बागपत में स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर दिशा की बैठक में सांसद डॉ. राजकुमार सांगवान ने स्वास्थ्य विभाग से तीखे सवाल किए। आयुष्मान योजना का लाभ पात्र लोगों तक नहीं पहुंचने, आयुष्मान कार्ड नहीं बनने और मरीजों को निजी अस्पतालों में इलाज कराने की स्थिति पर बैठक में चिंता जताई गई।

UP News : पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी स्थिति को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। बागपत लोकसभा क्षेत्र के सांसद डॉ. राजकुमार सांगवान ने जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की बैठक में स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताई। सांसद ने आरोप लगाया कि आयुष्मान योजना का वास्तविक लाभ पात्र मरीजों को नहीं मिल पा रहा है और उन्हें निजी अस्पतालों में उपचार कराने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। 20 सितंबर 2026 को प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, दिशा की बैठक में सांसद ने स्वास्थ्य विभाग से जुड़े अधिकारियों से मरीजों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं और सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था को लेकर सवाल किए। उन्होंने सीएमओ से कहा कि केवल मरीजों के उपचार की औपचारिकता पूरी करने से काम नहीं चलेगा, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक स्थिति में सुधार दिखाई देना चाहिए। UP News
सांसद डॉ. राजकुमार सांगवान ने बैठक में ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाया। रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने सीएमओ से जिले की सीएचसी और पीएचसी पर तैनात डॉक्टरों तथा फार्मासिस्टों की स्थिति के बारे में जानकारी मांगी। सांसद ने सवाल उठाया कि यदि स्वास्थ्य विभाग को ही यह स्पष्ट जानकारी नहीं है कि कहां कितने चिकित्सक और फार्मासिस्ट तैनात हैं, तो ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की प्रभावी निगरानी कैसे होगी? यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि बागपत जैसे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों में बड़ी आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है और प्राथमिक तथा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र उनके लिए सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था का पहला महत्वपूर्ण पड़ाव हैं। UP News
बैठक में भाजपा विधायक योगेश धामा ने भी आयुष्मान योजना से संबंधित समस्या उठाई। अमर उजाला के अनुसार उन्होंने कहा कि पात्र लोगों के आयुष्मान कार्ड तक नहीं बन पा रहे हैं और लोगों को अस्पतालों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। उन्होंने सीएमओ से पात्र लोगों को योजना का लाभ दिलाने के निर्देश दिए। इससे साफ है कि मामला केवल अस्पताल में डॉक्टर या उपकरण उपलब्ध होने तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के लाभार्थियों तक पहुंचने और उनके वास्तविक क्रियान्वयन का भी है। UP News
सांसद डॉ. राजकुमार सांगवान पहले भी बागपत की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर मौके पर निरीक्षण कर चुके हैं। जून 2026 में जिला संयुक्त चिकित्सालय स्थित महिला अस्पताल के निरीक्षण के दौरान उन्हें खाली वार्ड, खराब लिफ्ट और कर्मचारियों की कमी जैसी समस्याएं मिली थीं। रिपोर्ट के अनुसार अस्पताल में खुले में प्रसव और कर्मचारियों द्वारा रिश्वत मांगने के आरोपों का मुद्दा भी सामने आया था। सांसद ने उस दौरान अस्पताल में दलालों की शिकायतों को भी गंभीरता से लिया था और संबंधित लोगों को चिन्हित कर कार्रवाई के निर्देश दिए थे। UP News
डॉ. राजकुमार सांगवान की संसदीय गतिविधियों के रिकॉर्ड से भी पता चलता है कि बागपत और उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था उनके उठाए गए विषयों में रही है। PRS India के अनुसार उन्होंने बागपत में सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल स्थापित करने, बागपत लोकसभा क्षेत्र में AIIMS की स्थापना, ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने और स्वास्थ्य संबंधी विभिन्न विषयों को संसद में उठाया है। जुलाई 2026 में उन्होंने उत्तर प्रदेश की ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की सेवाओं के उपयोग की आवश्यकता का मुद्दा भी उठाया। PRS India के रिकॉर्ड के अनुसार अगस्त 2026 में उन्होंने स्वास्थ्य अवसंरचना परियोजनाओं की स्थिति और जेनेरिक दवाओं की गुणवत्ता जैसे विषयों पर भी सवाल पूछे थे। UP News
बागपत सांसद द्वारा उठाया गया मुद्दा केवल एक जिले की प्रशासनिक बैठक तक सीमित नहीं माना जा सकता। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों की क्षमता, डॉक्टरों की उपलब्धता, रेफरल व्यवस्था और सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। इसी व्यापक संदर्भ में सितंबर 2026 में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार से नए मेडिकल कॉलेजों में चिकित्सा सुविधाओं को मजबूत करने और गंभीर मरीजों को एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल भेजे जाने की समस्या रोकने के लिए रोडमैप मांगा है। अदालत ने रेफरल व्यवस्था में अस्पतालों के बीच बेड और उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी पहले से सुनिश्चित करने जैसी व्यवस्था पर भी जोर दिया। UP News
बागपत की दिशा बैठक में सांसद डॉ. राजकुमार सांगवान द्वारा उठाए गए सवालों का मूल केंद्र यही दिखाई देता है कि सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था का मूल्यांकन केवल अस्पताल की इमारत, मशीनों या योजनाओं की संख्या से नहीं, बल्कि मरीज को समय पर डॉक्टर, दवा, जांच और उपचार मिल रहा है या नहीं, इससे होना चाहिए। आयुष्मान योजना के पात्र व्यक्ति को यदि निजी अस्पताल का रुख करना पड़ रहा है, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर पर्याप्त मानव संसाधन की जानकारी स्पष्ट नहीं है और जिला अस्पताल में बुनियादी व्यवस्थाओं को लेकर शिकायतें सामने आ रही हैं, तो इन सभी बिंदुओं की प्रशासनिक स्तर पर गंभीर समीक्षा जरूरी हो जाती है। अब देखने वाली बात यह होगी कि दिशा बैठक में सांसद द्वारा उठाए गए सवालों के बाद स्वास्थ्य विभाग कितनी तेजी से व्यवस्था में सुधार करता है और आयुष्मान योजना से लेकर CHC-पीएचसी तक मरीजों को वास्तविक सुविधा कब तक मिल पाती है। UP News
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