प्रदेश की राजनीति में समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं। इस बार वजह है रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी की 38 इमारतों को गिराने का आदेश।

UP News : उत्तर प्रदेश की राजनीति में समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं। इस बार वजह है रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी की 38 इमारतों को गिराने का आदेश। रामपुर विकास प्राधिकरण (RDA) का कहना है कि इन भवनों का निर्माण स्वीकृत नक्शे के बिना किया गया, जबकि ट्रस्ट इस कार्रवाई का विरोध कर रहा है। इस विवाद ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि जेल में होने के बावजूद आजम खान हर चुनाव से पहले राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा क्यों बन जाते हैं।
UP News
रामपुर विकास प्राधिकरण ने उत्तर प्रदेश शहरी नियोजन एवं विकास अधिनियम के तहत कार्रवाई करते हुए 38 इमारतों को अवैध निर्माण मानते हुए ध्वस्तीकरण का आदेश दिया है। प्राधिकरण के अनुसार, विश्वविद्यालय परिसर में केवल मेडिकल कॉलेज और अकादमिक ब्लॉक के भवनों के नक्शे ही स्वीकृत थे, जबकि अन्य निर्माणों के लिए आवश्यक अनुमति नहीं ली गई थी। विश्वविद्यालय की ओर से जवाब भी दाखिल किया गया, लेकिन प्राधिकरण ने उसे स्वीकार नहीं किया।
UP News
आजम खान का राजनीतिक प्रभाव लंबे समय तक रामपुर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में मजबूत रहा है। पिछले कई चुनावों में उनके बयान, कानूनी मामले या उनके खिलाफ हुई कार्रवाई चुनावी विमर्श का हिस्सा बनती रही है।
UP News
आजम खान 1980 से रामपुर की राजनीति का बड़ा चेहरा रहे हैं। वे दस बार विधायक और दो बार लोकसभा सांसद रह चुके हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भले ही उनका संगठनात्मक प्रभाव पहले जैसा न हो, लेकिन रामपुर और आसपास के कई विधानसभा क्षेत्रों में उनका प्रभाव अब भी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। यही कारण है कि उनके खिलाफ होने वाली बड़ी कार्रवाई राजनीतिक बहस का विषय बन जाती है।
UP News
आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम को दोहरे पैन कार्ड से जुड़े मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद जेल भेजा गया था। इसके अलावा उनके खिलाफ भूमि, ट्रस्ट, जौहर यूनिवर्सिटी और अन्य मामलों से जुड़े कई मुकदमे भी विभिन्न अदालतों में लंबित हैं।
UP News
जौहर यूनिवर्सिटी पर कार्रवाई को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने हैं। सरकार का कहना है कि यह पूरी तरह अवैध निर्माण और भवन मानचित्र से जुड़े नियमों के उल्लंघन का मामला है तथा कानून सभी पर समान रूप से लागू होगा। वहीं समाजवादी पार्टी इसे राजनीतिक कार्रवाई बताते हुए सरकार पर निशाना साध रही है। इस मुद्दे के आगामी विधानसभा चुनाव से पहले भी राजनीतिक रूप से गूंजने की संभावना जताई जा रही है।
UP News
जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े भूमि, निर्माण और प्रशासनिक मामलों पर पहले भी उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय में सुनवाई हो चुकी है। मौजूदा ध्वस्तीकरण आदेश के खिलाफ भी ट्रस्ट के पास अदालत में चुनौती देने का विकल्प उपलब्ध है। ऐसे में इस मामले का अंतिम परिणाम न्यायिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगा। UP News
विज्ञापन