महीने की कैद और 100 से ज्यादा मुकदमे
आजम खान पर पिछले कुछ वर्षों में 90 से ज़्यादा मुकदमे दर्ज हुए जिनमें से अधिकांश जौहर यूनिवर्सिटी, शत्रु संपत्ति और सरकारी जमीन से जुड़े मामले हैं। उनके बेटे अब्दुल्ला आजम को दो जन्म प्रमाण पत्र मामले में सजा मिलने के बाद परिवार के तीनों सदस्य आजम, अब्दुल्ला और तंजीम फातिमा जेल में थे। अब जबकि तीनों को जमानत मिल चुकी है सवाल सिर्फ कानूनी राहत का नहीं बल्कि सियासी वापसी का भी है।
कभी आजम के इशारों पर चलती थी रामपुर की सियासत
रामपुर में कभी आजम खान की तूती बोलती थी। वह खुद विधायक थे बेटा अब्दुल्ला एक और सीट से विधायक और पत्नी तंजीम फातिमा सांसद। लेकिन आज की तस्वीर बिल्कुल अलग है। रामपुर विधानसभा सीट अब बीजेपी के कब्जे में है। स्वार सीट पर अपना दल (एस) का विधायक है। सपा के सांसद मोहिबुल्लाह नदवी आज़म के विरोधी खेमे के माने जाते हैं। ऐसे में आजम की वापसी से रामपुर में सपा के पुराने चेहरे फिर से सक्रिय हो सकते हैं जिससे नदवी की पकड़ कमजोर पड़ सकती है।
अखिलेश यादव से दूरी
आजम खान के जेल में रहने के दौरान अखिलेश यादव मुश्किल से एक या दो बार ही मिलने पहुंचे। न तो सपा ने कोई बड़ा आंदोलन किया, न ही सार्वजनिक रूप से उनके समर्थन में बड़ा बयान दिया गया। इस दौरान आजम के समर्थकों ने कई बार यह संदेश देने की कोशिश की कि आजम अखिलेश से नाराज हैं। खुद आजम खान ने एक पत्र के जरिए सपा और INDIA गठबंधन पर मुसलमानों की अनदेखी का आरोप भी लगाया था। हाल ही में आजाद समाज पार्टी के नेता चंद्रशेखर आजाद ने आम से कई बार जेल में मुलाकात की जिससे सियासी समीकरणों की अटकलें तेज हो गई हैं। क्या चंद्रशेखर, आजम के सहारे पश्चिमी यूपी में दलित-मुस्लिम गठजोड़ की राजनीति को मजबूत करेंगे?
यह सवाल सबसे अहम है। क्या आज़म खान सपा का साथ छोड़कर नई राजनीतिक राह चुनेंगे? हालांकि, आजम को करीब से जानने वाले यह दावा करते हैं कि वो सपा से अलग नहीं होंगे। वे प्रेशर पॉलिटिक्स के माहिर खिलाड़ी हैं वे पार्टी पर दबाव बनाते हैं लेकिन अंत में संगठन का हिस्सा बने रहते हैं। इससे पहले भी जब वह 27 महीने जेल में रहे थे, तब भी सपा से नाराजगी की खबरें थीं लेकिन रिहाई के बाद अखिलेश ने उन्हें मना लिया था।
क्या बदल जाएगा यूपी का सियासी नक्शा?
आजम खान की रिहाई के बाद यूपी की राजनीति में कई बदलाव संभावित हैं। रामपुर और आसपास के जिलों में सपा को फिर से संजीवनी मिल सकती है। आजम की सक्रियता से सपा संगठन में पुराने धड़े को बल मिलेगा। अखिलेश और आजम के रिश्तों की दिशा, सपा की आगे की रणनीति तय करेगी। चंद्रशेखर और ओवैसी जैसे नेताओं के लिए आजम की भूमिका किंगमेकर जैसी हो सकती है। UP News