प्रदेश के बरेली के कोहड़ापीर इलाके में मंगलवार को बड़े पैमाने पर बुलडोजर कार्रवाई से हड़कंप मच गया। सीएम ग्रेड योजना के तहत सड़क चौड़ीकरण अभियान में करीब 100 दुकानों को ध्वस्त कर दिया गया।

UP News : उत्तर प्रदेश के बरेली के कोहड़ापीर इलाके में मंगलवार को बड़े पैमाने पर बुलडोजर कार्रवाई से हड़कंप मच गया। सीएम ग्रेड योजना के तहत सड़क चौड़ीकरण अभियान में करीब 100 दुकानों को ध्वस्त कर दिया गया। इस कार्रवाई के बाद स्थानीय व्यापारियों में आक्रोश और इलाके में तनाव का माहौल देखने को मिल रहा है।
प्रशासन के अनुसार, यह कार्रवाई शहर में ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने और सड़क को चौड़ा करने के उद्देश्य से की जा रही है। कोहड़ापीर क्षेत्र में लंबे समय से अतिक्रमण की समस्या बनी हुई थी, जिसे हटाने के लिए पहले नोटिस जारी किए गए थे। मंगलवार सुबह से ही मौके पर तीन बुलडोजर लगाए गए और लगातार दुकानों को हटाने का काम शुरू कर दिया गया।
स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि नगर निगम ने पहले जिन हिस्सों पर लाल निशान लगाए थे, बुलडोजर कार्रवाई उससे आगे तक कर दी गई। कई दुकानदारों ने आरोप लगाया कि उनकी वर्षों पुरानी दुकानें पूरी तरह गिरा दी गईं, जिससे उनका रोजगार खत्म हो गया है। कुछ लोगों का कहना है कि उनके सामान तक को निकालने का समय नहीं मिला और सब मलबे में दब गया।
इस अभियान के दौरान एक मस्जिद के सामने बने हिस्से को भी हटाया गया, जिसे प्रशासन ने अतिक्रमण बताया। इस घटना के बाद इलाके का माहौल और संवेदनशील हो गया। हालांकि प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई पूरी तरह निष्पक्ष है और सड़क सीमा में आने वाले हर अवैध निर्माण को हटाया जा रहा है, चाहे वह किसी का भी हो।
स्थिति को देखते हुए मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। किसी भी तरह के विरोध या तनाव को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। इसके साथ ही पूरे इलाके की निगरानी ड्रोन कैमरों से की जा रही है, ताकि हर गतिविधि पर नजर रखी जा सके और किसी भी अप्रिय स्थिति को तुरंत संभाला जा सके।
नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि सभी प्रभावित दुकानदारों को पहले ही नोटिस दिया गया था और अतिक्रमण हटाने के लिए पर्याप्त समय भी दिया गया था। अधिकारियों के मुताबिक, जिन लोगों ने समय रहते अतिक्रमण नहीं हटाया, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। यहां तक कि बुलडोजर अभियान का खर्च भी संबंधित लोगों से वसूला जाएगा।
कार्रवाई से प्रभावित दुकानदारों का कहना है कि उनकी दुकानें ही उनकी आजीविका का एकमात्र साधन थीं। एक व्यापारी ने बताया कि उसकी सौ साल पुरानी दुकान पूरी तरह ढह गई और अब उसके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। कई लोग प्रशासन से मुआवजे और राहत की मांग कर रहे हैं। जहां एक ओर व्यापारी वर्ग इस कार्रवाई का विरोध कर रहा है, वहीं कुछ स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों ने इसे सही कदम बताया है। उनका कहना है कि शहर के विकास और ट्रैफिक व्यवस्था को सुधारने के लिए अतिक्रमण हटाना जरूरी है।