सावन के पहले 19 दिनों में 53.69 लाख श्रद्धालुओं ने बाबा विश्वनाथ के दर्शन किए। मंदिर प्रशासन को सावन खत्म होने तक 80 लाख भक्तों के पहुंचने की उम्मीद है।

वाराणसी (चेतना मंच) । श्रावण मास में काशी विश्वनाथ धाम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। सावन के पहले 19 दिनों में 53,69,634 श्रद्धालु बाबा विश्वनाथ के दर्शन-पूजन कर चुके हैं। मंदिर प्रशासन के मुताबिक, सावन की तीनों सोमवारी पर ही करीब 15 लाख श्रद्धालुओं ने बाबा के दरबार में हाजिरी लगाई। श्रद्धालुओं की मौजूदा संख्या और लगातार बढ़ रही भीड़ को देखते हुए प्रशासन को उम्मीद है कि सावन समाप्त होने तक दर्शन करने वाले भक्तों की संख्या 80 लाख के करीब पहुंच सकती है।
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) विश्व भूषण मिश्रा ने बताया कि सावन शुरू होने के बाद से मंदिर में श्रद्धालुओं का दबाव लगातार बना हुआ है। तीनों सोमवार को औसतन 5 से 5.50 लाख श्रद्धालु प्रतिदिन दर्शन के लिए पहुंचे। मंदिर प्रशासन इसे श्रद्धालुओं की रिकॉर्ड भागीदारी मान रहा है।
मंदिर प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार सावन के पहले 19 दिनों में 53 लाख से अधिक श्रद्धालु बाबा विश्वनाथ के दर्शन कर चुके हैं। सीईओ ने बताया कि श्रावण मास के अभी नौ दिन शेष हैं। यदि श्रद्धालुओं के आने की मौजूदा रफ्तार बनी रही तो पूरे सावन में यह आंकड़ा करीब 80 लाख तक पहुंच सकता है।
भारी भीड़ को देखते हुए श्री काशी विश्वनाथ मंदिर प्रशासन की ओर से श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए कई व्यवस्थाएं की गई हैं। मंदिर परिसर में खोया-पाया केंद्र, मेडिकल हेल्प काउंटर, शुद्ध पेयजल और ग्लूकोज वितरण जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।
प्रशासन के अनुसार सामान्य परिस्थितियों में श्रद्धालुओं को करीब 25 से 30 मिनट के भीतर दर्शन कराने का प्रयास किया जा रहा है।
सीईओ विश्व भूषण मिश्रा ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे खाली पेट दर्शन करने मंदिर न पहुंचें। उन्होंने कहा कि भीड़ बढ़ने पर कभी-कभी दर्शन के लिए लाइन में अधिक समय लग सकता है। ऐसी स्थिति में खाली पेट रहने से चक्कर आने या स्वास्थ्य संबंधी परेशानी की आशंका रहती है। इसलिए श्रद्धालुओं को दर्शन से पहले भोजन या हल्का नाश्ता करने की सलाह दी गई है।
मंदिर प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सावन शुरू होने से पहले ही वीआईपी और प्रोटोकॉल दर्शन पर पूरी तरह रोक लगा दी गई थी। हालांकि दिव्यांग, बुजुर्ग और अत्यंत जरूरतमंद श्रद्धालुओं के लिए विशेष परिस्थितियों में अलग व्यवस्था की जा सकती है।
मंदिर प्रशासन का कहना है कि उसकी प्राथमिकता सामान्य श्रद्धालुओं की सुरक्षा, सुविधा और व्यवस्थित तरीके से बाबा विश्वनाथ के दर्शन कराना है।
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