बलिया के अपयाल गांव में 23.50 लाख रुपये के तालाब पट्टे में सिर्फ 8 लाख जमा करने और अवैध मछली शिकार का आरोप लगा है। DM से जांच और पट्टा निरस्त करने की मांग।

UP News : उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में मत्स्य पालन के लिए हुए तालाब के पट्टे की नीलामी को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। बांसडीह तहसील क्षेत्र की ग्राम सभा अपयाल में 23.50 लाख रुपये में नीलाम हुए तालाब पर सिर्फ 8 लाख रुपये जमा करने के बाद मछली का शिकार किए जाने का आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ता दीपक कुमार ने जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर मामले की निष्पक्ष जांच और पट्टा निरस्त करने की मांग की है। शिकायतकर्ता के मुताबिक, अपयाल ग्राम सभा स्थित तालाब गाटा संख्या-692त, रकबा 0.809 हेक्टेयर में मत्स्य आखेट के लिए 27 फरवरी को बांसडीह तहसील सभागार में नीलामी कराई गई थी। नीलामी नायब तहसीलदार की अध्यक्षता में संपन्न हुई थी। UP News :
शिकायत के अनुसार, नीलामी में अपयाल निवासी सत्येंद्र प्रसाद पुत्र सुदी ने सबसे अधिक 23,50,000 रुपये की बोली लगाई थी। नियमों के मुताबिक सर्वाधिक बोली लगाने वाले को निर्धारित प्रक्रिया के तहत धनराशि जमा करनी होती है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि नीलामी की शर्तों के अनुसार 25 प्रतिशत राशि तत्काल और शेष 75 प्रतिशत राशि 15 दिनों के भीतर सरकारी खाते में जमा किया जाना अनिवार्य था। हालांकि, आरोप है कि पट्टाधारक की ओर से अब तक केवल 8 लाख रुपये जमा किए गए हैं, जबकि शेष 15.50 लाख रुपये की राशि लंबे समय से बकाया है।
दीपक कुमार का कहना है कि तहसील प्रशासन की ओर से जुलाई 2026 में पट्टाधारक को नोटिस जारी कर निर्धारित राशि जमा करने की चेतावनी दी गई थी। शिकायतकर्ता का आरोप है कि नोटिस के बावजूद अब तक पट्टा निरस्त करने या बकाया राशि की वसूली को लेकर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने तहसील प्रशासन के कुछ अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए मिलीभगत की आशंका जताई है। साथ ही आरोप लगाया कि पट्टाधारक द्वारा कथित रूप से समूह बनाकर नियमों के विपरीत तालाब में मछली का शिकार कराया जा रहा है। UP News :
शिकायतकर्ता दीपक कुमार ने जिलाधिकारी को शिकायती पत्र देकर मामले में तत्काल कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि जब पट्टे की पूरी निर्धारित धनराशि समय सीमा के भीतर जमा नहीं की गई है तो पट्टा निरस्त किया जाना चाहिए। इसके अलावा उन्होंने तालाब में कथित अवैध मत्स्य आखेट पर तत्काल रोक लगाने, पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
फिलहाल शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मामले में प्रशासनिक जांच या संबंधित अधिकारियों की आधिकारिक रिपोर्ट सामने आने के बाद ही पूरे प्रकरण की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। UP News :
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