बलिया की 19 वर्षीय खुशबू माता-पिता के निधन के बाद तीन बहनों और छोटे भाई की जिम्मेदारी उठा रही है। नौकरी कर परिवार चला रही खुशबू को अब सरकारी मदद का इंतजार है।

UP News : उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के मनियर नगर पंचायत क्षेत्र के वार्ड नंबर 13 की एक तंग बस्ती में 19 साल की खुशबू अपने तीन भाई-बहनों की परवरिश की जिम्मेदारी उठा रही है। माता-पिता के निधन के बाद खुशबू ने पढ़ाई और बचपन की उम्र में ही परिवार की जिम्मेदारी अपने कंधों पर ले ली। आज वह खुद काम करके घर चला रही है और अपने छोटे भाई-बहनों की पढ़ाई जारी रखने की कोशिश कर रही है। खुशबू के पिता का निधन वर्ष 2016 में हो गया था। उस समय चारों बच्चे काफी छोटे थे। पिता के जाने के बाद मां ने खेतों में मजदूरी कर अपने बच्चों का पालन-पोषण किया। मुश्किल हालात के बावजूद मां ने बच्चों की परवरिश में कोई कमी नहीं आने दी। करीब एक साल पहले मां का भी निधन हो गया। इसके बाद चारों भाई-बहनों के सामने परिवार चलाने का संकट खड़ा हो गया। रिश्तेदारों ने सांत्वना दी, लेकिन रोजमर्रा की जरूरतों और बच्चों की जिम्मेदारी का सवाल परिवार के सामने बना रहा।
मां के निधन के बाद खुशबू ने खुद को संभाला और अपने छोटे भाई-बहनों की जिम्मेदारी उठाने का फैसला किया। तीन बहनों और एक छोटे भाई के लिए वह अब बड़ी बहन के साथ-साथ मां की भूमिका भी निभा रही है। स्थानीय लोगों और विजय सिंह पप्पू के प्रयासों से खुशबू को मनियर नगर पंचायत में संविदा पर काम मिला। इसी नौकरी से मिलने वाली आय से वह परिवार की रोजमर्रा की जरूरतें पूरी कर रही है। खुशबू की दिनचर्या बेहद कठिन है। सुबह उठकर वह घर का काम करती है और भाई-बहनों के लिए खाना तैयार करती है। इसके बाद उन्हें तैयार कर स्कूल भेजती है और सुबह करीब 10 बजे नगर पंचायत कार्यालय पहुंचती है। शाम करीब 5 बजे तक काम करने के बाद जब वह घर लौटती है तो उसकी दूसरी पारी शुरू होती है। वह बहनों की देखभाल करती है, छोटे भाई की पढ़ाई में मदद करती है और रात का खाना तैयार करती है।
खुशबू को नगर पंचायत से मिलने वाली संविदा की नौकरी से करीब 8 से 9 हजार रुपये प्रतिमाह आय होती है। इसी रकम से घर का राशन, बिजली का खर्च और भाई-बहनों की पढ़ाई समेत अन्य जरूरतें पूरी करने की कोशिश करती है। कम आमदनी के बावजूद खुशबू का कहना है कि वह किसी भी हाल में अपने भाई-बहनों की पढ़ाई बंद नहीं होने देना चाहती। उसके सामने सबसे बड़ी चुनौती सीमित आय में पूरे परिवार का खर्च संभालना है।खुशबू के परिवार के लिए सरकारी सहायता का मुद्दा भी अहम है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अनाथ बच्चों के लिए सरकारी योजनाओं के तहत आर्थिक सहायता का प्रावधान है। लेकिन खुशबू के परिवार को अब तक इसका लाभ नहीं मिलने की बात सामने आई है। परिवार को उम्मीद है कि संबंधित विभाग मामले की जांच कर पात्रता के अनुसार सरकारी योजना का लाभ दिलाएगा। स्थानीय स्तर पर भी प्रशासन से इस परिवार की स्थिति पर ध्यान देने और जरूरी सहायता उपलब्ध कराने की मांग की जा रही है।
19 साल की उम्र में खुशबू ने जिस तरह अपने भाई-बहनों की जिम्मेदारी संभाली है, वह उसके संघर्ष को दिखाता है। नौकरी, घर का काम और बच्चों की पढ़ाई—इन सभी जिम्मेदारियों के बीच वह परिवार को संभालने की कोशिश कर रही है। अब उम्मीद प्रशासन और संबंधित विभाग से है कि इस परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए पात्र सरकारी योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि खुशबू पर परिवार का बोझ कुछ कम हो सके और उसके भाई-बहनों की पढ़ाई जारी रह सके।UP News :
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