बाराबंकी के रामनगर क्षेत्र में घाघरा नदी की बाढ़ से सड़कें जलमग्न हैं। ग्रामीण कमर तक पानी में आवागमन करने को मजबूर हैं और नाव व राहत सामग्री की मांग कर रहे हैं।

UP News : उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में घाघरा नदी की बाढ़ ने ग्रामीण इलाकों में जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। रामनगर तहसील क्षेत्र की ग्राम पंचायत लहड़रा के बुधई पुरवा से सीताराम पुरवा जाने वाला डामर मार्ग इन दिनों सड़क कम और नदी ज्यादा नजर आ रहा है। मार्ग पर कमर तक पानी भर जाने के कारण ग्रामीणों का आवागमन पूरी तरह प्रभावित हो गया है। बाढ़ की स्थिति ऐसी है कि गांव के लोगों को जरूरी काम के लिए भी पानी के बीच से होकर गुजरना पड़ रहा है। ग्रामीणों के मुताबिक दैनिक जरूरतों से जुड़े कामों के लिए घर से निकलना भी चुनौती बन गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि बुधई पुरवा से सीताराम पुरवा जाने वाले मार्ग पर कई जगह पानी का स्तर कमर तक पहुंच गया है। इसके कारण पैदल आवागमन बेहद मुश्किल हो गया है। सबसे ज्यादा परेशानी बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को हो रही है। ग्रामीणों ने बताया कि शौचालय जाने के लिए भी लोगों को बाढ़ के पानी के बीच से होकर निकलना पड़ रहा है। इसके बावजूद अभी तक प्रशासन की ओर से आवागमन के लिए नाव की व्यवस्था नहीं की गई है। UP News
घाघरा नदी का पानी गांव के आसपास के खेतों में भी फैल गया है। ग्रामीणों के अनुसार धान समेत कई अन्य फसलें पानी में डूब गई हैं। लंबे समय तक खेतों में पानी भरा रहने से फसलों को भारी नुकसान होने की आशंका है। ग्रामीण दिनेश कुमार यादव और रहीम समेत अन्य लोगों का कहना है कि बाढ़ का पानी लगातार परेशानी बढ़ा रहा है। किसानों को अपनी फसलों की चिंता सता रही है, जबकि प्रभावित परिवारों के सामने रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने की चुनौती खड़ी हो गई है।
बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों ने राहत सामग्री को लेकर भी प्रशासन पर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में पर्याप्त मात्रा में राहत सामग्री उपलब्ध नहीं कराई जा रही है, जबकि बाढ़ की स्थिति में प्रभावित परिवारों को तत्काल मदद की जरूरत है। ग्रामीणों के अनुसार ग्राम पंचायत का कूड़ा घर भी बाढ़ की चपेट में आ गया है। इससे आने वाले दिनों में जलभराव और साफ-सफाई से जुड़ी समस्याएं और बढ़ सकती हैं।
बाढ़ से परेशान ग्रामीणों ने प्रशासन से प्रभावित गांवों में तत्काल नाव की व्यवस्था कराने की मांग की है। उनका कहना है कि पानी के बीच से होकर आवागमन करना जोखिम भरा है और किसी भी समय हादसा हो सकता है। इसके अलावा ग्रामीणों ने बाढ़ प्रभावित परिवारों को पर्याप्त राहत सामग्री उपलब्ध कराने तथा जलमग्न फसलों का सर्वे कराकर नियमानुसार मुआवजा देने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि घाघरा नदी का जलस्तर और बढ़ा तो गांवों में स्थिति और गंभीर हो सकती है। UP News
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