उत्तर प्रदेश में स्थित भगवान के मन्दिरों में एक के बाद एक घोटालों की खबर प्रकाश में आ रही है। इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में स्थित वृंदावन के श्री बांके बिहारी मन्दिर का बड़ा घोटाला प्रकाश में आया है।

UP News : उत्तर प्रदेश में स्थित भगवान के मन्दिरों में एक के बाद एक घोटालों की खबर प्रकाश में आ रही है। इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में स्थित वृंदावन के श्री बांके बिहारी मन्दिर का बड़ा घोटाला प्रकाश में आया है। आशंका जताई जा रही है कि श्री बांके बिहारी मन्दिर में अरबों रुपये का घोटाला या यह कहें कि अरबों रुपये का चढ़ावा चोरी हुआ है। भारत के सुप्रीम कोर्ट में पेश की गई रिपोर्ट में दिए गए तथ्यों के आधार पर की गई स्टडी से जाहिर हो रहा है कि उत्तर प्रदेश के श्री बांके बिहारी मंदिर में अरबों रुपये का घोटाला हो चुका है ।UP News
आपको बता दें कि मंगलवार को भारत के सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के वृन्दावन में स्थित श्री बांके बिहारी मन्दिर में चल रहे चढ़ावा चोरी के प्रकरण पर सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने चढ़ावा चोरी रोकने के लिए एक सख्त आदेश भी जारी किया। इस आदेश के जो भी तथ्य प्रकाश में आए हैं उनके ऊपर की गई स्टडी से पता चला है कि श्री बांके बिहारी मंदिर में चढ़ावा चोरी में अरबों रुपये का घोटाला चल रहा है। यह बहुत बड़ा मामला है। सुप्रीम कोर्ट के सामने हाई पावर कमेटी के वकील मनिंदर सिंह की ओर से पेश की गई स्टेटस रिपोर्ट चिल्ला चिल्ला कर बता रही है कि श्री बांके बिहारी मन्दिर में अरबों रुपये का चढ़ावा चोरी करके हजम किया जा चुका है। UP News
सुप्रीम कोर्ट के सामने पेश की गई हाई पावर कमेटी की रिपोर्ट में बताया गया है कि श्री बांके बिहारी मन्दिर में हर साल 1.7 करोड़ यानी कि 1 करोड़ 75 लाख भक्त आते हैं। मंदिर के विकास के लिए बनाई जा रही योजने योजनाओं में भक्तों की इस संख्या का खासा ध्यान रखा जा रहा है। कमेटी के वकील मनिंदर सिंह ने बताया कि विकास योजना तीन स्तरीय है। इनमें वेटिंग एरिया, क्लॉक-रूम और जूते-चप्पलों, बैग व अन्य सामान रखने की जगह, बच्चों की देखभाल की सुविधाएं, फूड कोर्ट, 10-बेड का अस्पताल, कमांड-एंड-कंट्रोल सेंटर, पुलिस बैरक और मैनेजमेंट ऑफिस जैसी सुविधाएं शामिल होंगी। विकास के लिए करीब 5.5 एकड़ जमीन की जरूरत है। आधा एकड़ जमीन ले ली गई है और शेष पांच एकड़ जमीन हासिल करने के लिए कोशिशें चल रही हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, जरूरत पड़ने पर सरकार को जमीन अधिग्रहण के लिए कहेंगे। पीठ ने कहा, आप वार्ता जारी रखें, कोई निजी लेन-देन होता है, तो हमें बताएं। हम आगे बढ़ने की इजाजत देंगे। कोई रुकावट आई तो राज्य को जमीन का अधिग्रहण करने का निर्देश देंगे। UP News
जिस रिपोर्ट की हम यहां बात कर रहे हैं वह रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित हाई पावर कमेटी की है। रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि श्री बांके बिहारी मन्दिर में दर्शन करने के लिए हर साल 1.75 करोड़ यानी 1 करोड़ 75 लाख भक्त आते हैं। स्टडी बताती है कि मंदिरों में भक्तों के चढ़ावे का एवरेज कम से कम 1 हजार रुपये प्रति भक्त आता है। इस प्रकार यदि 1 करोड 75 लाख भक्त एक साल में आते हैं तो एक हजार रुपये प्रति भक्त के हिसाब से यह राशि 17 अरब 50 करोड़ रुपये बनती है। स्टडी बताती है कि बांके बिहारी मन्दिर के खाते में हर साल 17 अरब 50 करोड़ रुपये जमा होने चाहिए। इसके ठीक विपरीत वृंदावन के श्री बांके बिहारी मन्दिर के खाते में मात्र 350 करोड़ रुपये जमा हैं। जिस मन्दिर में हर साल अरबों
रुपये का चढ़ावा आता है उस मन्दिर के खाते में केवल 350 करोड़ रुपये जमा होना बहुत बड़े घोटाले का प्रमाण है। UP News
स्टडी करने वाली टीम ने प्रति भक्त 1000 रु. की बजाए प्रति भक्त 100 रु. का चढ़ावा चढ़ाने के हिसाब से भी गणना की है। इस गणना के हिसाब से श्री बांके बिहारी मन्दिर में हर साल 1 अरब 75 करोड़ रुपये का चढ़ावा बैंक के खाते जमा होना चाहिए। इसके ठीक उलट मात्र 350 करोड़ रुपये जमा होना बहुत ही बड़े घोटाले का जीता जागता प्रमाण है। UP News
मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा आदेश दिया है। उत्तर प्रदेश के विश्वप्रसिद्ध श्री बांके बिहारी मंदिर में श्रद्धालुओं की ओर से दिए जाने वाले चढ़ावे को लेकर गंभीर सवाल उठने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। मंदिर में दान की रकम को कथित तौर पर सीधे एकत्र किए जाने और उसे मंदिर के आधिकारिक खजाने तक पहुंचने से पहले दूसरी जगह भेजे जाने के आरोपों पर सुनवाई करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट कर दिया कि श्रद्धालुओं के दान का एक-एक पैसा मंदिर की दान पेटियों या अधिकृत ऑनलाइन माध्यम से सीधे मंदिर के कोष में जमा होना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर प्रबंधन को चढ़ावे के संग्रह और उसके हिसाब-किताब के लिए पारदर्शी और जवाबदेह व्यवस्था तैयार करने का निर्देश दिया है। अदालत ने यह भी साफ किया कि मंदिर से जुड़े किसी सेवायत, पुजारी या अन्य व्यक्ति को मंदिर के खजाने में जमा होने से पहले चढ़ावे की रकम पर अपना अधिकार जताने की अनुमति नहीं दी जा सकती। UP News
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान मंदिर के कामकाज की निगरानी कर रही उच्चस्तरीय समिति की स्टेटस रिपोर्ट का हवाला दिया गया। वरिष्ठ अधिवक्ता मनिंदर सिंह ने अदालत के सामने कुछ तस्वीरें और सामग्री रखी और कहा कि मंदिर की चढ़ावे की व्यवस्था में गंभीर समस्याएं सामने आई हैं। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया कि सेवायतों के भंडारी श्रद्धालुओं से सीधे नकद चढ़ावा लेते हैं। अदालत के सामने एक वीडियो का भी उल्लेख किया गया, जिसमें कथित तौर पर कुछ लोग पारंपरिक दान पेटी के सामने खड़े होकर श्रद्धालुओं से पैसे लेकर उन्हें पॉलीथिन की थैलियों में रखते दिखाई दे रहे हैं। इन आरोपों ने मंदिर में चढ़ावे के संग्रह और उसके लेखे-जोखे की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह ध्यान रखना जरूरी है कि ये बातें सुनवाई के दौरान सामने रखे गए आरोप और समिति की रिपोर्ट से जुड़ी दलीलें हैं। इन्हें किसी व्यक्ति या समूह के खिलाफ सिद्ध अपराध के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। UP News
मामले में ऑनलाइन दान की व्यवस्था को लेकर भी गंभीर आपत्तियां सामने आईं। रिपोर्ट के अनुसार मंदिर में ऑनलाइन दान के लिए लगाए गए फत् कोड के खराब होने या ढके होने की बात कही गई, जिसके कारण श्रद्धालु उनका इस्तेमाल नहीं कर पा रहे थे। सुप्रीम कोर्ट के सामने रखी गई दलीलों के मुताबिक यदि श्रद्धालु अधिकृत ऑनलाइन माध्यम से दान करना चाहते हैं तो उन्हें स्पष्ट और सुगम व्यवस्था मिलनी चाहिए। अदालत का जोर इस बात पर रहा कि चढ़ावे की पूरी प्रक्रिया ऐसी हो जिसमें रकम के मंदिर के खजाने तक पहुंचने और उसके इस्तेमाल का स्पष्ट रिकॉर्ड उपलब्ध रहे। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने बेहद महत्वपूर्ण टिप्पणी की कि श्रद्धालु द्वारा भगवान को दिया गया दान सबसे पहले भगवान के लिए होना चाहिए। अदालत ने साफ किया कि मंदिर से जुड़े किसी व्यक्ति को मंदिर के खजाने में जमा होने से पहले उस रकम पर व्यक्तिगत अधिकार नहीं हो सकता। पीठ ने निर्देश दिया कि चढ़ावे की राशि दान पेटियों अथवा मंदिर के अधिकृत ऑनलाइन कोष में ही जमा हो। किसी सेवायत या अन्य व्यक्ति की ओर से इस व्यवस्था में बाधा डालने को गंभीरता से लिया जाएगा। UP News
सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर प्रबंधन समिति को चढ़ावा प्राप्त करने, सुरक्षित रखने, जमा करने और उसका हिसाब रखने की पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने का निर्देश दिया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि श्रद्धालुओं द्वारा दी गई रकम का पूरा लेखा-जोखा उपलब्ध रहे और किसी स्तर पर अनियमितता की गुंजाइश न बचे। अदालत के निर्देश का मूल संदेश स्पष्ट है कि श्रद्धालु का चढ़ावा मंदिर के अधिकृत खजाने तक पहुंचे और उसकी पाई-पाई का हिसाब रखा जाए। सुनवाई के दौरान मंदिर के धन के इस्तेमाल से संपत्तियां खरीदने को लेकर भी सवाल उठे। रिपोर्टों के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर के कोष से संपत्ति खरीदने के प्रस्तावों के संबंध में अदालत को जानकारी देने और आवश्यक अनुमति की व्यवस्था पर जोर दिया है। इसका महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि बांके बिहारी मंदिर के प्रबंधन और मंदिर की संपत्तियों को लेकर पहले से कानूनी विवाद चल रहा है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट की निगरानी मंदिर की वित्तीय व्यवस्था को लेकर पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। UP News
सुप्रीम कोर्ट ने मामले से जुड़े पक्षों को उच्चस्तरीय समिति की ओर से दाखिल स्टेटस रिपोर्ट पर अपनी प्रतिक्रियाएं और आपत्तियां दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया है। यानी आने वाले दिनों में इस मामले में पक्षकारों की ओर से रखी जाने वाली दलीलें और भी महत्वपूर्ण होंगी। बांके बिहारी मंदिर में चढ़ावे की व्यवस्था का मामला केवल दान पेटियों तक सीमित नहीं है। मंदिर के प्रशासन, प्रबंधन, श्रद्धालुओं की सुविधाओं और मंदिर की संपत्तियों को लेकर भी लंबे समय से बहस चल रही है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को मंदिर क्षेत्र के व्यापक विकास की योजना तैयार करने को कहा था। इसमें सड़क चैड़ीकरण के साथ-साथ बुजुर्गों, महिलाओं, बच्चों और बीमार श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं पर भी जोर दिया गया था। यह पूरा विवाद उत्तर प्रदेश श्री बांके बिहारी जी मंदिर ट्रस्ट अध्यादेश, 2025 से जुड़े कानूनी घटनाक्रम के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण है। बांके बिहारी मंदिर देश ही नहीं, दुनिया के करोड़ों कृष्ण भक्तों की आस्था का प्रमुख केंद्र है। यहां आने वाले श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार चढ़ावा और दान भगवान को समर्पित करते हैं। ऐसे में चढ़ावे की रकम के प्रबंधन को लेकर उठने वाला हर सवाल सीधे श्रद्धालुओं के विश्वास से जुड़ जाता है। सुप्रीम कोर्ट के ताजा निर्देश का महत्व इसी वजह से बड़ा है। अदालत ने सिर्फ रकम जमा करने की बात नहीं कही, बल्कि पारदर्शी सिस्टम और जवाबदेही सुनिश्चित करने पर जोर दिया है। इससे मंदिर के वित्तीय प्रबंधन में निगरानी और रिकॉर्ड-आधारित व्यवस्था मजबूत होने की उम्मीद है। UP News
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