पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों के लिए नए पेराई सत्र को लेकर बड़ी हलचल शुरू हो गई है। मुजफ्फरनगर की इस चर्चित चीनी मिल में हुए आयोजन के बाद अब किसानों की निगाहें एक खास तारीख पर टिकी हैं। आखिर नए सत्र में क्या रहने वाला है खास? पूरी खबर पढ़ें।

UP News : पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों के लिए नए पेराई सत्र की शुरुआत के साथ ही चीनी मिलों में गतिविधियां तेज होने लगी हैं। खेतों में तैयार खड़े गन्ने की कटाई और मिलों तक उसकी आपूर्ति की तैयारियों के बीच मुजफ्फरनगर जिले की बुढ़ाना तहसील क्षेत्र में स्थित बजाज हिंदुस्तान शुगर लिमिटेड की भैसाना इकाई में पेराई सत्र 2026-27 का विधि-विधान के साथ शुभारंभ कर दिया गया है। चीनी मिल परिसर में आयोजित धार्मिक अनुष्ठान, हवन-पूजन और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच नए सत्र की शुरुआत हुई। इस अवसर पर मिल अधिकारियों, किसान प्रतिनिधियों और क्षेत्र के गणमान्य लोगों ने किसानों की खुशहाली और नए पेराई सत्र के सफल संचालन की कामना की।
बजाज चीनी मिल परिसर में नए पेराई सत्र के शुभारंभ के अवसर पर धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत 4 नवंबर को सुबह 10 बजे अखंड रामायण पाठ के साथ हुई। गुरुवार 5 नवंबर की सुबह रामायण पाठ का विधिवत समापन किया गया। इसके बाद वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हवन, पूजन और आरती का आयोजन हुआ। धार्मिक अनुष्ठान में मिल के अधिकारियों, किसान नेताओं और गन्ना समिति के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। हवन में आहुतियां देकर नए पेराई सत्र के निर्विघ्न संचालन, किसानों की आर्थिक खुशहाली और क्षेत्र की समृद्धि की कामना की गई।
हवन-पूजन और धार्मिक अनुष्ठान संपन्न होने के बाद चीनी मिल के कैन कैरियर में गन्ना डालकर पेराई सत्र 2026-27 का औपचारिक शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर बजाज चीनी मिल के इकाई प्रमुख चंद्रवीर सिंह, मुख्य अतिथि एवं गन्ना विकास सहकारी समिति बुढ़ाना के अध्यक्ष निर्भय सहरावत तथा SCDI (गन्ना समिति, बुढ़ाना) संजय सिंह प्रमुख रूप से मौजूद रहे। इन अतिथियों ने क्षेत्र के किसानों, मिल के विभागाध्यक्षों, अधिकारियों और कर्मचारियों की उपस्थिति में कैन कैरियर में गन्ना डालकर नए सत्र की शुरुआत की। कार्यक्रम में उपस्थित किसानों और अन्य गणमान्य लोगों ने भी नए पेराई सत्र के सफल रहने की कामना की।
मिल प्रबंधन के अनुसार पेराई सत्र को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए आवश्यक तकनीकी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। शुक्रवार 6 नवंबर को किसानों के लिए पहला गन्ना इंडेंट यानी गन्ना आपूर्ति पर्ची जारी किए जाने की जानकारी दी गई है। मिल प्रबंधन ने बताया है कि 11 नवंबर से चीनी मिल का नियमित संचालन पूरी क्षमता के साथ शुरू कर दिया जाएगा। इसके साथ ही किसानों को अपने गन्ने की आपूर्ति करने का सिलसिला शुरू करने का अवसर मिलेगा।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश को देश के प्रमुख गन्ना उत्पादक क्षेत्रों में गिना जाता है। मुजफ्फरनगर, शामली, मेरठ, बागपत, सहारनपुर और बिजनौर जैसे जिलों में गन्ने की खेती लाखों किसानों की आजीविका का महत्वपूर्ण आधार है। इन क्षेत्रों में चीनी मिलों का संचालन केवल चीनी उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था, कृषि आधारित रोजगार और स्थानीय बाजारों की गतिविधियां भी जुड़ी हुई हैं। गन्ने की पेराई शुरू होने से किसानों को अपनी उपज मिलों तक पहुंचाने का अवसर मिलता है। समय पर गन्ने की खरीद होने से खेत खाली होते हैं और किसान अगली फसल, विशेषकर गेहूं की बुवाई की तैयारी कर पाते हैं। इस लिहाज से नए पेराई सत्र का शुभारंभ पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए महत्वपूर्ण है। गन्ने की कटाई और आपूर्ति का सिलसिला शुरू होने से खेतों में अगली फसल की तैयारी भी गति पकड़ती है।
नया पेराई सत्र शुरू होने के साथ ही किसानों की निगाहें चीनी मिलों के संचालन, गन्ना खरीद की व्यवस्था और भुगतान पर भी टिकी रहती हैं। किसानों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उनकी उपज समय पर खरीदी जाए और गन्ने का भुगतान निर्धारित समयसीमा के भीतर मिले। किसानों को उम्मीद है कि नए पेराई सत्र में गन्ने की आपूर्ति व्यवस्था सुचारु रहेगी। मिलों में गन्ना उतारने के लिए अनावश्यक इंतजार न करना पड़ेगा और किसानों को अपनी उपज का उचित मूल्य तथा समय पर भुगतान मिलेगा।
पेराई सत्र के शुभारंभ कार्यक्रम के समापन पर मिल प्रबंधन की ओर से आमंत्रित अतिथियों और किसानों के लिए सामूहिक भोज की व्यवस्था की गई। बजाज हिंदुस्तान शुगर लिमिटेड की बुढ़ाना इकाई की ओर से कार्यक्रम में पहुंचे सभी अतिथियों और किसान भाइयों का स्वागत एवं आभार व्यक्त किया गया। कुल मिलाकर, बुढ़ाना क्षेत्र की बजाज चीनी मिल में पेराई सत्र 2026-27 का औपचारिक शुभारंभ पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गन्ना आधारित गतिविधियों के लिहाज से महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। अब किसानों को 11 नवंबर से नियमित पेराई शुरू होने का इंतजार है, जिससे गन्ने की आपूर्ति और खेतों में अगली फसल की तैयारी को गति मिलने की उम्मीद है।
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