आजमगढ़ में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत संचालित स्वयं सहायता समूहों ने ग्रामीण महिलाओं के जीवन में बड़ा बदलाव लाने का काम किया है। इसका असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था के साथ-साथ परिवारों की आय, महिलाओं के निर्णय लेने की क्षमता और सामाजिक भागीदारी पर भी दिखाई दे रहा है।

UP News : उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में महिला सशक्तीकरण अब केवल सरकारी योजनाओं तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता और सामाजिक नेतृत्व का मजबूत माध्यम बनता जा रहा है। आजमगढ़ में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत संचालित स्वयं सहायता समूहों ने ग्रामीण महिलाओं के जीवन में बड़ा बदलाव लाने का काम किया है। समूहों से जुड़कर महिलाएं बचत और छोटे ऋण की व्यवस्था से आगे बढ़ते हुए उद्यमिता, स्वरोजगार, कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, सामाजिक जागरूकता और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। जिला प्रशासन के अनुसार, विशेष सोशल मोबिलाइजेशन अभियान के दौरान हजारों नए स्वयं सहायता समूहों का गठन किया गया और बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाओं को आजीविका मिशन से जोड़ा गया। इसका असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था के साथ-साथ परिवारों की आय, महिलाओं के निर्णय लेने की क्षमता और सामाजिक भागीदारी पर भी दिखाई दे रहा है। UP News
आजमगढ़ में मई, जून और जुलाई 2026 के दौरान चलाए गए त्रिमासीय विशेष सोशल मोबिलाइजेशन अभियान के तहत 5,650 नए स्वयं सहायता समूहों का गठन कर करीब 94 हजार महिलाओं को सीधे मिशन से जोड़ा गया। इस अभियान के व्यापक स्तर पर कुल करीब 6,000 समूहों का गठन कर एक लाख से अधिक महिलाओं को जोड़ने का लक्ष्य हासिल किया गया। जमीनी स्तर पर लगातार निगरानी, प्रशासनिक समन्वय और डोर-टू-डोर संपर्क अभियान के चलते आजमगढ़ ने मुख्यमंत्री डैशबोर्ड पर प्रदेश में तीसरा स्थान हासिल किया है। यह उपलब्धि बताती है कि स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने की दिशा में जिले में व्यापक स्तर पर काम किया जा रहा है। UP News
आजमगढ़ में वर्तमान समय में लगभग 25 हजार महिला स्वयं सहायता समूह सक्रिय हैं। इन समूहों से तीन लाख से अधिक ग्रामीण महिलाएं जुड़ी हुई हैं। शुरुआत में जहां स्वयं सहायता समूहों का मुख्य उद्देश्य बचत और आपसी ऋण व्यवस्था तक सीमित था, वहीं अब इन्हें ग्रामीण आजीविका और सूक्ष्म उद्यमिता का महत्वपूर्ण माध्यम बनाया जा रहा है। समूहों से जुड़ी महिलाएं छोटे कारोबार, कृषि आधारित गतिविधियों, खाद्य प्रसंस्करण, स्थानीय उत्पादों, हस्तशिल्प और खान-पान से जुड़े व्यवसायों के माध्यम से अपनी आय बढ़ाने का प्रयास कर रही हैं। UP News
महिला आर्थिक सशक्तीकरण की दिशा में आजमगढ़ की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में एक लाख से अधिक महिलाओं का ‘लखपति दीदी’ श्रेणी में पहुंचना बताया गया है। इन महिलाओं की वार्षिक पारिवारिक आय एक लाख रुपये से अधिक होने से उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है। इसका प्रभाव केवल आय तक सीमित नहीं है। बेहतर आमदनी से परिवारों में बच्चों की शिक्षा, पोषण, स्वास्थ्य और जीवन स्तर पर भी सकारात्मक असर पड़ रहा है। महिलाओं की बढ़ती आर्थिक भूमिका ने ग्रामीण समाज में उनके सम्मान और निर्णय लेने की क्षमता को भी मजबूत किया है। UP News
महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़ने और उन्हें व्यवस्थित तरीके से संचालित करने के लिए आजमगढ़ की 1,810 ग्राम पंचायतों में दो-दो समूह सखियों का चयन किया गया है। इस प्रकार कुल 3,620 समूह सखियों को समुदाय संगठन, वित्तीय साक्षरता और समूह प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया गया है।
इन समूह सखियों की भूमिका गांव की महिलाओं को सरकारी योजनाओं से जोड़ने, समूहों के गठन, बैंकिंग गतिविधियों और आर्थिक गतिविधियों को गति देने में महत्वपूर्ण है। प्रशासन की ओर से विशेष रूप से गरीब और वंचित परिवारों की पहचान कर उन्हें स्वयं सहायता समूहों से जोड़ने के लिए गांव-गांव संपर्क अभियान भी चलाया जा रहा है। UP News
स्वयं सहायता समूहों को मजबूत बनाने के लिए चरणबद्ध वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। समूह गठन के बाद शुरुआती खर्च और बैंक खाता संचालन के लिए 2,500 रुपये की स्टार्टअप निधि दी जाती है। समूह के तीन महीने तक नियमित संचालन के बाद उसके बैंक खाते में 30 हजार रुपये का रिवॉल्विंग फंड उपलब्ध कराया जाता है। छह महीने पूरे होने और वित्तीय गतिविधियों में परिपक्वता आने के बाद 1.50 लाख रुपये का कम्युनिटी इन्वेस्टमेंट फंड उपलब्ध कराया जाता है। इसके अतिरिक्त उन्नत कृषि और प्रसंस्करण जैसी आजीविका गतिविधियों के लिए ग्राम संगठनों को दो लाख रुपये तक का लाइवलीहुड फंड उपलब्ध कराया जा रहा है। UP News
गरीब परिवारों के सामने अचानक बीमारी, प्राकृतिक आपदा या अन्य आकस्मिक संकट आने पर उन्हें स्थानीय साहूकारों से ऊंची ब्याज दर पर कर्ज न लेना पड़े, इसके लिए वल्नरेबिलिटी रिडक्शन फंड की व्यवस्था की गई है। यह व्यवस्था ग्रामीण परिवारों को आर्थिक संकट के दौरान तत्काल सहायता उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इससे महिलाओं और उनके परिवारों की आर्थिक सुरक्षा मजबूत करने में मदद मिल रही है। UP News
स्वयं सहायता समूहों को संस्थागत बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ने पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है। पात्र समूहों को 1.50 लाख रुपये से लेकर छह लाख रुपये तक का बैंक ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके अलावा प्रदेश सरकार की व्यवस्था के तहत तीन लाख रुपये तक के ऋण पर 7 प्रतिशत की रियायती ब्याज दर का लाभ दिया जा रहा है। समय पर ऋण चुकाने वाली महिलाओं को अतिरिक्त ब्याज उपादान का लाभ भी मिल सकता है। इससे ग्रामीण महिलाओं को बिना बड़े पूंजी निवेश के अपना छोटा कारोबार शुरू करने का अवसर मिल रहा है। UP News
आजमगढ़ में महिलाओं की उद्यमिता को बाजार से जोड़ने के लिए ‘लाइवलीहुड ऑन व्हील्स’ पहल के तहत 250 ‘पिंक प्रेरणा दीदी कैंटीन’ और फास्ट फूड सेंटर शुरू किए गए हैं। आधुनिक और सुसज्जित सचल ठेलों के माध्यम से महिलाएं बाजारों, कस्बों और सार्वजनिक स्थानों पर खाद्य पदार्थ और खान-पान की सेवाएं उपलब्ध करा रही हैं। इस पहल ने उन महिलाओं के लिए कारोबार का रास्ता खोला है, जिनके पास स्थायी दुकान या बड़ा निवेश करने की क्षमता नहीं थी। UP News
आजमगढ़ में स्वयं सहायता समूहों को पर्यावरण संरक्षण और जैविक कृषि से जोड़ने के लिए ‘गो-धन संकल्प अभियान’ भी चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत गौशालाओं से 50 पैसे प्रति किलोग्राम की दर से गोबर खरीदा जाता है। स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं इस गोबर से वैज्ञानिक तरीके से वर्मी कम्पोस्ट तैयार करती हैं। जिले में पौधरोपण लक्ष्यों के सापेक्ष अब तक 27.13 लाख किलोग्राम से अधिक वर्मी कम्पोस्ट का उत्पादन किया जा चुका है। इसे ग्राम पंचायतों को 10 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से उपलब्ध कराया गया। इस पूरी प्रक्रिया में बिचौलियों की भूमिका खत्म करते हुए भुगतान सीधे स्वयं सहायता समूहों के बैंक खातों में डीबीटी के माध्यम से किया जा रहा है। UP News
गो-धन संकल्प अभियान के तहत समूह सदस्यों के लिए 2 करोड़ 71 लाख रुपये की आय का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके मुकाबले अब तक 1 करोड़ 12 लाख रुपये से अधिक का प्रत्यक्ष भुगतान महिलाओं को किया जा चुका है। वहीं, गौशालाओं को गोबर बेचने से लगभग 12.30 लाख रुपये का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त हुआ है। इस मॉडल से एक तरफ गौशालाओं को अतिरिक्त आय मिल रही है, वहीं दूसरी तरफ ग्रामीण महिलाओं को जैविक कृषि से जुड़ा रोजगार मिल रहा है। UP News
आजमगढ़ में महिला समूहों की भूमिका केवल आर्थिक गतिविधियों तक सीमित नहीं है। बाढ़ की दृष्टि से संवेदनशील विकास खंडों हरैया, महाराजगंज और अजमतगढ़ में 60 प्रशिक्षित ‘आपदा सखियों’ की तैनाती की गई है। ये महिलाएं बाढ़ जैसी आपदा के समय पूर्व चेतावनी देने, प्राथमिक चिकित्सा, सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने, आश्रय स्थल के समन्वय और जलजनित बीमारियों से बचाव के प्रति ग्रामीणों को जागरूक करने का काम करती हैं। इससे आपदा प्रबंधन में ग्रामीण महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है और गांवों की सामुदायिक प्रतिरोधक क्षमता मजबूत हो रही है। UP News
राष्ट्रीय अभियानों और त्योहारों को भी महिला समूहों की आजीविका से जोड़ा गया है। ‘हर घर तिरंगा अभियान’ के तहत स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं ने करीब 3.5 लाख राष्ट्रीय ध्वज तैयार किए, जिसके बदले उन्हें लगभग 70 लाख रुपये का पारिश्रमिक प्राप्त हुआ। इसी तरह पारंपरिक त्योहारों के अवसर पर स्थानीय स्तर पर पर्यावरण-अनुकूल और आकर्षक राखियां तैयार कर महिलाएं शिल्प आधारित स्वरोजगार को बढ़ावा दे रही हैं। इस तरह स्थानीय मांग को स्थानीय महिलाओं की आय से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। UP News
आजमगढ़ में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को अलग-अलग क्षेत्रों में जिम्मेदारी देकर ग्रामीण शासन व्यवस्था को भी मजबूत किया जा रहा है। कृषि सखी, बैंक सखी, विद्युत सखी और स्वास्थ्य सखी के रूप में महिलाएं गांवों में लोगों को संबंधित सरकारी सेवाओं और योजनाओं से जोड़ने का काम कर रही हैं। वहीं सामाजिक समस्याओं के समाधान और जागरूकता के लिए ‘शक्ति सखी’ संवर्ग बनाया गया है। इन महिलाओं को 6,000 रुपये मासिक मानदेय और 1,500 रुपये यात्रा भत्ता दिया जा रहा है। शक्ति सखियां कन्या भ्रूण हत्या रोकथाम, बालिका शिक्षा, संस्थागत प्रसव और पोषण जैसे मुद्दों पर ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चला रही हैं। UP News
आजमगढ़ में महिला स्वयं सहायता समूहों के विस्तार का अभियान अभी जारी है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में 30,218 नए समूहों के गठन के माध्यम से पांच लाख महिलाओं को संगठित करने का दीर्घकालिक लक्ष्य रखा गया है। इस लक्ष्य के मुकाबले शुरुआती चार महीनों में ही 4,256 नए समूहों का गठन कर 75 हजार से अधिक महिलाओं को जोड़ा जा चुका है। इससे साफ है कि जिले में महिला समूहों का नेटवर्क आने वाले समय में और व्यापक होने वाला है। UP News
आजमगढ़ में स्वयं सहायता समूहों का विस्तार अब केवल महिलाओं को बचत की आदत डालने तक सीमित नहीं है। समूहों को बैंकिंग, ऋण, कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, खान-पान, जैविक खेती, हस्तशिल्प और सामाजिक अभियानों से जोड़कर उन्हें ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया जा रहा है। सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि महिलाएं अब परिवार की आय में सहयोग करने वाली सदस्य भर नहीं रह गई हैं, बल्कि कई मामलों में वे स्वयं आर्थिक गतिविधियों की संचालक और सामुदायिक नेतृत्वकर्ता बन रही हैं। UP News
सरकार और जिला प्रशासन की योजनाबद्ध पहल का असर गांवों के सामाजिक ढांचे पर भी दिखाई दे रहा है। आर्थिक रूप से मजबूत हो रही महिलाएं परिवार से जुड़े महत्वपूर्ण फैसलों में अधिक सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और रोजगार जैसे विषयों पर उनकी भागीदारी बढ़ रही है।
स्वयं सहायता समूहों के जरिए महिलाओं को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ना, ऋण उपलब्ध कराना और स्थानीय बाजार से जोड़ना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को अधिक समावेशी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है। आजमगढ़ में महिला समूहों का यह मॉडल आने वाले समय में उत्तर प्रदेश के अन्य ग्रामीण जिलों के लिए भी एक उदाहरण बन सकता है। महिला सशक्तीकरण, स्वरोजगार, सामाजिक नेतृत्व और ग्रामीण विकास को एक साथ जोड़कर चलाया जा रहा यह अभियान गांव की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई गति दे रहा है। UP News
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