खिर कमरे के अंदर ऐसा क्या हुआ था? पुलिस को कब और क्यों जवाबी कार्रवाई करनी पड़ी? आठ घंटे तक चले इस बंधक संकट का अंत कैसे हुआ और आरोपी का क्या अंजाम हुआ? आजमगढ़ की इस खौफनाक वारदात की पूरी कहानी जानने के लिए पढ़िए पूरी खबर।

UP News : उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में मंगलवार शाम शुरू हुआ खूनी घटनाक्रम बुधवार तड़के करीब आठ घंटे बाद खत्म हुआ। अहरौला थाना क्षेत्र के शंभूपुर गांव में एक व्यक्ति ने घर में चल रहे पूजा-अनुष्ठान के दौरान अपनी पत्नी और दो पुजारियों की गोली मारकर हत्या कर दी। इसके बाद वह अपने बच्चों को लेकर कमरे में बंद हो गया और पुलिस के सामने एक गंभीर बंधक संकट खड़ा हो गया। करीब सात घंटे तक पुलिस ने बातचीत और समझाइश के जरिए उसे आत्मसमर्पण के लिए मनाने की कोशिश की। हालात बिगड़ने पर स्टन ग्रेनेड और टियर गैस का इस्तेमाल किया गया। अंदर से फायरिंग के बाद पुलिस की जवाबी कार्रवाई में आरोपी अरविंद सिंह घायल हुआ और बाद में उसकी मौत हो गई। UP News
पुलिस और मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक शंभूपुर गांव स्थित अरविंद सिंह के घर में पिछले कुछ दिनों से पूजा-अनुष्ठान चल रहा था। परिवार में एक पुराने विवाद/मृत्यु से जुड़ी शांति के लिए यह अनुष्ठान कराए जाने की बात सामने आई है। मंगलवार शाम अरविंद घर पहुंचा तो वहां पूजा चल रही थी। इसी दौरान उसका पुजारियों से विवाद हो गया। रिपोर्टों में बताया गया है कि उसने पुजारियों से पहचान संबंधी दस्तावेज, यहां तक कि आधार कार्ड दिखाने को कहा। बहस बढ़ने के बाद उसने कथित तौर पर लाइसेंसी हथियार से फायरिंग कर दी। गोलीबारी में उसकी पत्नी बबीता और दो पुजारी महेंद्र पाठक तथा अखिलेश मिश्रा की मौत हो गई। बताया गया है कि पूजा में मौजूद कुछ अन्य लोग मौके से बाहर निकलकर अपनी जान बचाने में सफल रहे। UP News
तीन लोगों की हत्या के बाद अरविंद अपने बच्चों के साथ घर के एक कमरे में बंद हो गया। पुलिस के पहुंचने तक स्थिति बेहद संवेदनशील हो चुकी थी, क्योंकि आरोपी के पास हथियार था और कमरे के अंदर बच्चे मौजूद थे। रिपोर्टों के अनुसार पुलिस ने तत्काल इलाके को घेर लिया। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ अन्य सुरक्षा टीमों को भी मौके पर बुलाया गया। बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालना पुलिस की पहली प्राथमिकता बनी रही। UP News
आजमगढ़ पुलिस और प्रशासन ने जल्दबाजी में कार्रवाई करने के बजाय काफी देर तक बातचीत के जरिए संकट खत्म करने की कोशिश की। अधिकारियों, रिश्तेदारों और परिवार के लोगों ने अरविंद को आत्मसमर्पण करने तथा बच्चों को बाहर भेजने के लिए समझाया। लेकिन आरोपी कमरे से बाहर आने और बच्चों को छोड़ने के लिए तैयार नहीं हुआ। करीब सात घंटे तक यह गतिरोध चलता रहा। इस दौरान गांव में भारी पुलिस बल तैनात रहा और वरिष्ठ अधिकारी मौके पर मौजूद रहे। UP News
काफी देर तक बातचीत चलने के बाद कमरे के अंदर से अचानक गोली चलने की आवाज आई। इसके बाद पुलिस को आशंका हुई कि बच्चों की जान तत्काल खतरे में है। यहीं से बातचीत के जरिए संकट खत्म करने की कोशिश की जगह बचाव अभियान शुरू करने का फैसला किया गया। रिपोर्टों के अनुसार पुलिस/कमांडो टीम ने स्टन ग्रेनेड और टियर गैस का इस्तेमाल किया और कमरे में प्रवेश करने की कार्रवाई शुरू की। UP News
कमरे में प्रवेश के दौरान आरोपी ने पुलिस टीम पर कथित तौर पर फायरिंग की। पुलिस ने जवाबी फायरिंग की, जिसमें अरविंद घायल हो गया। रिपोर्टों में यह भी सामने आया है कि ऑपरेशन में एटीएस कमांडो टीम की मदद ली गई थी। करीब आधी रात के बाद कमांडो टीम मौके पर पहुंची और बच्चों को सुरक्षित निकालने के लिए अंतिम कार्रवाई की गई। UP News
बंधक संकट के दौरान बच्चों की स्थिति भी बेहद गंभीर हो गई थी। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार आरोपी का एक बेटा गोली लगने से गंभीर रूप से घायल हुआ और बाद में उसकी मौत हो गई। वहीं उसकी दो बेटियों को ऑपरेशन के दौरान सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। इस तरह इस पूरे घटनाक्रम में आरोपी सहित पांच लोगों की मौत की पुष्टि विभिन्न रिपोर्टों में हुई है आरोपी अरविंद, उसकी पत्नी और दो पुजारी तथा उसका बेटा। बच्चों में दो बेटियों को बचा लिया गया। UP News
वाराणसी जोन के एडीजी नवीन अरोड़ा के हवाले से रिपोर्टों में बताया गया है कि पुलिस ने काफी समय तक संयम बनाए रखा और बातचीत के जरिए बच्चों को बचाने की कोशिश की। लेकिन जब अंदर से फायरिंग हुई और बच्चों की सुरक्षा तत्काल खतरे में दिखाई दी, तब कमांडो टीम ने कार्रवाई की। पुलिस के अनुसार ऑपरेशन में किसी पुलिसकर्मी के गोली लगने की सूचना नहीं है। आरोपी को घायल अवस्था में अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी मौत हो गई। UP News
करीब आठ घंटे चले इस पूरे घटनाक्रम के दौरान शंभूपुर गांव में भारी पुलिस बल तैनात रहा। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौके पर मौजूद रहे। एटीएस कमांडो और स्थानीय पुलिस की टीमों ने घर को घेरकर ऑपरेशन को अंजाम दिया। घटना के बाद पुलिस और फोरेंसिक टीमों ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए तथा मृतकों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। मामले की जांच जारी है। UP News
एक तरफ घर के अंदर पूजा के दौरान तीन लोगों की हत्या और उसके बाद बच्चों को बंधक बनाए जाने की घटना ने पूरे इलाके को हिला दिया, तो दूसरी तरफ करीब सात घंटे तक चले पुलिस ऑपरेशन ने इस बात को भी सामने रखा कि बंधक स्थिति में पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती आरोपी को पकड़ना नहीं, बल्कि अंदर मौजूद बच्चों की जान बचाना थी। फिलहाल पुलिस घटना की पूरी परिस्थितियों, गोलीबारी की शुरुआत, हथियार के इस्तेमाल और परिवार में चल रहे विवाद की कड़ियों की जांच कर रही है। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, इस खूनी घटनाक्रम की पूरी तस्वीर और स्पष्ट होगी। UP News
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