बाराबंकी में सरयू नदी का जलस्तर खतरे के लाल निशान से ऊपर बना हुआ है। रामनगर क्षेत्र के कई गांव बाढ़ और जलभराव से प्रभावित हैं। उधिया गांव में तेज कटान के कारण 12 पक्के मकान और एक झोपड़ी समेत 13 मकान नदी में समा गए।

UP News : उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में सरयू नदी का कहर अभी थमा नहीं है। रामनगर तहसील क्षेत्र में सरयू नदी का जलस्तर लगातार खतरे के लाल निशान से ऊपर बना हुआ है। जलस्तर में कुछ कमी जरूर आई है, लेकिन नदी का कटान अब तेज हो गया है। इससे नदी के किनारे बसे गांवों में रहने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। सबसे गंभीर स्थिति उधिया (हेतमापुर) गांव में बनी हुई है, जहां तेज कटान के कारण शुक्रवार को 12 पक्के मकान और एक झोपड़ी समेत कुल 13 मकान सरयू नदी में समा गए। सरयू नदी के बढ़े जलस्तर और जलभराव के कारण रामनगर तहसील क्षेत्र के सुंदरनगर, कोड़ी, ललपुरवा मजरा बतनेरा, सरसंडा और उधिया गांव प्रभावित हैं। कई स्थानों पर पानी भरने के कारण ग्रामीणों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने प्रभावित परिवारों और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर अस्थायी रूप से विस्थापित किया है।
प्रशासन और राजस्व विभाग की टीमें लगातार प्रभावित गांवों में पहुंचकर हालात का जायजा ले रही हैं। अधिकारियों की निगरानी में राहत एवं बचाव कार्य जारी है, ताकि बाढ़ और कटान से प्रभावित लोगों को तत्काल सहायता उपलब्ध कराई जा सके।
प्रशासन की ओर से जारी रिपोर्ट के मुताबिक बाढ़ प्रभावित करीब 1500 लोगों के लिए राहत व्यवस्था की गई है। प्रभावित लोगों को सुबह नाश्ता तथा दोपहर और शाम के भोजन की व्यवस्था प्रशासन की ओर से कराई जा रही है। बाढ़ के कारण जिन इलाकों में सामान्य आवागमन प्रभावित हुआ है, वहां ग्रामीणों की सुविधा के लिए नावों का संचालन भी कराया जा रहा है। बतनेरा, जमका, डिहुवा, विझला और बल्लोपुर में आवश्यकतानुसार कुल 17 नावें संचालित की जा रही हैं। नावों के माध्यम से ग्रामीणों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा उपलब्ध कराने के साथ प्रशासन की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में जरूरी राहत सामग्री और अन्य व्यवस्थाओं पर भी नजर रख रही हैं।
रामनगर तहसील के राजस्व ग्राम उधिया (हेतमापुर) में सरयू नदी का कटान प्रशासन और ग्रामीणों के लिए सबसे बड़ी चिंता बन गया है। नदी की धारा लगातार किनारे की जमीन को काट रही है। जलस्तर में कमी के बावजूद कटान बढ़ने से नदी के आसपास रहने वाले परिवारों पर खतरा मंडरा रहा है। कटान को रोकने के लिए बाढ़ खंड बाराबंकी की ओर से बचाव कार्य किए जा रहे हैं। नदी के किनारे कटान रोकने के प्रयास लगातार जारी हैं, लेकिन सरयू की धारा के तेज बहाव के कारण जमीन का कटाव रुक नहीं पा रहा है।
प्रशासन के अनुसार शुक्रवार को सरयू नदी के कटान की चपेट में आने से 12 पक्के मकान और एक झोपड़ी समेत कुल 13 मकान नदी में समाहित हो गए। अचानक घरों के नदी में समाने से प्रभावित परिवारों में भय और दहशत का माहौल है।
सरयू नदी के कटान से जिन लोगों के मकान प्रभावित हुए हैं, उनके लिए प्रशासन ने आर्थिक सहायता की प्रक्रिया शुरू कर दी है। कटान से प्रभावित मकान मालिकों को अहैतुक सहायता उपलब्ध कराने की कार्रवाई की जा रही है। प्रशासन के मुताबिक इससे पहले नदी कटान से प्रभावित 10 परिवारों अथवा व्यक्तियों को अहैतुक सहायता दी जा चुकी है। इसके अलावा जिन परिवारों के मकान नदी के कटान में समाहित हुए हैं, उनके पुनर्वासन की प्रक्रिया भी कराई जा रही है। प्रशासन का प्रयास है कि प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के साथ उन्हें नियमानुसार राहत और सहायता उपलब्ध कराई जाए। वहीं नदी के कटान वाले इलाकों में अधिकारियों की निगरानी लगातार जारी है।
एल्गिन ब्रिज-संजय सेतु के पास केंद्रीय जल आयोग के अनुसार शनिवार दोपहर 12 बजे सरयू नदी का जलस्तर 106.080 मीटर दर्ज किया गया। नदी का खतरे का लाल निशान 106.070 मीटर है। इस तरह सरयू का जलस्तर लाल निशान से एक सेंटीमीटर ऊपर बना हुआ है। फिलहाल नदी का जलस्तर स्थिर बताया जा रहा है। हालांकि जलस्तर में कमी के बावजूद कटान तेज होने से ग्रामीणों की चिंता कम नहीं हुई है। प्रशासन के सामने अब बाढ़ के साथ-साथ नदी के कटान को नियंत्रित करने की भी बड़ी चुनौती है।
बाढ़ और कटान की स्थिति पर प्रशासन की लगातार नजर बनी हुई है। जिलाधिकारी ईशान प्रताप सिंह, अपर जिलाधिकारी निरंकार सिंह, एसडीएम आकांक्षा गुप्ता और तहसीलदार विपुल सिंह समेत संबंधित अधिकारी प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण कर रहे हैं। प्रशासन की टीमें जलस्तर, कटान, राहत व्यवस्था, नाव संचालन और प्रभावित परिवारों की स्थिति की लगातार जानकारी ले रही हैं। ग्रामीणों को नदी के किनारे जाने से बचने और प्रशासन की ओर से निर्धारित सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी जा रही है। बाराबंकी में फिलहाल सबसे बड़ी चिंता यह है कि सरयू नदी का जलस्तर लाल निशान से ऊपर बना हुआ है और जलस्तर घटने के साथ नदी का कटान तेज हो गया है। उधिया गांव में 13 मकानों के नदी में समाने के बाद आसपास के ग्रामीणों में भी अपने घर और जमीन को लेकर डर बढ़ गया है। ऐसे में प्रशासन के राहत एवं बचाव प्रयासों के साथ अब कटान रोकने के काम पर भी सबकी नजर बनी हुई है। UP News :
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