हाई पावर कमेटी के अध्यक्ष (सेवानिवृत्त न्यायाधीश अशोक कुमार) मंदिर पहुंचे और शयनभोग सेवायत व अन्य गोस्वामियों के साथ बैठक की। बैठक के बाद राजभोग सेवक ने कमेटी के निर्देश का पालन करते हुए ठाकुरजी को जगमोहन में स्थापित कर दिया और वहीं से दर्शन कराए जाने लगे।

UP News : श्री बांके बिहारी मंदिर में बुधवार को उस समय तनावपूर्ण स्थिति बन गई जब हाई पावर कमेटी के निर्देश पर ठाकुर बांके बिहारी महाराज की प्रतिमा को गर्भगृह से निकालकर जगमोहन में विराजमान किया गया। इस फैसले का गोस्वामी समाज ने तीखा विरोध किया, जिसके चलते मंदिर परिसर में कई घंटों तक हंगामा चलता रहा।
जानकारी के अनुसार, हाई पावर कमेटी के अध्यक्ष (सेवानिवृत्त न्यायाधीश अशोक कुमार) मंदिर पहुंचे और शयनभोग सेवायत व अन्य गोस्वामियों के साथ बैठक की। बैठक के बाद राजभोग सेवक ने कमेटी के निर्देश का पालन करते हुए ठाकुरजी को जगमोहन में स्थापित कर दिया और वहीं से दर्शन कराए जाने लगे। हालांकि, शयनभोग सेवायत और कई गोस्वामी इस व्यवस्था से सहमत नहीं थे। उनका कहना था कि परंपरा के अनुसार ठाकुरजी केवल विशेष अवसरों पर ही जगमोहन में विराजते हैं, प्रतिदिन ऐसा करना मर्यादा के विरुद्ध है।
जब गोस्वामी समाज के लोग जगमोहन पहुंचे तो उन्होंने देखा कि गर्भगृह के द्वार पर जंजीर और ताला लगा है। इसे लेकर उन्होंने कड़ी आपत्ति जताई। उनका आरोप था कि मंदिर के इतिहास में कभी इस प्रकार से गर्भगृह को जंजीर से बंद नहीं किया गया। कुछ लोगों ने इसे ठाकुरजी का बंधन बताते हुए नाराजगी जताई और हाई पावर कमेटी पर परंपराओं में दखल देने का आरोप लगाया।
करीब तीन घंटे तक गर्भगृह बंद रहा। शाम को जब दर्शन का समय नजदीक आया और भक्तों ने ताला लगा देखा, तो उन्होंने नारेबाजी शुरू कर दी। कई श्रद्धालुओं ने इसे अनुचित बताते हुए त्वरित समाधान की मांग की। माहौल तनावपूर्ण हो गया और मंदिर परिसर में भारी भीड़ जुट गई।
लगातार विरोध और बढ़ते दबाव के बाद मंदिर खुलने से लगभग आधा घंटा पहले गर्भगृह का ताला खोल दिया गया। इसके बाद दर्शन सामान्य रूप से शुरू हो सके और स्थिति शांत हुई। गोस्वामी समाज ने स्पष्ट कर दिया है कि वे नियमित रूप से ठाकुरजी को जगमोहन में विराजमान करने के पक्ष में नहीं हैं और इस विषय पर उनका विरोध आगे भी जारी रह सकता है। UP News