बहराइच के सिसहना गांव में आवासीय जमीन के पट्टे को लेकर विवाद गहराया। शिकायतकर्ता ने पूर्व ग्राम प्रधान पर भाई को लाभ पहुंचाने और पट्टा आवंटन में कथित अनियमितताओं के आरोप लगाए। जिलाधिकारी से जांच और पट्टा निरस्त करने की मांग की गई।

UP News : उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में जमीन के एक आवासीय पट्टे को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। विशेश्वरगंज थाना क्षेत्र के सिसहना गांव में जमीन के स्वामित्व, पुराने कब्जे और पट्टा आवंटन की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए गए हैं। एक ग्रामीण ने पूर्व ग्राम प्रधान पर अपने भाई को लाभ पहुंचाने के लिए विवादित भूमि का आवासीय पट्टा कराए जाने का आरोप लगाया है। शिकायतकर्ता ने जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर पट्टे को निरस्त करने, पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने और कथित अनियमितताओं में शामिल लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है। मामले में सबसे अहम सवाल यह है कि जिस जमीन पर शिकायतकर्ता दशकों से अपना कब्जा होने का दावा कर रहा है, उसी भूमि का नया आवासीय पट्टा किन परिस्थितियों में और किस प्रक्रिया के तहत जारी किया गया। शिकायत में ग्राम पंचायत के प्रस्ताव, खुली बैठक की कार्यवाही और संबंधित दस्तावेजों की वैधता पर भी सवाल उठाए गए हैं। UP News
प्राप्त जानकारी के अनुसार, विशेश्वरगंज थाना क्षेत्र के सिसहना गांव निवासी वासुदेव शुक्ल ने जिलाधिकारी को दी गई शिकायत में बताया है कि उन्होंने वर्ष 1969 में तत्कालीन ग्राम प्रधान से आवास के लिए जमीन खरीदी थी। उनका दावा है कि जमीन पर कब्जा लेने के बाद उन्होंने वहां कच्चा मकान और छप्पर बनाकर रहना शुरू कर दिया था। शिकायतकर्ता का कहना है कि वह लंबे समय से इस जमीन पर रह रहे हैं और भूमि को लेकर पहले भी विवाद हो चुका है। उनके मुताबिक, इस विवाद में कैसरगंज के सिविल न्यायालय से उनके पक्ष में स्थायी निषेधाज्ञा का आदेश पारित किया जा चुका है। अब शिकायतकर्ता ने इसी पुराने कब्जे और न्यायालय के आदेश का हवाला देते हुए सवाल उठाया है कि विवादित भूमि पर नया आवासीय पट्टा कैसे जारी कर दिया गया। हालांकि, इस मामले में न्यायालय के आदेश की वास्तविक स्थिति, उसका दायरा और संबंधित भूमि पर उसकी प्रयोज्यता का स्वतंत्र रूप से सत्यापन किया जाना आवश्यक है। UP News
वासुदेव शुक्ल ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि पूर्व ग्राम प्रधान केशवराम ने 9 जून 2026 को अपने भाई शिवशंकर को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से विवादित जमीन का आवासीय पट्टा कराया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इस प्रक्रिया में कथित रूप से कूटरचित दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया। उनका कहना है कि पट्टा आवंटन के लिए ग्राम पंचायत की ओर से विधिवत प्रस्ताव पारित नहीं किया गया था और न ही संबंधित प्रस्ताव पर ग्राम पंचायत सदस्यों के हस्ताक्षर मौजूद हैं। ये आरोप फिलहाल शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए हैं। इनकी पुष्टि संबंधित राजस्व अभिलेखों, पट्टा आवंटन की मूल पत्रावली और प्रशासनिक जांच के बाद ही हो सकेगी। UP News
इस विवाद में ग्राम पंचायत की कार्यवाही भी जांच का प्रमुख बिंदु बन गई है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि पट्टा आवंटन की प्रक्रिया में खुली बैठक का प्रस्ताव, मुनादी और डुग्गी पिटवाने जैसी औपचारिकताओं से संबंधित दस्तावेज कथित तौर पर फर्जी तरीके से तैयार कराए गए। शिकायत में यह भी कहा गया है कि वर्तमान ग्राम प्रधान ने जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर स्पष्ट किया है कि उनकी ओर से विवादित जमीन के पट्टे के लिए कोई प्रस्ताव नहीं किया गया था। यदि शिकायत में किए गए दावे अभिलेखों से सही साबित होते हैं, तो यह मामला केवल दो पक्षों के बीच जमीन के विवाद तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ग्राम पंचायत में पट्टा आवंटन की प्रक्रिया और सरकारी अभिलेखों की प्रामाणिकता से जुड़े गंभीर सवाल भी खड़े करेगा। हालांकि, इस संबंध में मूल प्रस्ताव, बैठक की कार्यवाही और वर्तमान ग्राम प्रधान के प्रार्थना पत्र की स्वतंत्र पुष्टि अभी आवश्यक है। UP News
शिकायतकर्ता ने पट्टा पाने वाले व्यक्ति की पात्रता पर भी सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि जिस व्यक्ति के नाम विवादित जमीन का पट्टा कराया गया है, उसके पास पहले से पक्का मकान है और पट्टे वाली जमीन के आसपास पर्याप्त कृषि भूमि भी मौजूद है। वासुदेव शुक्ल ने इन परिस्थितियों का हवाला देते हुए मांग की है कि संबंधित व्यक्ति की पात्रता की जांच की जाए और यह पता लगाया जाए कि आवासीय पट्टा आवंटित करते समय निर्धारित नियमों का पालन किया गया था या नहीं। इस बिंदु पर भी अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही निकाला जा सकता है। इसके लिए संबंधित व्यक्ति के संपत्ति संबंधी अभिलेखों, पट्टा आवंटन के मानकों और प्रशासन के पास उपलब्ध दस्तावेजों की जांच जरूरी होगी। UP News
शिकायतकर्ता ने अपनी अर्जी में यह आशंका भी जताई है कि विवादित भूमि को लेकर विपक्षी पक्ष की ओर से उन्हें जमीन खाली करने की धमकी दी जा रही है और जबरन कब्जा करने का प्रयास किया जा सकता है। उन्होंने जिलाधिकारी से मामले में हस्तक्षेप कर जमीन की मौजूदा स्थिति सुरक्षित रखने, निष्पक्ष जांच कराने और किसी भी संभावित विवाद या जबरन कब्जे की स्थिति को रोकने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है। जमीन पर वास्तविक कब्जे की स्थिति, दोनों पक्षों के अधिकारों और किसी भी संभावित खतरे का आकलन संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों की जांच के आधार पर किया जाना चाहिए। UP News
वासुदेव शुक्ल ने जिलाधिकारी से मांग की है कि गाटा संख्या 76, रकबा 0.0200 हेक्टेयर यानी लगभग 200 वर्ग मीटर भूमि से संबंधित आवासीय पट्टे की पूरी प्रक्रिया की जांच कराई जाए।
शिकायतकर्ता की प्रमुख मांगें हैं कि—
बहराइच के सिसहना गांव का यह मामला पुराने कब्जे के दावे, आवासीय पट्टा आवंटन और ग्राम पंचायत की कार्यवाही से जुड़े सवालों के कारण महत्वपूर्ण हो गया है। एक ओर शिकायतकर्ता वर्ष 1969 से जमीन पर कब्जा होने और पूर्व न्यायिक आदेश का हवाला दे रहा है, वहीं दूसरी ओर नए पट्टे की वैधता और प्रक्रिया को लेकर जांच की मांग उठाई गई है। इस मामले में वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए राजस्व अभिलेखों, भूमि की पैमाइश, पुराने दस्तावेजों, न्यायालय के आदेश और पट्टा आवंटन की पूरी प्रक्रिया का परीक्षण आवश्यक है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए आरोपों और उनकी मांगों पर आधारित है। प्रशासन की जांच, संबंधित पक्षों का पक्ष और पट्टा आवंटन के मूल अभिलेख सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि प्रक्रिया में कोई अनियमितता हुई थी या नहीं। अब देखना होगा कि जिलाधिकारी इस शिकायत पर क्या कदम उठाते हैं और जमीन के इस विवाद में जांच के बाद क्या तथ्य सामने आते हैं। UP News
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