बलिया के बांसडीह में सुखपुरा-देल्हुआ क्षेत्र की बिजली व्यवस्था को लेकर ग्रामीणों का धरना। जानिए बिजली कटौती, जर्जर तार और बिलों को लेकर क्या हैं मांगें।

UP News : उत्तर प्रदेश के बलिया में ग्रामीण इलाकों की बिजली व्यवस्था को लेकर लोगों का आक्रोश अब सड़क पर दिखाई देने लगा है। सुखपुरा और देल्हुआ विद्युत उपकेंद्रों से जुड़े गांवों में लगातार बिजली कटौती और बार-बार ट्रिपिंग से परेशान ग्रामीणों और कार्यकर्ताओं ने बांसडीह तहसील मुख्यालय पर धरना-प्रदर्शन किया। पूर्वांचल छात्र संघर्ष समिति के बैनर तले आयोजित प्रदर्शन में बड़ी संख्या में ग्रामीण और कार्यकर्ता शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने बिजली विभाग और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की तथा अपनी मांगों को लेकर उपजिलाधिकारी बांसडीह को ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि बिजली व्यवस्था जल्द नहीं सुधरी तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। UP News
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सुखपुरा और देल्हुआ विद्युत उपकेंद्रों से जुड़े गांवों में बिजली आपूर्ति की स्थिति लंबे समय से परेशान करने वाली बनी हुई है। उनका आरोप है कि दिन और रात मिलाकर भी कई इलाकों में अपेक्षित बिजली नहीं मिल पा रही है। भीषण गर्मी और खेती-किसानी के समय अनियमित आपूर्ति से ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यह शिकायत पूरी तरह नई नहीं है। जून 2026 में भी सुखपुरा और देल्हुआ उपकेंद्रों से जुड़े करीब 300 गांवों में लंबी बिजली कटौती तथा कुछ स्थानों पर जर्जर तारों के कारण बार-बार फॉल्ट की समस्या आई थी। UP News
धरने को संबोधित करते हुए पूर्वांचल छात्र संघर्ष समिति के संयोजक एवं पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष नागेंद्र बहादुर सिंह 'झुन्नू' ने बिजली व्यवस्था को लेकर ग्रामीणों की समस्याएं उठाईं। उन्होंने कहा कि शासन की ओर से बिजली आपूर्ति के निर्धारित मानकों के बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में अपेक्षित आपूर्ति नहीं मिल रही है। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि उनके क्षेत्र में कई बार बिजली की उपलब्धता 8 से 10 घंटे के आसपास रह जा रही है। पूर्वांचल छात्र संघर्ष समिति पहले भी बलिया में स्थानीय जनसमस्याओं को लेकर आंदोलन करती रही है। 2025 में समिति ने छात्र और जनसमस्याओं को लेकर जिलाधिकारी कार्यालय पर प्रदर्शन किया था। UP News
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि उत्तर प्रदेश में बिजली आपूर्ति को लेकर जिला मुख्यालय, तहसील मुख्यालय और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए अलग-अलग मानक निर्धारित किए गए हैं। उत्तर प्रदेश सरकार के एक आधिकारिक दस्तावेज में जिला मुख्यालयों के लिए 24 घंटे, तहसील मुख्यालयों के लिए 20 घंटे और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए 18 घंटे बिजली आपूर्ति की व्यवस्था का उल्लेख मिलता है। वहीं, सरकार के अगस्त 2025 के एक आधिकारिक दस्तावेज में मार्च 2025 की औसत आपूर्ति ग्रामीण क्षेत्रों में 20.06 घंटे, तहसील स्तर पर 22.22 घंटे और जनपद स्तर पर 24 घंटे बताई गई थी। ऐसे में बांसडीह क्षेत्र के प्रदर्शनकारियों द्वारा स्थानीय स्तर पर कम आपूर्ति का दावा स्थानीय बिजली व्यवस्था की स्थिति पर सवाल खड़ा करता है। UP News
धरने में वक्ताओं ने बिजली कटौती के साथ-साथ बार-बार ट्रिपिंग और तकनीकी खामियों का मुद्दा भी उठाया। समिति से जुड़े नेता आदित्य योगी के अनुसार, क्षेत्र की मुख्य सप्लाई रसड़ा से आती है और कई बड़े फीडर इससे जुड़े हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि अधिक लोड के कारण दिनभर ट्रिपिंग की समस्या बनी रहती है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि शिकायत करने पर कई बार मुख्य लाइन में खराबी का हवाला देकर समस्या का समाधान टाल दिया जाता है। UP News
धरने के दौरान प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि शहर की बिजली आपूर्ति बनाए रखने के लिए कई बार ग्रामीण क्षेत्रों की आपूर्ति प्रभावित की जाती है। यह आरोप प्रदर्शनकारियों का है; बिजली विभाग की ओर से इस विशेष धरने के आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया इस रिपोर्ट के लिए उपलब्ध नहीं है। हालांकि, जून 2026 में बलिया के सिविल लाइन क्षेत्र और सुखपुरा-देल्हुआ से जुड़े गांवों में लंबी बिजली कटौती के दौरान विभागीय अधिकारियों ने गर्मी, बढ़ी मांग, ओवरलोडिंग और पुराने-जर्जर तारों को फॉल्ट की वजहों में शामिल किया था। UP News
ग्रामीणों ने सुखपुरा और देल्हुआ विद्युत उपकेंद्रों को इब्राहिमपट्टी पावर ट्रांसमिशन से जोड़ने की मांग की है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि इससे क्षेत्र की बिजली आपूर्ति व्यवस्था को मजबूती मिल सकती है और बार-बार होने वाली कटौती एवं ट्रिपिंग की समस्या को कम करने में मदद मिल सकती है। इब्राहिमपट्टी ग्रिड को लेकर बलिया में पहले भी बिजली आपूर्ति से संबंधित मांगें उठ चुकी हैं। 2015 में पूर्वांचल छात्र संघर्ष समिति के बैनर तले इब्राहिमपट्टी पावर ग्रिड से बलिया-मऊ को बेहतर बिजली आपूर्ति देने की मांग की गई थी। UP News
धरने में बिजली के बिलों को लेकर भी ग्रामीणों ने अपनी शिकायत रखी। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि कुछ उपभोक्ताओं को वास्तविक मीटर रीडिंग के बिना अधिक बिल भेजे जा रहे हैं। उन्होंने मांग की कि मीटर की वास्तविक रीडिंग के आधार पर बिल तैयार किए जाएं और जिन उपभोक्ताओं के बिल गलत या अधिक हैं, उनकी जांच कर तत्काल संशोधन किया जाए। UP News
ग्रामीण क्षेत्रों में लटक रहे पुराने और जर्जर विद्युत तार भी प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में शामिल रहे। ग्रामीणों ने मांग की कि ऐसे तारों को जल्द बदला जाए ताकि विद्युत दुर्घटनाओं का खतरा कम हो। सुखपुरा और देल्हुआ क्षेत्र से जुड़ी जून 2026 की रिपोर्ट में भी जर्जर तारों और बार-बार लाइन टूटने की समस्या का उल्लेख हुआ था। उस रिपोर्ट में ग्रामीणों ने ज्ञानपीठिका स्कूल, आईटीआई और रामपुर के आसपास की जर्जर लाइन बदलने की मांग उठाई थी। UP News
प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि बिजली से जुड़ी शिकायतों का समयबद्ध, पारदर्शी और संतोषजनक समाधान सुनिश्चित किया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि बिजली खराब होने के बाद शिकायत दर्ज कराने पर केवल औपचारिक कार्रवाई के बजाय समस्या के स्थायी समाधान की जरूरत है। UP News
प्रदर्शनकारियों ने बांसडीह के उपजिलाधिकारी को मांग पत्र सौंपकर बिजली व्यवस्था में सुधार की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द समस्या का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। पूर्वांचल छात्र संघर्ष समिति इससे पहले भी बलिया में विभिन्न जनमुद्दों को लेकर प्रदर्शन करती रही है। 2026 में छात्रवृत्ति और मोबाइल-टैबलेट वितरण समेत अन्य मांगों को लेकर भी समिति के नेतृत्व में प्रदर्शन की रिपोर्ट सामने आई थी। UP News
बांसडीह में हुआ यह प्रदर्शन ऐसे समय में बिजली व्यवस्था को लेकर स्थानीय असंतोष को सामने लाता है, जब जिले में पहले भी ट्रिपिंग, ओवरलोडिंग और जर्जर विद्युत लाइनों से जुड़ी शिकायतें सामने आती रही हैं। अब ग्रामीणों की नजर इस बात पर है कि सुखपुरा और देल्हुआ उपकेंद्रों की आपूर्ति व्यवस्था को सुधारने के लिए बिजली विभाग और प्रशासन की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं। UP News
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