बांदा की चिल्ला सब्जी मंडी में सुबह-सुबह हुई एक घटना ने लोगों को हैरान कर दिया। युवक की मौत के बाद उसके इलाज से जुड़ी कुछ ऐसी बातें सामने आई हैं, जिन पर अब जांच की मांग उठ रही है। पढ़े पूरी खबर।

UP News:उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में एक हैरान करने वाली घटना सामने आई है। चिल्ला सब्जी मंडी में अचानक एक 36 वर्षीय युवक की तबीयत बिगड़ गई और वह लड़खड़ाकर जमीन पर गिर पड़ा। मौके पर मौजूद लोगों ने उसे बचाने की कोशिश की और पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने ग्रामीणों की मदद से एंबुलेंस बुलाकर युवक को जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। युवक के हाथ में इलाज के दौरान लगाया गया कैनुला लगा होने से घटना को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। UP News
मृतक की पहचान चन्द्रिका (36) पुत्र लोटन, निवासी ग्राम एवं पोस्ट गुमानगंज (शहबाजपुर), थाना नरैनी के रूप में हुई है। युवक किसी निजी चिकित्सक से इलाज कराने के बाद चिल्ला सब्जी मंडी पहुंचा था। इसी दौरान अचानक उसकी तबीयत बिगड़ गई और वह अचेत होकर जमीन पर गिर पड़ा। युवक को अचानक गिरता देखकर मंडी में मौजूद लोगों के बीच अफरा-तफरी मच गई। लोगों ने तत्काल पुलिस को सूचना दी। घटना की जानकारी मिलते ही चिल्ला थाना प्रभारी आनंद साहू पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। UP News
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पुलिस ने स्थानीय लोगों के सहयोग से 108 एंबुलेंस बुलवाई और युवक को जिला अस्पताल पहुंचाया। वहां चिकित्सकों ने परीक्षण के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। युवक की मौत की खबर मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया। UP News
घटना के बाद युवक के हाथ में लगा कैनुला चर्चा का विषय बन गया है। स्थानीय लोगों के बीच इस बात को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि युवक किस बीमारी का इलाज करा रहा था और उसका उपचार कहां हुआ था।
जिस निजी चिकित्सक से युवक ने इलाज कराया था, उसकी योग्यता और संबंधित क्लीनिक के पंजीकरण को लेकर भी जानकारी सामने आना बाकी है। हालांकि, अभी तक ऐसा कोई आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है जिससे युवक की मौत को इलाज में लापरवाही से जोड़ा जा सके। UP News
इस घटना ने ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित निजी क्लीनिकों और कथित झोलाछाप चिकित्सकों की निगरानी को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों ने स्वास्थ्य विभाग से मामले की निष्पक्ष जांच कराने और बिना पंजीकरण संचालित हो रहे क्लीनिकों की जांच करने की मांग की है। लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग को ऐसे मामलों में गंभीरता दिखाते हुए नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी दूसरे परिवार को ऐसी परेशानी का सामना न करना पड़े। UP News
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