कानपुर के तपेश्वरी मंदिर के बाहर लगी ‘बंटोगे तो कटोगे’ की होर्डिंग ने राजनीतिक विवाद क्यों बढ़ा दिया? बीजेपी एमएलसी सलिल विश्नोई का नाम और तस्वीर सामने आने के बाद सपा विधायक अमिताभ बाजपेयी ने क्या सवाल उठाए?

UP News: उत्तर प्रदेश के कानपुर में ‘बंटोगे तो कटोगे’ के नारे को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। बिरहाना रोड स्थित प्रसिद्ध तपेश्वरी मंदिर के बाहर लगी एक होर्डिंग चर्चा का विषय बनी हुई है। इस पर बड़े अक्षरों में ‘बंटोगे तो कटोगे’ लिखा है। साथ ही भारतीय जनता पार्टी के एमएलसी सलिल विश्नोई का नाम और तस्वीर भी दिखाई दे रही है। नवरात्रि के दौरान मंदिर के बाहर लगी इस होर्डिंग को लेकर शहर में अलग-अलग राजनीतिक मायनों पर चर्चा हो रही है।
जानकारी के अनुसार, कानपुर के व्यस्त बिरहाना रोड स्थित तपेश्वरी मंदिर के बाहर यह होर्डिंग लगाई गई है। मंदिर में नवरात्रि के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने के कारण यह संदेश लोगों का ध्यान खींच रहा है। होर्डिंग पर लिखे नारे और उसके साथ सलिल विश्नोई की तस्वीर होने से इसे लेकर राजनीतिक चर्चाएं भी शुरू हो गई हैं। हालांकि, होर्डिंग लगाने के पीछे की मंशा और इसे किसने लगवाया, इस बारे में उपलब्ध जानकारी में विस्तृत आधिकारिक पुष्टि नहीं है। UP News:
‘बंटोगे तो कटोगे’ का नारा उत्तर प्रदेश की राजनीति में पहले भी चर्चा में रहा है। इस नारे को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दलों और समर्थकों की अपनी-अपनी व्याख्या है। बीजेपी समर्थक इसे समाज की एकजुटता से जोड़कर देखते हैं, जबकि आलोचक इसे राजनीतिक ध्रुवीकरण से जुड़ा संदेश बताते हैं। कानपुर में मंदिर के बाहर लगी होर्डिंग ने एक बार फिर इसी बहस को हवा दे दी है। सवाल यह है कि धार्मिक अवसर पर लगाए गए इस संदेश को सामाजिक एकता के आह्वान के रूप में देखा जाए या इसके राजनीतिक प्रभावों पर चर्चा की जाए। UP News:
इस होर्डिंग को लेकर समाजवादी पार्टी के विधायक अमिताभ बाजपेयी ने सवाल उठाए हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, उन्होंने इसे राजनीतिक ध्रुवीकरण की कोशिश से जोड़कर देखा है। उनका सवाल है कि त्योहारों के दौरान इस तरह के नारों से समाज को क्या संदेश दिया जा रहा है। दूसरी ओर, बीजेपी समर्थकों का तर्क है कि समाज की एकजुटता का संदेश देना जरूरी है। इस तरह, होर्डिंग को लेकर राजनीतिक विचारों में अंतर साफ दिखाई दे रहा है।
फिलहाल, बिरहाना रोड स्थित तपेश्वरी मंदिर के बाहर लगी होर्डिंग ने कानपुर में राजनीतिक चर्चा को तेज कर दिया है। एक ओर इसे एकजुटता के संदेश के रूप में देखा जा रहा है, तो दूसरी ओर इसके राजनीतिक निहितार्थ पर सवाल उठ रहे हैं। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं और सामने आ सकती हैं। UP News:
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