उत्तर प्रदेश के बदायूं से सामने आए डेढ़ साल के मासूम आरव हत्याकांड ने हर किसी को झकझोर दिया है। बेटे की बेरहमी से हत्या के बाद टूट चुके पिता सुमित शर्मा को अब कोर्ट के फैसले से न्याय की उम्मीद जरूर जगी है, लेकिन बेटे को खोने का दर्द आज भी उनके दिल में जिंदा है।

UP News : उत्तर प्रदेश के बदायूं से सामने आए डेढ़ साल के मासूम आरव हत्याकांड ने हर किसी को झकझोर दिया है। बेटे की बेरहमी से हत्या के बाद टूट चुके पिता सुमित शर्मा को अब कोर्ट के फैसले से न्याय की उम्मीद जरूर जगी है, लेकिन बेटे को खोने का दर्द आज भी उनके दिल में जिंदा है। सुमित का कहना है कि जब तक उनके बेटे के हत्यारे को फांसी नहीं होगी, तब तक उन्हें चैन से नींद नहीं आएगी। शुक्रवार रात मीडिया से बातचीत के दौरान सुमित की आवाज कई बार भर्रा गई। कुछ देर चुप रहने के बाद उन्होंने खुद को संभाला और कहा, “आज भी बेटे का वीडियो देखता हूं तो पूरी रात आंखों में कट जाती है।” UP News
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यह दर्दनाक मामला फिरोजाबाद के शिकोहाबाद क्षेत्र का है, जहां 30 मई को डेढ़ साल के मासूम आरव की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। आरोप है कि बदायूं के शेखूपुरा निवासी विराज उर्फ जितेंद्र पाठक ने बच्चे को टॉफी दिलाने का बहाना बनाकर अपने साथ ले गया और सुनसान जगह पर उसे जमीन पर पटक-पटककर मार डाला। पुलिस जांच के मुताबिक, आरोपी सुमित शर्मा की पत्नी रति शर्मा से एकतरफा प्यार करता था और उस पर शादी का दबाव बना रहा था। रति के इनकार के बाद उसने इस वारदात को अंजाम दिया। इस मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट ने तेजी से सुनवाई करते हुए घटना के महज एक महीने 10 दिन के भीतर आरोपी को दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुनाई। UP News
बदायूं के सियाराम नगर निवासी सुमित शर्मा प्राइवेट नौकरी करते हैं। उनका ननिहाल फिरोजाबाद के अरांव क्षेत्र के बामई गांव में है। नानी और मौसी के घर आने-जाने के दौरान उनकी मुलाकात गांव की रहने वाली रति शर्मा से हुई। धीरे-धीरे दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और रिश्ता प्रेम में बदल गया। करीब तीन साल तक साथ रहने के बाद दोनों ने 18 फरवरी 2024 को शादी कर ली। हालांकि, 9 जनवरी 2026 को पति-पत्नी के बीच विवाद हुआ, जिसके बाद रति अपने डेढ़ साल के बेटे आरव को लेकर मायके चली गईं और वहीं रहने लगीं। सुमित के परिवार में उनकी मां और दो भाई अंकित व राघव हैं। उनके पिता सत्यप्रकाश शर्मा होमगार्ड में थे। पिता के निधन के बाद बड़े भाई अंकित को मृतक आश्रित कोटे से होमगार्ड की नौकरी मिली, जबकि छोटा भाई ई-रिक्शा चलवाता है। UP News
घटना वाले दिन रति अपनी मां पिंकी और बेटे आरव के साथ शिकोहाबाद की यादव कॉलोनी में रहने वाली अपनी मां की सहेली पुष्पलता पाठक के घर गई थीं। पुष्पलता हाल ही में सड़क हादसे में घायल हुई थीं।
रति के अनुसार, विराज उर्फ जितेंद्र पाठक से फोन पर बातचीत होती थी। बाद में वह लगातार शादी करने का दबाव बनाने लगा, लेकिन रति ने उसके प्रस्ताव को ठुकरा दिया था। 30 मई को भी आरोपी ने फोन किया और उसे पता चला कि रति पुष्पलता के घर मौजूद है। दोपहर करीब तीन बजे वह वहां पहुंचा। रति के मुताबिक, विराज ने आरव को टॉफी दिलाने की बात कहकर अपने साथ ले जाने की बात कही। रिश्तेदार समझकर उन्होंने बच्चे को उसके साथ भेज दिया। आरोप है कि इसके बाद आरोपी बच्चे को एक सुनसान गली में ले गया और कई बार जमीन पर पटक दिया। सिर में गंभीर चोट लगने से मासूम की मौत हो गई। वारदात के बाद आरोपी आरव को गोद में उठाकर वापस लाया और घर के बाहर छोड़कर फरार हो गया। परिजन आनन-फानन में बच्चे को अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने घटनास्थल के आसपास लगे CCTV कैमरों की जांच की, जिसमें आरोपी की करतूत कैद हो गई। यही फुटेज कोर्ट में सबसे अहम सबूत साबित हुई। रति शर्मा ने बताया कि उन्हें विराज पर कोई शक नहीं था, क्योंकि वह रिश्तेदार की तरह घर आता-जाता था। उन्होंने कहा कि उन्हें अंदाजा नहीं था कि वह उनके मासूम बेटे के साथ इतनी खौफनाक घटना कर देगा। रति ने कहा कि जब आरोपी बच्चे को वापस लेकर आया तो आरव की हालत देखकर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। उन्होंने कोर्ट से आरोपी को ऐसी सजा देने की मांग की थी, जिससे समाज में संदेश जाए। UP News
जिला शासकीय अधिवक्ता राजीव प्रियदर्शी ने बताया कि पुलिस ने घटना के छह दिन के भीतर कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी थी। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 13 गवाहों के बयान दर्ज कराए। बचाव पक्ष ने आरोपी की मानसिक स्थिति ठीक नहीं होने का तर्क दिया, लेकिन कोर्ट ने मजबूत सबूतों और गवाहों के आधार पर उसे दोषी माना। अभियोजन पक्ष के अनुसार, इस मामले में CCTV फुटेज सबसे बड़ा सबूत रहा। तेज पैरवी और पुख्ता साक्ष्यों के आधार पर फास्ट ट्रैक कोर्ट ने आरोपी को फांसी की सजा सुनाई। UP News
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