उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में मिड-डे-मील योजना में गंभीर अनियमितता का मामला सामने आया है। बांसडीह क्षेत्र के ताजपुर मुडियारी स्थित इंटर कॉलेज में कथित तौर पर करीब दो साल से बच्चों के लिए मिड-डे-मील नहीं बनाया गया, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में भोजन वितरण जारी रहा।

UP News : उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में मिड-डे-मील योजना में गंभीर अनियमितता का मामला सामने आया है। बांसडीह क्षेत्र के ताजपुर मुडियारी स्थित इंटर कॉलेज में कथित तौर पर करीब दो साल से बच्चों के लिए मिड-डे-मील नहीं बनाया गया, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में भोजन वितरण जारी रहा। इस दौरान करीब 14 लाख रुपये की सरकारी धनराशि का भुगतान भी कर दिया गया। मामले की शिकायत सामने आने के बाद जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह ने गोपनीय तरीके से जांच कराई। जांच में स्कूल में लंबे समय से मिड-डे-मील नहीं बनने और इसके बावजूद रिकॉर्ड में बच्चों की संख्या दर्ज कर भुगतान किए जाने की बात सामने आई है। जांच रिपोर्ट डीएम को सौंप दी गई है। अब संबंधित लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के साथ सरकारी धन की रिकवरी की कार्रवाई की जाएगी। UP News
मामला बांसडीह स्थित इंटर कॉलेज ताजपुर मुडियारी का है। जांच के अनुसार वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 के दौरान स्कूल में मिड-डे-मील का वास्तविक संचालन नहीं हुआ। इसके बावजूद रिकॉर्ड में बच्चों की उपस्थिति दर्ज कर योजना के तहत भुगतान किया जाता रहा। बीएसए मनीष कुमार सिंह के मुताबिक जांच रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंप दी गई है। डीएम के निर्देश के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। जांच में स्कूल के प्रधानाचार्य चंद्रशेखर पाठक और एमडीएम के जिला समन्वयक अजीत पाठक की भूमिका पर भी सवाल सामने आए हैं। प्रशासन की ओर से दोनों के खिलाफ कार्रवाई के साथ सरकारी धनराशि की रिकवरी की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। UP News
इस पूरे मामले का खुलासा स्कूल के कुछ बच्चों की शिकायत के बाद हुआ। बताया गया कि बच्चों ने जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह से मुलाकात कर स्कूल में मिड-डे-मील नहीं बनने की शिकायत की थी। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया था कि वास्तविक छात्र संख्या के अनुरूप भोजन नहीं बनने के बावजूद योजना के तहत भुगतान किया जा रहा है। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने बेसिक शिक्षा अधिकारी मनीष कुमार सिंह और जिला विकास अधिकारी आनंद प्रकाश को जांच की जिम्मेदारी दी। दोनों अधिकारियों ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए गोपनीय तरीके से विद्यालय पहुंचकर मौके पर जांच की। जांच के दौरान सामने आए तथ्यों ने अधिकारियों को भी चौंका दिया। UP News
विद्यालय के रसोईघर की जांच के दौरान अधिकारियों को मिड-डे-मील तैयार करने से जुड़ी जरूरी सामग्री भी नहीं मिली। मौके पर अनाज, चूल्हे और भोजन बनाने से संबंधित अन्य सामान के बजाय केवल सब्जी काटने वाला पहसुल मिला। जांच में यह भी सामने आया कि विद्यालय के रिकॉर्ड में कुछ ऐसे बच्चों के नाम दर्ज थे, जिनकी उपस्थिति नियमित रूप से दिखाई जा रही थी, जबकि उनके स्कूल आने को लेकर भी सवाल सामने आए। इसके बावजूद रिकॉर्ड में प्रतिदिन करीब 200 से 250 बच्चों की उपस्थिति दर्शाकर मिड-डे-मील का भुगतान किए जाने की बात जांच में सामने आई है। जांच अधिकारियों ने पूरे मामले की रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंप दी है। UP News
जिलाधिकारी के निर्देश के बाद अब मामले में संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की तैयारी है। प्रशासन की ओर से सरकारी धन की रिकवरी के साथ मुकदमा दर्ज कराने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जाएगी। यह मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग और संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों में भी हड़कंप मचा हुआ है। प्रशासन की कार्रवाई का उद्देश्य योजना के नाम पर सरकारी धन के कथित दुरुपयोग की जिम्मेदारी तय करना है। UP News
इसी बीच उत्तर प्रदेश के स्कूलों से जुड़ी एक अन्य महत्वपूर्ण पहल भी सामने आई है। प्रदेश में बच्चों में छिपी दिव्यांगता की पहचान के लिए विशेष स्क्रीनिंग अभियान चलाया जाएगा। इसके लिए प्रशस्त 2.0 ऐप का इस्तेमाल किया जाएगा। समग्र शिक्षा अभियान के तहत चलने वाले इस अभियान में कक्षा 1 से 12 तक के विद्यार्थियों की स्क्रीनिंग की जाएगी। इसका उद्देश्य ऐसे बच्चों की पहचान करना है, जिनमें दिव्यांगता से संबंधित लक्षण या जरूरतें मौजूद हैं, लेकिन अभी तक उनकी पहचान नहीं हो पाई है। UP News
अभियान के तहत परिषदीय, राजकीय, सहायता प्राप्त और मान्यता प्राप्त विद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की स्क्रीनिंग की जाएगी। महानिदेशक स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक कार्यालय की ओर से संबंधित अधिकारियों को अभियान के प्रभावी संचालन के निर्देश दिए गए हैं। प्रदेश में दिव्यांग विद्यार्थियों की संख्या एक लाख से अधिक बताई गई है। डिजिटल स्क्रीनिंग के जरिए ऐसे विद्यार्थियों को समय रहते चिन्हित कर उनकी जरूरत के अनुसार सहायता और सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जाएगा। UP News
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