बांदा के गिरवां थाना क्षेत्र के 23 साल पुराने जानलेवा हमले के मामले में अदालत ने तीन भाइयों को दोषी ठहराया। तीनों को 7-7 साल की सजा और जुर्माना लगाया गया।

UP News : उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में 23 साल पुराने जानलेवा हमले के मामले में आखिरकार अदालत का फैसला आ गया। न्यायालय ने मामले में तीन अभियुक्तों को दोषी करार देते हुए प्रत्येक को 7-7 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने तीनों दोषियों पर 21-21 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। यह मामला थाना गिरवां क्षेत्र से जुड़ा एससी-एसटी एक्ट का गंभीर प्रकरण बताया गया है। लंबे समय तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और अभियोजन की पैरवी के आधार पर तीनों अभियुक्तों को दोषी माना।
अदालत से दोषी ठहराए गए अभियुक्तों की पहचान रामबरन, उदयभान और सुरेंद्र पुत्रगण सियाराम, निवासी ग्राम मकरी, थाना गिरवां के रूप में हुई है। न्यायालय के फैसले के मुताबिक तीनों को 7-7 वर्ष के कठोर कारावास की सजा भुगतनी होगी। इसके साथ ही अदालत ने प्रत्येक दोषी पर 21 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। UP News :
करीब 23 वर्ष पहले हुई जानलेवा हमले की घटना के बाद यह मामला न्यायालय पहुंचा था। वर्षों तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद अब अदालत ने इस मामले में अपना फैसला सुनाया है। उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक के निर्देश पर चलाए जा रहे ऑपरेशन कन्विक्शन अभियान के तहत पुराने और गंभीर मामलों में प्रभावी पैरवी पर जोर दिया जा रहा है। बांदा पुलिस के मुताबिक, इसी क्रम में इस मामले की विवेचना, साक्ष्य संकलन और न्यायालय में पैरवी को प्रभावी तरीके से आगे बढ़ाया गया।
मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक महेंद्र द्विवेदी और विमल सिंह ने न्यायालय में पैरवी की। वहीं विवेचना में सीओ रणधीर सिंह की भूमिका रही। इसके अलावा कोर्ट मोहर्रिर आरक्षी पंकज कुमार और पैरोकार आरक्षी प्रदीप ने भी न्यायालय से संबंधित कार्रवाई में सहयोग किया। पुलिस के अनुसार, लगातार की गई प्रभावी पैरवी और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने तीनों अभियुक्तों को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई। UP News :
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