पूर्णेन्दु सिंह को पुलिस अधीक्षक/स्टाफ ऑफिसर टू डीजीपी के पद से स्थानांतरित कर बागपत का नया पुलिस अधीक्षक (SP) बनाया गया है। उनकी यह नई जिम्मेदारी जितनी अहम है, उतनी ही दिलचस्प उनकी सफलता की कहानी भी है।

उत्तर प्रदेश में 7 अक्टूबर 2026 को योगी सरकार ने बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए कई पुलिस अधिकारियों की जिम्मेदारियों में बदलाव किया। इसी फेरबदल के तहत पूर्णेन्दु सिंह को पुलिस अधीक्षक/स्टाफ ऑफिसर टू डीजीपी के पद से स्थानांतरित कर बागपत का नया पुलिस अधीक्षक (SP) बनाया गया है। उनकी यह नई जिम्मेदारी जितनी अहम है, उतनी ही दिलचस्प उनकी सफलता की कहानी भी है। सुल्तानपुर की धरती से निकलकर प्राइमरी स्कूल में शिक्षा हासिल करने वाले पूर्णेन्दु सिंह ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU), वाराणसी से उच्च शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000 में पीपीएस में चयनित होकर पुलिस सेवा में कदम रखा। अपनी मेहनत, अनुभव और समर्पण के दम पर उन्होंने आईपीएस तक का सफर तय किया। आखिर कैसा रहा उनका यह प्रेरणादायक सफर और किन उपलब्धियों ने उन्हें खास बनाया?
पूर्णेन्दु सिंह का जन्म 4 मार्च 1977 को हुआ। उनके पिता का नाम माधव प्रताप सिंह है और उनका गृह जनपद सुल्तानपुर, उत्तर प्रदेश है। सुल्तानपुर से जुड़ी उनकी पृष्ठभूमि और शुरुआती शिक्षा से शुरू हुआ उनका सफर आगे चलकर पुलिस सेवा तक पहुंचा। आज वह उत्तर प्रदेश पुलिस में अपनी जिम्मेदारियों के लिए पहचाने जाते हैं। बागपत के पुलिस अधीक्षक के रूप में उनकी नई तैनाती उनके सेवाकाल का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है।
पूर्णेन्दु सिंह की शैक्षिक यात्रा की खास बात यह है कि उनकी शुरुआती पढ़ाई एक प्राइमरी विद्यालय में हुई। इसके बाद उन्होंने उच्च शिक्षा के लिए वाराणसी स्थित बनारस हिंदू विश्वविद्यालय का रुख किया। बीएचयू देश के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में शामिल है। प्राथमिक विद्यालय से उच्च शिक्षा तक का यह सफर उनकी शैक्षिक पृष्ठभूमि को खास बनाता है। उन्होंने परास्नातक यानी एमए की पढ़ाई के साथ आपदा प्रबंधन में प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम भी पूरा किया। इसके अलावा उन्होंने जोखिम न्यूनीकरण प्रबंधन में स्नातकोत्तर डिप्लोमा हासिल किया। इन पाठ्यक्रमों से आपदा प्रबंधन और जोखिम कम करने जैसे विषयों में उनकी शैक्षिक रुचि का पता चलता है। पुलिस सेवा में कानून व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ आपात परिस्थितियों से निपटने की तैयारी भी महत्वपूर्ण होती है।
पूर्णेन्दु सिंह के करियर का अहम मोड़ वर्ष 2000 में आया, जब उनका चयन प्रांतीय पुलिस सेवा यानी पीपीएस में हुआ। इस चयन के साथ उन्होंने उत्तर प्रदेश पुलिस में अपनी सेवा यात्रा शुरू की। पीपीएस अधिकारियों की जिम्मेदारियों में कानून व्यवस्था बनाए रखना, पुलिस प्रशासन का संचालन करना और विभिन्न परिस्थितियों में सुरक्षा व्यवस्था संभालना शामिल होता है। पुलिस सेवा में आगे बढ़ने के साथ अधिकारियों को प्रशासनिक अनुभव और जिम्मेदारियों का अवसर मिलता है। पूर्णेन्दु सिंह ने भी अपने सेवाकाल में अलग-अलग दायित्व निभाए। उनका पीपीएस से आईपीएस तक पहुंचना उनके करियर का एक महत्वपूर्ण पड़ाव रहा।
पूर्णेन्दु सिंह को गत वर्ष आईपीएस पद पर पदोन्नति मिली। इस पदोन्नति के साथ उनके पुलिस सेवा करियर में एक नया अध्याय जुड़ा। पीपीएस से शुरू हुई उनकी यात्रा का आईपीएस तक पहुंचना उनकी सेवा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। आईपीएस अधिकारी के रूप में जिम्मेदारियां संभालने के दौरान कानून व्यवस्था, पुलिस प्रशासन और जनसुरक्षा जैसे विषयों पर विशेष ध्यान देना होता है। बागपत जैसे जिले में पुलिस अधीक्षक की भूमिका महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि जिले में कानून व्यवस्था बनाए रखने, पुलिसकर्मियों के कामकाज की निगरानी करने और आम लोगों की शिकायतों पर कार्रवाई सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी एसपी के पास होती है।
पूर्णेन्दु सिंह को पुलिस अधीक्षक और स्टाफ ऑफिसर टू डीजीपी के पद से स्थानांतरित करके बागपत का पुलिस अधीक्षक बनाया गया है। इस नियुक्ति के बाद वह जिले की पुलिस व्यवस्था का नेतृत्व करेंगे। पुलिस अधीक्षक के तौर पर जिले में अपराध नियंत्रण, कानून व्यवस्था और पुलिस प्रशासन से जुड़े कार्य उनकी जिम्मेदारियों का अहम हिस्सा होंगे। किसी जिले में एसपी की भूमिका केवल पुलिस बल का नेतृत्व करने तक सीमित नहीं रहती। उन्हें अलग-अलग परिस्थितियों में सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करनी होती है, पुलिस अधिकारियों के बीच समन्वय बनाए रखना होता है और जनता से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए पुलिस तंत्र को सक्रिय रखना होता है। बागपत में पूर्णेन्दु सिंह की नई तैनाती भी इन्हीं महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों से जुड़ी है।
पूर्णेन्दु सिंह को पुलिस सेवा के दौरान विभिन्न सम्मान भी मिले हैं। उन्हें वर्ष 2019 में डीजी कमेंडेशन डिस्क सिल्वर, वर्ष 2021 में डीजी कमेंडेशन डिस्क गोल्ड और वर्ष 2023 में डीजी कमेंडेशन डिस्क प्लेटिनम से सम्मानित किया गया। इसके अतिरिक्त वर्ष 2023 में उन्हें मेधावी सेवा पदक भी मिला। कुंभ मेले से जुड़ी सेवा के लिए भी उनका नाम सम्मान के विवरण में शामिल है। कुंभ मेले जैसे बड़े आयोजन में सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था महत्वपूर्ण होती है। हालांकि, उनके द्वारा निभाई गई विशिष्ट भूमिका और इस आयोजन से जुड़े सम्मान का विस्तृत विवरण उपलब्ध नहीं है, इसलिए इस संबंध में किसी विशेष जिम्मेदारी का दावा करना उचित नहीं होगा। इन सम्मानों से उनके सेवाकाल में मिले विभिन्न आधिकारिक पुरस्कारों की जानकारी मिलती है। सिल्वर, गोल्ड और प्लेटिनम श्रेणी के डीजी कमेंडेशन डिस्क तथा मेधावी सेवा पदक उनके करियर से जुड़े उल्लेखनीय सम्मान हैं।
पूर्णेन्दु सिंह की यात्रा की एक खास बात उनकी शिक्षा और पुलिस सेवा का मेल है। प्राथमिक विद्यालय से पढ़ाई शुरू करने के बाद बीएचयू से उच्च शिक्षा हासिल करना, एमए के साथ आपदा प्रबंधन और जोखिम न्यूनीकरण प्रबंधन से जुड़े पाठ्यक्रम पूरे करना तथा वर्ष 2000 में पीपीएस में चयनित होना उनके जीवन के महत्वपूर्ण पड़ाव हैं। इसके बाद आईपीएस पद पर पदोन्नति और पुलिस प्रशासन में अलग-अलग जिम्मेदारियों का निर्वहन उनके करियर को आगे बढ़ाने वाले अहम चरण रहे। उनकी नई तैनाती उन्हें बागपत जिले की पुलिस व्यवस्था का नेतृत्व करने का अवसर देती है।
पूर्णेन्दु सिंह के बागपत का पुलिस अधीक्षक बनने के बाद जिले में उनकी कार्यशैली और पुलिस प्रशासन की प्राथमिकताओं पर नजर रहेगी। एसपी के रूप में अपराध नियंत्रण, कानून व्यवस्था बनाए रखना और पुलिस व्यवस्था को प्रभावी ढंग से संचालित करना उनकी भूमिका के प्रमुख हिस्से होंगे। सुल्तानपुर में जन्म, प्राइमरी विद्यालय से शुरुआती शिक्षा, बीएचयू से उच्च शिक्षा, वर्ष 2000 में पीपीएस में चयन और फिर आईपीएस पद तक पहुंचना पूर्णेन्दु सिंह के करियर के प्रमुख पड़ाव हैं। अब बागपत के पुलिस अधीक्षक के रूप में उनकी नई जिम्मेदारी उनके लंबे सेवाकाल का अगला महत्वपूर्ण चरण है।
पूर्णेन्दु सिंह का जन्म 4 मार्च 1977 को हुआ और उनके पिता का नाम माधव प्रताप सिंह है। उनका गृह जनपद सुल्तानपुर, उत्तर प्रदेश है। उन्होंने प्राथमिक शिक्षा के बाद वाराणसी स्थित बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा प्राप्त की। उनकी शैक्षिक योग्यताओं में एमए, आपदा प्रबंधन में प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम और जोखिम न्यूनीकरण प्रबंधन में स्नातकोत्तर डिप्लोमा शामिल हैं। वर्ष 2000 में पीपीएस में चयनित होने के बाद उन्होंने पुलिस सेवा में करियर शुरू किया और गत वर्ष आईपीएस पद पर पदोन्नति प्राप्त की। उन्हें 2019 में डीजी कमेंडेशन डिस्क सिल्वर, 2021 में गोल्ड, 2023 में प्लेटिनम और 2023 में मेधावी सेवा पदक मिला। अब उन्हें पुलिस अधीक्षक/स्टाफ ऑफिसर टू डीजीपी के पद से स्थानांतरित करके बागपत का नया पुलिस अधीक्षक बनाया गया है।
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